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ठगी का खेल: सस्ते दाम पर सरसों खरीदकर एमएसपी पर बेच रहे दलाल
Fri, 28 Mar 2025 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 28 Mar 2025 11:40 PM IST
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28जेएनडी12-अनाज मंडी में सरसों की सफाई का चल रहा कार्य। संवाद
- फोटो : प्रो. रमेश चन्द्रा
जींद। अनाज मंडी में सरसों की खरीद-फरोख्त में लगातार धांधली बरतने के मामले सामने आ रहे हैं। किसानों को सरसों का बारीक दाना बताकर गुमराह किया जाता है और उसी सरसों को सस्ते दाम में खरीदकर फिर एमएसपी पर 400-500 रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है। इससे किसान को मालूम भी नहीं होता कि उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। हालांकि इस मामले में हैफेड अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कोई मामला नहीं है।
सरकार जहां किसानों की फसलों का एक-एक दाना खरीदने का दावा कर रही है, वहीं जींद में सरसों की फसल के छोटे दाने बताकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। इससे किसानों को फसल औणे-पौणे दाम में बेचनी पड़ रही है जबकि सरसों की फसल एमएसपी रेट पर बिकनी चाहिए, लेकिन किसानों को दलाल एमएसपी रेट से भी वंचित रखा जा रहा है। शुक्रवार सुबह तीन-चार गांव के किसान सरसों की फसल लेकर अनाज मंडी पहुंचे। वहां सरसों की फसलों के सैंपल लिए गए। फिर उन्हें कहा गया कि सरसों में नमी है और दाना भी बारीक है। इसलिए इस सरसों को एमएसपी रेट पर नहीं खरीदा जाएगा। फिर उन्हें कहा गया कि यहां से सरसों को उठा लो और सरसों की ढेरियों के पीछे उतार दो। वहां उतारने के बाद उनकी सरसों को 5200-5300 में खरीदा गया। इसके बाद उसी सरसों को एमएसपी रेट 5950 रुपये पर बेच दी गई। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400-500 रुपये नुकसान हो गया।
बॉक्स
एमएसपी रेट पर बिके सरसों की फसल
किसान सतबीर सिंह, रामस्वरूप, रामजुआरी, सुरजीत सिंह, दलेल सिंह, रोहताश, सुखदेव का कहना है सरसों बेचने के लिए किसान को परेशान किया जा रहा है। कभी बारीक दाने बताकर वापस लौटाया जाता है तो कभी लाल दाना बताकर खरीद नहीं की जाती। आखिर में किसानों को आढ़तियों को सस्ते दाम में सरसों बेचनी पड़ती है। अब किसानों को एमएसपी पर कैसे बेचे, जब फसलों में अनेकों खामियां निकाली जाती है। थोड़ी नमी वाली सरसों ले आएं तो गीली बताई जाती है और यदि सूखी ले आएं तो सूखे दाने सफाई करते समय झारने से निकल जाते हैं, तो उसकी बिक्री नहीं हो पाती।
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वर्जन
शुक्रवार को इस तरह का कोई मामला नहीं आया है। दो-तीन पहले इस तरह का मामला सामने आया था। इसके बाद वहां दूसरे कर्मचारी की ड्यूटी लगा दी थी। यदि ऐसा कोई मामला आता है तो पूरी गहनता से जांच करवाई जाएगी।
-- रतनदीप सिंह, मैनेजर, हैफैड जींद
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सरकार जहां किसानों की फसलों का एक-एक दाना खरीदने का दावा कर रही है, वहीं जींद में सरसों की फसल के छोटे दाने बताकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। इससे किसानों को फसल औणे-पौणे दाम में बेचनी पड़ रही है जबकि सरसों की फसल एमएसपी रेट पर बिकनी चाहिए, लेकिन किसानों को दलाल एमएसपी रेट से भी वंचित रखा जा रहा है। शुक्रवार सुबह तीन-चार गांव के किसान सरसों की फसल लेकर अनाज मंडी पहुंचे। वहां सरसों की फसलों के सैंपल लिए गए। फिर उन्हें कहा गया कि सरसों में नमी है और दाना भी बारीक है। इसलिए इस सरसों को एमएसपी रेट पर नहीं खरीदा जाएगा। फिर उन्हें कहा गया कि यहां से सरसों को उठा लो और सरसों की ढेरियों के पीछे उतार दो। वहां उतारने के बाद उनकी सरसों को 5200-5300 में खरीदा गया। इसके बाद उसी सरसों को एमएसपी रेट 5950 रुपये पर बेच दी गई। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400-500 रुपये नुकसान हो गया।
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एमएसपी रेट पर बिके सरसों की फसल
किसान सतबीर सिंह, रामस्वरूप, रामजुआरी, सुरजीत सिंह, दलेल सिंह, रोहताश, सुखदेव का कहना है सरसों बेचने के लिए किसान को परेशान किया जा रहा है। कभी बारीक दाने बताकर वापस लौटाया जाता है तो कभी लाल दाना बताकर खरीद नहीं की जाती। आखिर में किसानों को आढ़तियों को सस्ते दाम में सरसों बेचनी पड़ती है। अब किसानों को एमएसपी पर कैसे बेचे, जब फसलों में अनेकों खामियां निकाली जाती है। थोड़ी नमी वाली सरसों ले आएं तो गीली बताई जाती है और यदि सूखी ले आएं तो सूखे दाने सफाई करते समय झारने से निकल जाते हैं, तो उसकी बिक्री नहीं हो पाती।
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शुक्रवार को इस तरह का कोई मामला नहीं आया है। दो-तीन पहले इस तरह का मामला सामने आया था। इसके बाद वहां दूसरे कर्मचारी की ड्यूटी लगा दी थी। यदि ऐसा कोई मामला आता है तो पूरी गहनता से जांच करवाई जाएगी।