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Jind News: पराली जलाने वालों की निगरानी करेगी कृषि विभाग की टीम
Wed, 11 Sep 2024 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 11 Sep 2024 12:22 AM IST
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जींद। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी राघवेंद्र राव ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान की पराली जलाने की रोकथाम के लिए समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने उपायुक्तों को जरूरी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामले में अति संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जाए, इसके अलावा कृषि विभाग, ग्राम सचिव तथा पटवारियों की ग्राम स्तर पर टीमें बनाई जाएं, जोकि किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने तथा पराली प्रबंधन के फायदे के बारे में जागरूक करेंगे। किसान धान फसल की कटाई एसएमएस लगी कंबाइनों से अनिवार्य करवाएं, ताकि पराली प्रबंधन आसानी से किया जा सके।
कॉन्फ्रेंसिंग के बाद डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी गांव में पराली जलाने की घटना न हो, इसके लिए कृषि अधिकारी गांव स्तर पर गठित नोडल अधिकारी से तालमेल स्थापित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। इसके अलावा नंबरदार ग्राम सचिवों से मिलकर गांवों में जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से पराली न जलाने के बारे में प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि किसान पराली का उपयोग पशुचारे के साथ अपनी आमदनी बढ़ाने में कर सकते हैं। पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने के साथ अन्य सामग्री बनाने में कर सकते हैं। कृषि अधिकारी गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर पराली जलाने के नुकसान बताएं।
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उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं। धान के फानों को जलाने की अपेक्षा उनका प्रबंधन करें। इस अवसर पर जिला राजस्व अधिकारी राजकुमार, डीडीए सुरेंद्र सिंह, एएई विजय कुंडू , एसडीओ अनिल कुमार और महीपाल मोर भी मौजूद रहे।
बॉक्स
जिला के रेड जोन में 13 गांव
जिले के जो 13 गांव रेड जोन में है उनमें अलेवा, श्रीरागखेड़ा, दनौदा कलां, धमतान साहिब, उझाना, रसीदां, उझाना, जयपुर, मुआना, अलीपुरा, बडनपुर, करसिंधु शामिल हैं। फसल कटाई के सीजन के दौरान प्रतिवर्ष फसल अवशेष जलाने से वातावरण दूषित होने की मात्रा बढ़ जाती है। पराली लगाने से वायु प्रदूषण से मानव जीवन व जीव-जंतुओं पर संकट मंडराने लगता है। पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। फसल अवशेष जलाने से पैदा हुए धुएं से अस्थमा व कैंसर जैसे रोगों को भी बढ़ावा मिलता है। पराली जलाने से भूमि में मौजूद कई उपयोगी बैक्टीरिया व कीट नष्ट हो जाते हैं।
फोटो कैप्शन
10जेएनडी 30-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा लेते डीसी मोहम्मद इमरान रजा और अन्य अधिकारी। स्रोत : प्रशासन
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उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामले में अति संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जाए, इसके अलावा कृषि विभाग, ग्राम सचिव तथा पटवारियों की ग्राम स्तर पर टीमें बनाई जाएं, जोकि किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने तथा पराली प्रबंधन के फायदे के बारे में जागरूक करेंगे। किसान धान फसल की कटाई एसएमएस लगी कंबाइनों से अनिवार्य करवाएं, ताकि पराली प्रबंधन आसानी से किया जा सके।
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कॉन्फ्रेंसिंग के बाद डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी गांव में पराली जलाने की घटना न हो, इसके लिए कृषि अधिकारी गांव स्तर पर गठित नोडल अधिकारी से तालमेल स्थापित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। इसके अलावा नंबरदार ग्राम सचिवों से मिलकर गांवों में जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से पराली न जलाने के बारे में प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि किसान पराली का उपयोग पशुचारे के साथ अपनी आमदनी बढ़ाने में कर सकते हैं। पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने के साथ अन्य सामग्री बनाने में कर सकते हैं। कृषि अधिकारी गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर पराली जलाने के नुकसान बताएं।
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उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं। धान के फानों को जलाने की अपेक्षा उनका प्रबंधन करें। इस अवसर पर जिला राजस्व अधिकारी राजकुमार, डीडीए सुरेंद्र सिंह, एएई विजय कुंडू , एसडीओ अनिल कुमार और महीपाल मोर भी मौजूद रहे।
बॉक्स
जिला के रेड जोन में 13 गांव
जिले के जो 13 गांव रेड जोन में है उनमें अलेवा, श्रीरागखेड़ा, दनौदा कलां, धमतान साहिब, उझाना, रसीदां, उझाना, जयपुर, मुआना, अलीपुरा, बडनपुर, करसिंधु शामिल हैं। फसल कटाई के सीजन के दौरान प्रतिवर्ष फसल अवशेष जलाने से वातावरण दूषित होने की मात्रा बढ़ जाती है। पराली लगाने से वायु प्रदूषण से मानव जीवन व जीव-जंतुओं पर संकट मंडराने लगता है। पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। फसल अवशेष जलाने से पैदा हुए धुएं से अस्थमा व कैंसर जैसे रोगों को भी बढ़ावा मिलता है। पराली जलाने से भूमि में मौजूद कई उपयोगी बैक्टीरिया व कीट नष्ट हो जाते हैं।
फोटो कैप्शन
10जेएनडी 30-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा लेते डीसी मोहम्मद इमरान रजा और अन्य अधिकारी। स्रोत : प्रशासन