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Jind News: बेलरखां का माॅडल स्कूल बना नजीर, दाखिले के लिए होती है मारामारी

Tue, 05 Aug 2025 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 05 Aug 2025 12:11 AM IST
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Belrakhan's model school has become an example, there is a fight for admission
04जेएनडी26: विद्यालय से छुट्टी के बाद घर जाते विद्यार्थी। संवाद
नरवाना। सरकारी स्कूल आज घटते नामांकन और शिक्षा के स्तर में आई गिरावट से जूझ रहे हैं। वहीं बेलरखा गांव का मॉडल संस्कृति स्कूल ग्रामीण शिक्षा के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। यह न केवल ग्रामीण क्षेत्र का पहला अंग्रेजी मीडियम स्कूल है बल्कि जिले का सबसे पहला मॉडल स्कूल भी है जो शिक्षा, अनुशासन और सुविधाओं के मामले में एक अलग पहचान बना चुका है।
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2024 में स्कूल में कुल 760 विद्यार्थी थे। इस साल संख्या बढ़कर 836 पहुंच गई है। पहली से पांचवीं कक्षा तक विद्यार्थियों की संख्या 338 से बढ़कर 389 हो गई है। छठी से 12वीं के विद्यार्थियों की संख्या 442 से बढ़कर 447 हो गई है। कुल मिलाकर 76 नए विद्यार्थियों का नामांकन यह दर्शाता है कि अभिभावकों का भरोसा लगातार इस स्कूल पर बढ़ रहा है।
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विद्यालय की लोकप्रियता का आलम यह है कि आसपास के कई गांवों जैसे सुरजाखेड़ा, अमृतसर, गुरुसर, कोलेखां, हमीरगढ़, खरल, धरोदी, धनोरी, लोन, मालखेड़ा और गुरथली से बड़ी संख्या में छात्र यहां पढ़ने के लिए आते हैं। इतना ही नहीं, शहर के कई माता-पिता भी अपने बच्चों का इस मॉडल स्कूल में दाखिला दिला रहे हैं।
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सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक भी अपने बच्चों को यहीं पढ़ा रहे हैं। विद्यालय में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट क्लास की सुविधा है। इससे बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल रही है। हर सुबह प्रार्थना के साथ दिन की शुरुआत होती है और समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जाता है।
शिक्षा
के साथ व्यावहारिक और स्वास्थ्य जागरूकता का भी पढ़ाया जाता है पाठ

प्रधानाचार्य बलजीत सिंह गोयत ने बताया कि विद्यालय में शिक्षा ही नहीं, व्यावहारिक ज्ञान, मानसिक, शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी दी जाती है। खेलों में भी विद्यालय के कई विद्यार्थियों ने स्कूल और गांव का नाम रोशन किया है। हालांकि, बढ़ती संख्या के साथ एक समस्या भी सामने आ रही है। स्कूल में कमरों और बिल्डिंग की संख्या सीमित होने के कारण हर विद्यार्थी को दाखिला देना संभव नहीं हो पाता। बेलरखा का मॉडल संस्कृति स्कूल आज ग्रामीण शिक्षा का एक चमकता सितारा बनकर उभर रहा है और यह साबित कर रहा है कि अगर समर्पण और दूरदर्शिता हो तो सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों को टक्कर दे सकते हैं।

विद्यार्थियों के लिए हैं ये सुविधाएं
साइंस पैनोरमा, एस्ट्रोनॉमी लैब, लैंग्वेज लैब, बैंकिंग लैब, बायो लैब, मैथ लैब, फिजिकल लैब, केमिस्ट्री लैब, भारत लब लाइब्रेरी कंप्यूटर लैब, सुलभ शौचालय, हर्बल पार्क, साइंस क्विज पार्क गैलरी, पजल गैलरी, प्राइमरी कक्षा के बच्चों के लिए झूले युक्त पार्क की सुविधा उपलब्ध है।
फोटो कैप्शन
04जेएनडी26: विद्यालय से छुट्टी के बाद घर जाते विद्यार्थी। संवाद
04जेएनडी27: विद्यालय का हरा भरा पार्क। संवाद
04जेएनडी28: विद्यालय में तैयार किया गया हर्बल पार्क। संवाद

04जेएनडी26: विद्यालय से छुट्टी के बाद घर जाते विद्यार्थी। संवाद

04जेएनडी26: विद्यालय से छुट्टी के बाद घर जाते विद्यार्थी। संवाद

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