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एक्यूआई घटकर 296 पहुंचा
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जींद। जिले में वायु प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को वायु प्रदूषण काफी ज्यादा था, जो शनिवार को कुछ कम तो हुआ लेकिन अभी तक खतरनाक स्तर पर है। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 360 दर्ज किया गया था, जबकि शनिवार को 296 रहा। प्रशासन लगातार शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रहा है। वायु प्रदूषण के इस बढ़े हुए स्तर के कारण अस्थमा रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिवाली के बाद जिले में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ा है। पिछले सप्ताह जिले में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया था लेकिन तीन दिन पहले हुई बूंदाबांदी के कारण यह कुछ कम हो गया था। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण खेतों में जलाई जाने वाली तथा लोगों द्वारा लगातार कूड़े में लगाई जाने वाली आग है। इसके अलावा ठंड के कारण आसमान में तैर रहे धूल के कण भारी होकर धरातल की तरफ आ जाते हैं, इससे भी वायु प्रदूषण हो रहा है। वायु प्रदूषण का यह स्तर पहले से बीमार लोगों के लिए काफी खतरनाक है। इसके अलावा अस्थमा रोगियों के लिए तो इस समय हवा में जहर घुला हुआ है।
डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि इस मौसम में बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। काफी लोग लापरवाही करते हैं, जो बीमार हो जाते हैं। पहले से बीमार व अस्थमा रोगियों को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सुबह व शाम की सैर को बंद कर देना चाहिए। लोगों को आग जलाने से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि आग से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। दिनभर लोगों को गर्म पानी पीना चाहिए। जिन लोगों को गले में खराश हो गई है, उनको गर्म पानी के गरारे करने चाहिएं। ठंडी खाद्य सामग्री का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
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दिवाली के बाद जिले में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ा है। पिछले सप्ताह जिले में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया था लेकिन तीन दिन पहले हुई बूंदाबांदी के कारण यह कुछ कम हो गया था। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण खेतों में जलाई जाने वाली तथा लोगों द्वारा लगातार कूड़े में लगाई जाने वाली आग है। इसके अलावा ठंड के कारण आसमान में तैर रहे धूल के कण भारी होकर धरातल की तरफ आ जाते हैं, इससे भी वायु प्रदूषण हो रहा है। वायु प्रदूषण का यह स्तर पहले से बीमार लोगों के लिए काफी खतरनाक है। इसके अलावा अस्थमा रोगियों के लिए तो इस समय हवा में जहर घुला हुआ है।
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डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि इस मौसम में बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। काफी लोग लापरवाही करते हैं, जो बीमार हो जाते हैं। पहले से बीमार व अस्थमा रोगियों को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सुबह व शाम की सैर को बंद कर देना चाहिए। लोगों को आग जलाने से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि आग से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। दिनभर लोगों को गर्म पानी पीना चाहिए। जिन लोगों को गले में खराश हो गई है, उनको गर्म पानी के गरारे करने चाहिएं। ठंडी खाद्य सामग्री का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
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