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नाम बदलने से बाबा साहब की विरासत नहीं मिटाई जा सकती : कुमारी सैलजा
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12जेएनडी19: रानीतालाब पर कुमारी सैलजा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा पर आरोप लगाते हुए
जींद। भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय का नाम बदलकर अटल लाइब्रेरी किए जाने के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अनुसूचित जाति समाज के लोगों ने रानी तालाब स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के समक्ष रोष प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में सिरसा सांसद कुमारी सैलजा विशेष रूप से शामिल हुईं। सांसद कुमारी शैलजा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर संचालित पुस्तकालय का नाम बदलना करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहले से स्थापित संस्थानों पर केवल नए बोर्ड लगाने से बाबा साहब के योगदान और उनकी विरासत को मिटाया नहीं जा सकता।
सैलजा ने कहा कि यदि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान करना चाहती है तो उनके नाम पर नई योजनाएं, नए पुस्तकालय और विकास कार्य शुरू करे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश का युवा आज बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और अवसरों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है जबकि सरकार पुराने संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है।
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उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने, रोजगार सृजन और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सांसद ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय की समीक्षा की जाए और पुस्तकालय का नाम पुनः भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय रखा जाए।
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प्रदर्शन में सिरसा सांसद कुमारी सैलजा विशेष रूप से शामिल हुईं। सांसद कुमारी शैलजा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर संचालित पुस्तकालय का नाम बदलना करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहले से स्थापित संस्थानों पर केवल नए बोर्ड लगाने से बाबा साहब के योगदान और उनकी विरासत को मिटाया नहीं जा सकता।
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सैलजा ने कहा कि यदि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान करना चाहती है तो उनके नाम पर नई योजनाएं, नए पुस्तकालय और विकास कार्य शुरू करे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश का युवा आज बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और अवसरों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है जबकि सरकार पुराने संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है।
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उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने, रोजगार सृजन और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सांसद ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय की समीक्षा की जाए और पुस्तकालय का नाम पुनः भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय रखा जाए।