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मैगी को लेकर हरकत में आया प्रशासन
ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2015 12:32 AM IST
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मानकों पर खरा नहीं उतरने पर जिला प्रशासन ने बुधवार को सरकार के आदेश पर कार्रवाई करते हुए बाजारों से मैगी के सैंपल लिए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कुछ सैंपल जांच को तो कुछ अपने पास रख लिए। प्रशासन की इस कार्रवाई से जहां बाजारों में विक्रेताओं में हड़कंप की स्थिति थी, वहीं लोगों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। इससे पहले टीम अन्ना ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपकर पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की मांग की।
बुधवार सुबह ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओमकुमार और अन्य स्टाफ के साथ रोहतक रोड स्थित मैगी की एजेंसी पर दबिश दी। मैगी के सभी उत्पादों की जांच के लिए नमूने एकत्रित किए गए।
यहां से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार सैंपल लिए। इनमें से एक सैंपल जांच के लिए मधुबन लैब भेज दिया गया, जबकि तीन सैंपल स्वास्थ्य विभाग ने अपने पास रखे हैं। विभाग की इस कार्रवाई से बाजारों में हड़कंप की स्थिति रही। लोग भारी संख्या में इस कार्रवाई को देखने के लिए बाजारों में एकत्रित हो गए। इससे पहले सुनील वशिष्ठ के नेतृत्व में टीम अन्ना के सदस्यों ने सिविल सर्जन को डॉ. पालेराम कटारिया को ज्ञापन सौंपकर पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की मांग की। इन लोगों का कहना था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के नाम पर लोगाें के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। पैकेट बंद खाद्य पदार्थ मानकों पर खरा उतरे इसको सुनिश्चित किया जाए।
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महीने में आठ हजार किलोग्राम की खपत
मैगी लोगों के खानपान का अहम हिस्सा बच चुकी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जींद शहर में प्रतिमाह करीब आठ हजार किलोग्राम मैगी की खपत होती है। इनमें से करीब 20 प्रतिशत मैगी ही गांवों में सप्लाई की जाती है। मैगी की तीन वैरायटी बाजार में हैं। इनमें से सिंपल मैगी की खपत करीब 80 प्रतिशत है। शेष 20 प्रतिशत में आटा मैगी और ऑट्स मैगी आती है। नरवाना में मैगी की अलग से एजेंसी है, यहां भी इतनी ही खपत मानी जा रही है। मैगी में कई तत्व तय मानकों से अधिक का मामला सामने आने के बाद इसकी सेल करीब 80 प्रतिशत तक कम हो गई है। जींद में एजेंसी संचालक नवीन कुमार के अनुसार दिन भर में एकआध ऑर्डर ही आता है।
अन्य उत्पादों की भी हो जांच
मैगी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अन्य पैकेट बंद उत्पाद भी गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं। ऐसे में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सभी उत्पादों की जांच होनी चाहिए। वहीं पैकेट और डिब्बा बंद उत्पादों की जांच समय-समय पर होती रहनी चाहिए। इससे लोगों को बेहतर गुणवत्ता का सामान मिल सकेगा। इसी प्रकार प्रशासन को चाहिए कि फलों और सब्जियों की जांच भी करते रहना चाहिए। - सुनील वशिष्ठ, टीम अन्ना
20 दिन में आएगी रिपोर्ट
प्रदेश सरकार के आदेशानुसार मैगी के सैंपल लिए गए हैं। इनको जांच के लिए मधुबन लैब भेजा जाएगा। करीब 20 दिन के बाद रिपोर्ट आएगी और यदि रिपोर्ट के अनुसार उत्पाद में कोई खामी पाई जाती है तो, प्रशासन कार्रवाई करेगा। - डॉ. पालेराम डिप्टी सिविल सर्जन
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बुधवार सुबह ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओमकुमार और अन्य स्टाफ के साथ रोहतक रोड स्थित मैगी की एजेंसी पर दबिश दी। मैगी के सभी उत्पादों की जांच के लिए नमूने एकत्रित किए गए।
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यहां से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार सैंपल लिए। इनमें से एक सैंपल जांच के लिए मधुबन लैब भेज दिया गया, जबकि तीन सैंपल स्वास्थ्य विभाग ने अपने पास रखे हैं। विभाग की इस कार्रवाई से बाजारों में हड़कंप की स्थिति रही। लोग भारी संख्या में इस कार्रवाई को देखने के लिए बाजारों में एकत्रित हो गए। इससे पहले सुनील वशिष्ठ के नेतृत्व में टीम अन्ना के सदस्यों ने सिविल सर्जन को डॉ. पालेराम कटारिया को ज्ञापन सौंपकर पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की मांग की। इन लोगों का कहना था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के नाम पर लोगाें के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। पैकेट बंद खाद्य पदार्थ मानकों पर खरा उतरे इसको सुनिश्चित किया जाए।
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महीने में आठ हजार किलोग्राम की खपत
मैगी लोगों के खानपान का अहम हिस्सा बच चुकी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जींद शहर में प्रतिमाह करीब आठ हजार किलोग्राम मैगी की खपत होती है। इनमें से करीब 20 प्रतिशत मैगी ही गांवों में सप्लाई की जाती है। मैगी की तीन वैरायटी बाजार में हैं। इनमें से सिंपल मैगी की खपत करीब 80 प्रतिशत है। शेष 20 प्रतिशत में आटा मैगी और ऑट्स मैगी आती है। नरवाना में मैगी की अलग से एजेंसी है, यहां भी इतनी ही खपत मानी जा रही है। मैगी में कई तत्व तय मानकों से अधिक का मामला सामने आने के बाद इसकी सेल करीब 80 प्रतिशत तक कम हो गई है। जींद में एजेंसी संचालक नवीन कुमार के अनुसार दिन भर में एकआध ऑर्डर ही आता है।
अन्य उत्पादों की भी हो जांच
मैगी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अन्य पैकेट बंद उत्पाद भी गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं। ऐसे में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सभी उत्पादों की जांच होनी चाहिए। वहीं पैकेट और डिब्बा बंद उत्पादों की जांच समय-समय पर होती रहनी चाहिए। इससे लोगों को बेहतर गुणवत्ता का सामान मिल सकेगा। इसी प्रकार प्रशासन को चाहिए कि फलों और सब्जियों की जांच भी करते रहना चाहिए। - सुनील वशिष्ठ, टीम अन्ना
20 दिन में आएगी रिपोर्ट
प्रदेश सरकार के आदेशानुसार मैगी के सैंपल लिए गए हैं। इनको जांच के लिए मधुबन लैब भेजा जाएगा। करीब 20 दिन के बाद रिपोर्ट आएगी और यदि रिपोर्ट के अनुसार उत्पाद में कोई खामी पाई जाती है तो, प्रशासन कार्रवाई करेगा। - डॉ. पालेराम डिप्टी सिविल सर्जन