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निम्न मध्यम वर्ग खुश, व्यापारी-किसानों की पूरी नहीं हुई मुराद
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:32 AM IST
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अर्बन एस्टेट में बजट पर निगाहें लगाए एक परिवार।
- फोटो : jind
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बुधवार को संसद में पेश किया गया आम बजट निम्न मध्यम वर्ग के लोगों को काफी रास आया है। लोगों का मानना है कि बजट में महंगाई पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ निकला है। वहीं, किसान नेताओं और विपक्षियों को बजट में कुछ खास नहीं लग रहा है।
नए बजट से नौकरीपेशा और मध्यम व निम्न मध्यम वर्ग को कर में छूट से काफी राहत मिली है। हालांकि, मध्यम वर्ग इससे काफी खुश नहीं हैं। व्यापारियों का मानना है कि आयकर में कम से कम पांच लाख रुपये की छूट होनी चाहिए थी। फिर भी पांच लाख रुपये तक पांच प्रतिशत कर से उन्हें राहत मिली है। पहले यह कर दस प्रतिशत था। किसान वर्ग ने बजट में दी गई 60 दिन की ब्याज माफी, फसल बीमा योजना 40 फीसदी कवरेज बढ़ाने जैसी घोषणाओं को कम बताया है।
आयकर सीमा में छूट से निराशा
आयकर में छूट की सीमा ढाई से तीन लाख रुपये तक किए जाने का कोई मतलब नहीं है। इससे व्यापारियों को कोई लाभ नहीं होगा। बजट में कम से कम पांच लाख तक की आय को कर मुक्त किया जाना चाहिए था।
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-जय कुमार गोयल, व्यापारी
स्लैब में दिक्कत
बजट में काफी अच्छी चीजें भी हैं, लेकिन टैक्स के स्लैब सही नहीं हैं। तीन से पांच लाख की आय पर पांच प्रतिशत टैक्स है, जबकि पांच से दस लाख पर 20 प्रतिशत टैक्स है। यह पहले की तरह ही है। यह टैक्स कम रखना चाहिए था। इससे टैक्स चोरी बढ़ेगी। टैक्स कम करने से होम लोन और ब्याज दरों में कमी आती।
-रणबीर सिंह सरोहा, बैंक अधिकारी
टैक्स के बदले मिलें सुविधाएं
सरकार ने टैक्स के स्लैब बनाए हैं, लोग इसके अनुसार ही टैक्स देंगे भी, लेकिन उन्हें अलग से सुविधाएं दी जाएं। बजट में महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को महंगा किया जा रहा है। इससे डिजिटल अभियान पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। युवाओं के लिए बजट खास नहीं है।
-एडवोकेट राजकुमार
मिलेगी राहत
टैक्स में छूट मिलने से महंगाई कम होने की उम्मीद है। वहीं कम आमदनी वाले आदमी को भी अब कुछ बचत हो सकेगी। इससे महंगाई कम हो सकती है। वैसे बजट में सिर्फ आंकड़े होते हैं, वास्तव में क्या होगा, यह समय ही बताएगा।
-संतोष देवी, गृहिणी
किसानों को निराशा
बजट में किसानों के लिए कोई राहत नहीं है। दस लाख करोड़ रुपये किसानों के कर्ज के लिए आवंटित करने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। किसान को कर्ज नहीं, अपनी फसल का लाभकारी मूल्य चाहिए। इससे ही उसका भला हो सकता है। अच्छे बीज और खाद, सिंचाई के लिए पानी किसान की जरूरत हैं। कर्ज देकर तो सिर्फ किसानों की जमीन हड़पने की साजिश रचि जा रही है।
-फूल सिंह श्योकंद, राज्य उप प्रधान अखिल भारतीय किसान सभा
छोटे व्यापारियों को मिलेगी
बजट में हालांकि बहुत खास नहीं है, लेकिन आयकर में छूट से छोटे व्यापारी को राहत मिल सकती है। तीन लाख रुपये से अधिक के लेनदेन डिजिटल होने से ब्लैक मनी पर रोक लगेगी। इससे महंगाई कम होने की उम्मीद है।
-रामकुमार, व्यापारी
बजट में महिलाओं और बच्चों पर पूरा ध्यान दिया गया है। इसमें आंगनबाड़ी के माध्यम से 500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए छह हजार रुपये उनके बैंक अकाउंट में सीधे डालने का भी प्रावधान किया गया। यह महिलाओं के लिए काफी सकारात्मक बजट है।
-पूनम सैनी, चेयरपर्सन, जींद नगरपरिषद
व्यापारियों को बड़ी राहत
बजट में आयकर की छूट हर वर्ग के लिए खुशखबरी है। वहीं रक्षा पर 2.74 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। आर्थिक अपराधियों से निपटने के लिए खास योजना सरकार ने बनाई है। भूमि अधिग्रहण की राशि करमुक्त का फैसला सराहनीय है। कुल मिलाकर बजट में हर वर्ग का पूरा ख्याल रखा गया है।
