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Jind News: पाजू खुर्द के ऐतिहासिक शिव कुंड का हो रहा सुंदरीकरण, मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
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07जेएनडी09: पाजू खुर्द गांव में स्थित ऐतिहासिक शिव कुंड। संवाद
सफीदों। करीब दो शताब्दी पुराने ऐतिहासिक शिव कुंड को नया स्वरूप देने की दिशा में गांव पाजू खुर्द ने बड़ा कदम उठाया है। 18 लाख रुपये की लागत से कुंड और उसके आसपास के क्षेत्र का व्यापक सुंदरीकरण किया जा रहा है जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
गांव का इतिहास भी बेहद रोचक है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 200 वर्ष पूर्व मुआना और पाजू क्षेत्र के लोगों के बीच होने वाले विवादों को समाप्त करने के लिए गांव के पांच नंबरदारों ने जींद रियासत के राजा रघुबीर सिंह से 1900 रुपये में लगभग पांच हजार बीघा जमीन खरीदी थी। इसके बाद पाजू खुर्द गांव की स्थापना हुई। वर्तमान में गांव पांच पानों (मोहल्लों) में विभाजित है।
गांव का ऐतिहासिक शिव कुंड धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पहले कुंड का तालाब कच्चा था। इस कारण श्रद्धालुओं को स्नान करने में कठिनाई होती थी। परिसर में प्रवेश द्वार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव था। अब पंचायत द्वारा कुंड का सुंदरीकरण कराया जा रहा है और विभिन्न आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
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शिव कुंड से जुड़ी एक अनूठी मान्यता भी गांव की पहचान है। ग्रामीणों का मानना है कि महाभारत युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। इसी कारण इस भूमि को आज भी ''''''''देह धरती'''''''' कहा जाता है। मान्यता के चलते गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अस्थियां नहीं उठाई जातीं।
भाईचारे की अनूठी मिसाल बना गांव
सरपंच निरंजन ने बताया कि गांव के इतिहास में पहली बार पंचायत चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हुए हैं। गांव में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की अनूठी परंपरा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि गांव का श्मशान घाट और कब्रिस्तान एक-दूसरे के साथ स्थित हैं जो आपसी सद्भाव का प्रतीक हैं।
जलघर, स्टेडियम और जिम की उठाई मांग
सरपंच निरंजन ने प्रशासन को पत्र लिखकर गांव में खेल और पेयजल सुविधाओं के विस्तार की मांग उठाई है। स्टेडियम और जिम के अभाव में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं भूजल खारा होने के कारण पेयजल संकट बना रहता है। उन्होंने सरकार से गांव में जलघर निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को स्वच्छ और मीठा पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
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गांव का इतिहास भी बेहद रोचक है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 200 वर्ष पूर्व मुआना और पाजू क्षेत्र के लोगों के बीच होने वाले विवादों को समाप्त करने के लिए गांव के पांच नंबरदारों ने जींद रियासत के राजा रघुबीर सिंह से 1900 रुपये में लगभग पांच हजार बीघा जमीन खरीदी थी। इसके बाद पाजू खुर्द गांव की स्थापना हुई। वर्तमान में गांव पांच पानों (मोहल्लों) में विभाजित है।
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गांव का ऐतिहासिक शिव कुंड धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पहले कुंड का तालाब कच्चा था। इस कारण श्रद्धालुओं को स्नान करने में कठिनाई होती थी। परिसर में प्रवेश द्वार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव था। अब पंचायत द्वारा कुंड का सुंदरीकरण कराया जा रहा है और विभिन्न आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
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शिव कुंड से जुड़ी एक अनूठी मान्यता भी गांव की पहचान है। ग्रामीणों का मानना है कि महाभारत युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। इसी कारण इस भूमि को आज भी ''''''''देह धरती'''''''' कहा जाता है। मान्यता के चलते गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अस्थियां नहीं उठाई जातीं।
भाईचारे की अनूठी मिसाल बना गांव
सरपंच निरंजन ने बताया कि गांव के इतिहास में पहली बार पंचायत चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हुए हैं। गांव में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की अनूठी परंपरा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि गांव का श्मशान घाट और कब्रिस्तान एक-दूसरे के साथ स्थित हैं जो आपसी सद्भाव का प्रतीक हैं।
जलघर, स्टेडियम और जिम की उठाई मांग
सरपंच निरंजन ने प्रशासन को पत्र लिखकर गांव में खेल और पेयजल सुविधाओं के विस्तार की मांग उठाई है। स्टेडियम और जिम के अभाव में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं भूजल खारा होने के कारण पेयजल संकट बना रहता है। उन्होंने सरकार से गांव में जलघर निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को स्वच्छ और मीठा पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।