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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने काली चुन्नी ओढ़कर किया प्रदर्शन

Wed, 15 Dec 2021 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 15 Dec 2021 11:51 PM IST
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Anganwadi workers demonstrated wearing black sardines
गोहाना रोड पर मांगों के लिए प्रदर्शन करतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं। संवाद - फोटो : Jind
जींद। सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी हेल्पर्स एंड वर्कर्स यूनियन ने राज्यव्यापी हड़ताल के समर्थन में लघु सचिवालय के बाहर ग्रीन बेल्ट में बुधवार को भी धरना जारी रखा। इसकी अध्यक्षता जिला उपप्रधान रमेश ने की और संचालन जिला प्रधान भुल्ला देवी ने किया।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने धरने के बाद ग्रीन बेल्ट से लेकर बस स्टैंड मोड़ तक काली चुन्नी लेकर प्रदर्शन किया। जिला सह सचिव संदीप जाजवान ने कहा कि भाजपा सरकार महिला विरोधी है और महिला सशक्तीकरण का ढोंग करती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी महिलाएं हैं। वो सरकार का कार्य करती हैं और वेतन नाम मात्र ही मिलता है। यह महिलाओं का आर्थिक शोषण है। कोरोना महामारी में भी आंगनबाड़ी वर्कर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। ऑनलाइन काम के नाम पर भारी दबाव आंगनबाड़ी वर्कर्स पर डाला जा रहा है। सरकार समझौते अनुसार अब तक आंगनबाड़ी वर्कर्स का ईएसआई व पीएफ की सुविधा नहीं दे रही है। हरियाणा सरकार के न्यूनतम वेतन के आधार पर भी वेतन आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर को नहीं मिल रहा है। जिला प्रधान भुला देवी ने कहा कि आठ दिसंबर से राज्यव्यापी हड़ताल जारी है और जब तक मांगें पूरी नहीं की जाती, धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र व जन कल्याण की सेवाएं खत्म कर रही हैं। कुपोषण के मामले में देश के हालात खराब हैं। वर्कर्स व हेल्पर्स की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग कि कि सरकार आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर्स को पक्का करे। न्यूनतम वेतन वर्कर्स का 24 हजार रुपये और हेल्पर्स का 16 हजार रुपये मासिक लागू करे। डीए की बकाया किस्त लागू हों व एरियर मिले। केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1500 रुपये व 750 रुपये की बढ़ोतरी एरियर सहित लागू करे। वर्दी भत्ता कम से कम दो हजार रुपये हो। सेवानिवृत्ति लाभ वर्कर्स को पांच लाख रुपये व हेल्पर्स को तीन लाख रुपये मिले। दुर्घटना में मौत पर तीन लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए। दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु पर आश्रित को नौकरी पर रखा जाए। केंद्रों का तय किराया मिले। बिना मोबाइल व संसाधन दिए ऑनलाइन काम नहीं करवाया जाए।
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