-मनीष गोयल उर्फ बबूल, उप प्रधान जींद मार्केट कमेटी
देश की जनता को ठगने का दस्तावेज
बजट में आम आदमी के लिए कोई राहत नहीं है। देश के बहुत अधिक लोग आयकर की सीमा में ही नहीं आते। ऐसे में उनके बजट में क्या है। मनरेगा में सिर्फ बजट की बात की जा रही है। कोई सुधार नहीं। किसानों को सिर्फ कर्ज की बात की गई है, कर्ज से निकालने के लिए कुछ नहीं। भाजपा ने अपना गरीब विरोधी चेहरा बजट में दिखा दिया है।
परमेंद्र सिंह ढुल, विधायक जुलाना
संतुलित और व्यवहारिक बजट
वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट संतुलित व व्यवहारिक है। बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। गरीबों का विशेष ध्यान रखा गया है। व्यापार और रोजगार को बढ़ाने के लिए बजट में कई योजनाएं हैं। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने पर जोर दिया गया है। महंगाई कम हो और बुनियादी सुविधाएं हर व्यक्ति को मिलें, यह इस बजट की सबसे खास बात है।
-जसबीर देशवाल, विधायक सफीदों
विकास की नहीं योजना
बजट में सिर्फ आंकड़ों का खेल दिखाया गया है। कोई भी ठोस विकास योजना नहीं है। गरीबों को कोई ध्यान नहीं रखा गया। सिर्फ कुछ लोगों को खुश करने के लिए बजट बनाया गया है।
-जगबीर ढिगाना, प्रदेश सचिव, कांग्रेस
एक्सपर्ट व्यू
यह सामान्य बजट है, कुछ भी खास नहीं है। बजट को नोटबंदी व जीएसटी को ध्यान में रखकर सामने रखा गया है। नोटबंदी से मंदी की स्थिति है, इससे सरकार ने अपने खर्चे बढ़ाने का प्रावधान किया है। जिन क्षेत्रों में पैसा खर्च किया जाना है, यहां अधिक खर्च बढ़ सकता है। उम्मीद के अनुसार आयकर में छूट नहीं दी गई है। कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। अगर यह बजट वास्तव में सही रूप से खर्च होगा, तो विकास दर स्थिर रहेगी और महंगाई भी रुकेगी। दो हजार रुपये से ज्यादा चंदा राजनीतिक पार्टियों को कैश के रूप में नहीं देने का फैसला राजनीति से प्रेरित है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। सबको पता है कि कैसे राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया जाता है। इससे कोई खास फर्क पड़ता दिखाई नहीं देता।
जयवीर ढांडा, सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं अर्थशास्त्री
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नए बजट से नौकरीपेशा और मध्यम व निम्न मध्यम वर्ग को कर में छूट से काफी राहत मिली है। हालांकि, मध्यम वर्ग इससे काफी खुश नहीं हैं। व्यापारियों का मानना है कि आयकर में कम से कम पांच लाख रुपये की छूट होनी चाहिए थी। फिर भी पांच लाख रुपये तक पांच प्रतिशत कर से उन्हें राहत मिली है। पहले यह कर दस प्रतिशत था। किसान वर्ग ने बजट में दी गई 60 दिन की ब्याज माफी, फसल बीमा योजना 40 फीसदी कवरेज बढ़ाने जैसी घोषणाओं को कम बताया है।
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आयकर सीमा में छूट से निराशा
आयकर में छूट की सीमा ढाई से तीन लाख रुपये तक किए जाने का कोई मतलब नहीं है। इससे व्यापारियों को कोई लाभ नहीं होगा। बजट में कम से कम पांच लाख तक की आय को कर मुक्त किया जाना चाहिए था।
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-जय कुमार गोयल, व्यापारी
स्लैब में दिक्कत
बजट में काफी अच्छी चीजें भी हैं, लेकिन टैक्स के स्लैब सही नहीं हैं। तीन से पांच लाख की आय पर पांच प्रतिशत टैक्स है, जबकि पांच से दस लाख पर 20 प्रतिशत टैक्स है। यह पहले की तरह ही है। यह टैक्स कम रखना चाहिए था। इससे टैक्स चोरी बढ़ेगी। टैक्स कम करने से होम लोन और ब्याज दरों में कमी आती।
-रणबीर सिंह सरोहा, बैंक अधिकारी
टैक्स के बदले मिलें सुविधाएं
सरकार ने टैक्स के स्लैब बनाए हैं, लोग इसके अनुसार ही टैक्स देंगे भी, लेकिन उन्हें अलग से सुविधाएं दी जाएं। बजट में महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को महंगा किया जा रहा है। इससे डिजिटल अभियान पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। युवाओं के लिए बजट खास नहीं है।
