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Jind News: मालवी गांव का 400 साल पुराना शिव मंदिर बना आस्था का केंद्र

Fri, 29 May 2026 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 11:54 PM IST
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Baba Mastnath and several other Mahants performed penance in the Shiva temple.
29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद
जुलाना। क्षेत्र के मालवी गांव में स्थित लगभग 400 साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर आज भी ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में केवल मालवी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कमाच खेड़ा, देशखेड़ा और देवरड़ गांवों से भी श्रद्धालु हर महीने नवमी के दिन पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास कई सदियों पुराना है और यहां अनेक सिद्ध महंतों ने कठोर तपस्या कर क्षेत्र की खुशहाली के लिए साधना की थी। इस मंदिर में सबसे पहले बाबा मस्तनाथ ने धुनों के बीच बैठकर कठोर तपस्या की थी।
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इसके बाद तेजानाथ, कन्हैयानाथ, छोटूनाथ, चंदननाथ, ज्ञाननाथ और खुजाननाथ जैसे महंतों ने भी यहां वर्षों तक साधना कर लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया। मंदिर परिसर में आज भी वह स्थान मौजूद हैं जहां महंतों ने धुने जलाकर तप किया था।
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श्रद्धालुओं का मानना है कि महंतों के आशीर्वाद और तपस्या का ही प्रभाव है कि गांव में कभी भी ओलावृष्टि से फसलों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ।मंदिर में हर वर्ष शिवरात्रि और सावन मास के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।

गांव के सरपंच राजेंद्र जांगड़ा ने भी तपस्या शुरू की

महंतों की तपस्या और त्याग से प्रभावित होकर गांव के सरपंच राजेंद्र जांगड़ा ने भी तपस्या शुरू की है। सरपंच राजेंद्र जांगड़ा इन दिनों नौ धुनों के बीच बैठकर 41 दिनों की कठोर साधना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी तपस्या का उद्देश्य गांव की सुख-समृद्धि, भाईचारे और विकास की कामना करना है।

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शिव मंदिर गांव की पहचान है। यहां आने से मन को शांति मिलती है और लोगों की मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा है।-रोहताश, ग्रामीण

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बचपन से वह मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं। गांव के बुजुर्गों से उन्होंने महंतों की तपस्या की कई कहानियां सुनी हैं जो आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।-राजपाल दलाल, ग्रामीण

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हर नवमी को आसपास के गांवों से महिलाएं यहां पूजा करने आती हैं। मंदिर में पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।-जयभगवान, ग्रामीण



सरपंच राजेंद्र जांगड़ा की ओर से की जा रही तपस्या से गांव में धार्मिक माहौल बना हुआ है। लोग सुबह-शाम मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।-सत्यवान, ग्रामीण


फोटो कैप्शन:
29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी18: रोहताश ।

29जेएनडी19 : राजपाल दलाल।

29जेएनडी20 : जयभगवान।

29जेएनडी 21: सत्यवान।

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

29जेएनडी17: मालवी गांव का शिव मंदिर । संवाद

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