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Jind News: आशा कार्यकर्ताओं ने 17 तक बढ़ाई हड़ताल
Fri, 11 Aug 2023 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 11 Aug 2023 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। लघु सचिवालय के सामने आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल वीरवार को तीसरे दिन जिला प्रधान नीलम की अध्यक्षता में जारी रही। आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी हड़ताल 17 अगस्त तक बढ़ा दी है।
आशा कार्यकर्ता यूनियन की राज्य स्तर की नेता मुकेश और जगवंती ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार आशाओं का शोषण कर रही है। वर्ष 2018 में आशाओं के साथ किए गए समझौतों को लागू नहीं किया जा रहा और ऊपर से हर रोज सरकार नए-नए काम ऑनलाइन करने के लिए थोप रही है। इसके बदले में सरकार आशाओं को किसी भी प्रकार का मेहनताना नहीं देती, उल्टा विभाग के उच्च अधिकारियों एवं सरकार की ओर से आशाओं को तरह-तरह की धमकियां दी जा रही हैं। हालात तो यह है कि आज तक किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों पर कोई सुविधा आशाओं को मुहैया नहीं करवाई गई।
कहा कि आशाओं के लिए बैठने की जगह तो दूर, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में विभाग का काम करने, बैठक आदि के लिए जगह तक मुहैया नहीं करवाई गई है और ना ही आशाओं को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। इसके कारण आशा कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति भारी रोष है। इसलिए आशा वर्कर यूनियन हरियाणा ने सरकार की वादाखिलाफी एवं अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया था और इसी कड़ी में जिले की आशा वर्करों ने लघु सचिवालय पर धरना देकर हड़ताल में शामिल हुई। उन्होंने मांग की कि 2018 का समझौता लागू करवाया जाए। आशा वर्करों की हड़ताल में मुख्य रूप सुनीता, शीला, संतोष, बाला, सुमन, कमलेश, पूजा, रोशनी, मंजू, अंजू, राजकुमारी आदि शामिल हुईं।
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यह हैं आशा कार्यकर्ताओं की मांगें
आशा वर्करों को कर्मचारी का दर्जा मिले, सरकार की तरफ से जरूरत का सभी तरह का सामान उपलब्ध करवाया जाए, न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू हो, ऑनलाइन काम का मेहनताना दिया जाए, आशाओं का सभी तरह का शोषण बंद हो, स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों में आशा वर्करों के लिए बैठने का प्रबंध, अलमारी, कुर्सियों आदि का प्रबंध किया जाए।
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जींद। लघु सचिवालय के सामने आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल वीरवार को तीसरे दिन जिला प्रधान नीलम की अध्यक्षता में जारी रही। आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी हड़ताल 17 अगस्त तक बढ़ा दी है।
आशा कार्यकर्ता यूनियन की राज्य स्तर की नेता मुकेश और जगवंती ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार आशाओं का शोषण कर रही है। वर्ष 2018 में आशाओं के साथ किए गए समझौतों को लागू नहीं किया जा रहा और ऊपर से हर रोज सरकार नए-नए काम ऑनलाइन करने के लिए थोप रही है। इसके बदले में सरकार आशाओं को किसी भी प्रकार का मेहनताना नहीं देती, उल्टा विभाग के उच्च अधिकारियों एवं सरकार की ओर से आशाओं को तरह-तरह की धमकियां दी जा रही हैं। हालात तो यह है कि आज तक किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों पर कोई सुविधा आशाओं को मुहैया नहीं करवाई गई।
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कहा कि आशाओं के लिए बैठने की जगह तो दूर, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में विभाग का काम करने, बैठक आदि के लिए जगह तक मुहैया नहीं करवाई गई है और ना ही आशाओं को न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। इसके कारण आशा कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति भारी रोष है। इसलिए आशा वर्कर यूनियन हरियाणा ने सरकार की वादाखिलाफी एवं अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया था और इसी कड़ी में जिले की आशा वर्करों ने लघु सचिवालय पर धरना देकर हड़ताल में शामिल हुई। उन्होंने मांग की कि 2018 का समझौता लागू करवाया जाए। आशा वर्करों की हड़ताल में मुख्य रूप सुनीता, शीला, संतोष, बाला, सुमन, कमलेश, पूजा, रोशनी, मंजू, अंजू, राजकुमारी आदि शामिल हुईं।
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यह हैं आशा कार्यकर्ताओं की मांगें
आशा वर्करों को कर्मचारी का दर्जा मिले, सरकार की तरफ से जरूरत का सभी तरह का सामान उपलब्ध करवाया जाए, न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू हो, ऑनलाइन काम का मेहनताना दिया जाए, आशाओं का सभी तरह का शोषण बंद हो, स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों में आशा वर्करों के लिए बैठने का प्रबंध, अलमारी, कुर्सियों आदि का प्रबंध किया जाए।