-एडवोकेट राजकुमार
मिलेगी राहत
टैक्स में छूट मिलने से महंगाई कम होने की उम्मीद है। वहीं कम आमदनी वाले आदमी को भी अब कुछ बचत हो सकेगी। इससे महंगाई कम हो सकती है। वैसे बजट में सिर्फ आंकड़े होते हैं, वास्तव में क्या होगा, यह समय ही बताएगा।
-संतोष देवी, गृहिणी
किसानों को निराशा
बजट में किसानों के लिए कोई राहत नहीं है। दस लाख करोड़ रुपये किसानों के कर्ज के लिए आवंटित करने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। किसान को कर्ज नहीं, अपनी फसल का लाभकारी मूल्य चाहिए। इससे ही उसका भला हो सकता है। अच्छे बीज और खाद, सिंचाई के लिए पानी किसान की जरूरत हैं। कर्ज देकर तो सिर्फ किसानों की जमीन हड़पने की साजिश रचि जा रही है।
-फूल सिंह श्योकंद, राज्य उप प्रधान अखिल भारतीय किसान सभा
छोटे व्यापारियों को मिलेगी
बजट में हालांकि बहुत खास नहीं है, लेकिन आयकर में छूट से छोटे व्यापारी को राहत मिल सकती है। तीन लाख रुपये से अधिक के लेनदेन डिजिटल होने से ब्लैक मनी पर रोक लगेगी। इससे महंगाई कम होने की उम्मीद है।
-रामकुमार, व्यापारी
बजट में महिलाओं और बच्चों पर पूरा ध्यान दिया गया है। इसमें आंगनबाड़ी के माध्यम से 500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए छह हजार रुपये उनके बैंक अकाउंट में सीधे डालने का भी प्रावधान किया गया। यह महिलाओं के लिए काफी सकारात्मक बजट है।
-पूनम सैनी, चेयरपर्सन, जींद नगरपरिषद
व्यापारियों को बड़ी राहत
बजट में आयकर की छूट हर वर्ग के लिए खुशखबरी है। वहीं रक्षा पर 2.74 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। आर्थिक अपराधियों से निपटने के लिए खास योजना सरकार ने बनाई है। भूमि अधिग्रहण की राशि करमुक्त का फैसला सराहनीय है। कुल मिलाकर बजट में हर वर्ग का पूरा ख्याल रखा गया है।
-मनीष गोयल उर्फ बबूल, उप प्रधान जींद मार्केट कमेटी
देश की जनता को ठगने का दस्तावेज
बजट में आम आदमी के लिए कोई राहत नहीं है। देश के बहुत अधिक लोग आयकर की सीमा में ही नहीं आते। ऐसे में उनके बजट में क्या है। मनरेगा में सिर्फ बजट की बात की जा रही है। कोई सुधार नहीं। किसानों को सिर्फ कर्ज की बात की गई है, कर्ज से निकालने के लिए कुछ नहीं। भाजपा ने अपना गरीब विरोधी चेहरा बजट में दिखा दिया है।
परमेंद्र सिंह ढुल, विधायक जुलाना
संतुलित और व्यवहारिक बजट
वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट संतुलित व व्यवहारिक है। बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। गरीबों का विशेष ध्यान रखा गया है। व्यापार और रोजगार को बढ़ाने के लिए बजट में कई योजनाएं हैं। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने पर जोर दिया गया है। महंगाई कम हो और बुनियादी सुविधाएं हर व्यक्ति को मिलें, यह इस बजट की सबसे खास बात है।
-जसबीर देशवाल, विधायक सफीदों
विकास की नहीं योजना
बजट में सिर्फ आंकड़ों का खेल दिखाया गया है। कोई भी ठोस विकास योजना नहीं है। गरीबों को कोई ध्यान नहीं रखा गया। सिर्फ कुछ लोगों को खुश करने के लिए बजट बनाया गया है।
-जगबीर ढिगाना, प्रदेश सचिव, कांग्रेस
एक्सपर्ट व्यू
यह सामान्य बजट है, कुछ भी खास नहीं है। बजट को नोटबंदी व जीएसटी को ध्यान में रखकर सामने रखा गया है। नोटबंदी से मंदी की स्थिति है, इससे सरकार ने अपने खर्चे बढ़ाने का प्रावधान किया है। जिन क्षेत्रों में पैसा खर्च किया जाना है, यहां अधिक खर्च बढ़ सकता है। उम्मीद के अनुसार आयकर में छूट नहीं दी गई है। कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। अगर यह बजट वास्तव में सही रूप से खर्च होगा, तो विकास दर स्थिर रहेगी और महंगाई भी रुकेगी। दो हजार रुपये से ज्यादा चंदा राजनीतिक पार्टियों को कैश के रूप में नहीं देने का फैसला राजनीति से प्रेरित है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। सबको पता है कि कैसे राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया जाता है। इससे कोई खास फर्क पड़ता दिखाई नहीं देता।
जयवीर ढांडा, सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं अर्थशास्त्री