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Jind News: किसानों से रूबरू हुए कृषि वैज्ञानिक
Fri, 13 Jun 2025 12:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 13 Jun 2025 12:56 AM IST
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जींद। कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा ने विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत डाहोला, चांदपुर और शामदों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इनके माध्यम से प्रभारी डॉ. रामकरण गौड़ ने यह जानने का प्रयास किया कि किसानों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कृषि प्रणालियों में बदलाव लाया जाए। किसानों के साथ चर्चा की जाए कि देश की कृषि को और अधिक आधुनिक कैसे बनाया जाए।
भारत भर में कृषि वैज्ञानिकों की करीब 2170 टीमें देशभर के 700 से अधिक जिलों, 65 हजार गांवों और करीब डेढ़ करोड़ किसानों से संवादित हुई हैं। जींद में कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा और अन्य एजेंसियों और कृषि विशेषज्ञों की तीन टीमों ने 135 गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं जान उनका निदान किया है।
उन्होंने बताया कि किसानों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता, बीमा, सब्सिडी के बारे में सरकारी योजना और नीतियों से अवगत कराना है। साथ ही उनके विशिष्ट कृषि-जलवायु क्षेत्रों में खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त प्रमुख फसलों के बारे में शिक्षित करना है और बेहतर कृषि पद्धतियों का सुझाव देना है।
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इसके अलावा उपयुक्त, लागत-प्रभावी प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, किसानों को उन्नत बीज किस्मों और एकीकृत पोषक तत्व, फसल-विशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों, कीट प्रबंधन के बारे में शिक्षित करना, पशुपालन, भेड़, बकरी, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन से संबंधित आधुनिक तकनीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना व किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के प्रभावी उपयोग के बारे में शिक्षित करना है।
वहीं किसान के अनुभव का दस्तावेजीकरण करना जिसके आधार पर सरकार भविष्य में कृषि अनुसंधान और नीति निर्माण के लिए करेगी। राष्ट्रीय डेयरी के वैज्ञानिक डाॅ. केएस सोनू ने दूध की मिलावट की पहचान पर अपने विचार रखे। इस मौके पर डॉ. सुरेश चंद राणा, डॉ. संजीव, डॉ. राकेश सेठ और डॉ. जोगेंद्र भी मौजूद रहे।
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इनके माध्यम से प्रभारी डॉ. रामकरण गौड़ ने यह जानने का प्रयास किया कि किसानों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कृषि प्रणालियों में बदलाव लाया जाए। किसानों के साथ चर्चा की जाए कि देश की कृषि को और अधिक आधुनिक कैसे बनाया जाए।
भारत भर में कृषि वैज्ञानिकों की करीब 2170 टीमें देशभर के 700 से अधिक जिलों, 65 हजार गांवों और करीब डेढ़ करोड़ किसानों से संवादित हुई हैं। जींद में कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा और अन्य एजेंसियों और कृषि विशेषज्ञों की तीन टीमों ने 135 गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं जान उनका निदान किया है।
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उन्होंने बताया कि किसानों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता, बीमा, सब्सिडी के बारे में सरकारी योजना और नीतियों से अवगत कराना है। साथ ही उनके विशिष्ट कृषि-जलवायु क्षेत्रों में खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त प्रमुख फसलों के बारे में शिक्षित करना है और बेहतर कृषि पद्धतियों का सुझाव देना है।
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इसके अलावा उपयुक्त, लागत-प्रभावी प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, किसानों को उन्नत बीज किस्मों और एकीकृत पोषक तत्व, फसल-विशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों, कीट प्रबंधन के बारे में शिक्षित करना, पशुपालन, भेड़, बकरी, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन से संबंधित आधुनिक तकनीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना व किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के प्रभावी उपयोग के बारे में शिक्षित करना है।
वहीं किसान के अनुभव का दस्तावेजीकरण करना जिसके आधार पर सरकार भविष्य में कृषि अनुसंधान और नीति निर्माण के लिए करेगी। राष्ट्रीय डेयरी के वैज्ञानिक डाॅ. केएस सोनू ने दूध की मिलावट की पहचान पर अपने विचार रखे। इस मौके पर डॉ. सुरेश चंद राणा, डॉ. संजीव, डॉ. राकेश सेठ और डॉ. जोगेंद्र भी मौजूद रहे।