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आयुष्मान योजना का गोल्ड कार्ड बनवाने में मदद करेंगे सक्षम युवा, जाएंगे घर-घर
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सक्षम युवाओं की ड्यूटी लगाते मैनेजर विवेक कुमार।
- फोटो : Jind
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत धीमी गति से बन रहे गोल्डन कार्ड की संख्या को बढ़ाने तथा लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 100 सक्षम युवाओं की टीम को मैदान में उतार दिया है। यह सक्षम युवा लोगों के घर-घर जाकर उनको जागरूक करेंगे तथा कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से अपने गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करेंगे। जिले में तीन लाख 92 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनने हैं, लेकिन अभी तक एक लाख 15 हजार लोगों के ही कार्ड बने हैं। सक्षम युवाओं के मैदान में उतरने से गोल्डन कार्ड बनने की संख्या में काफी इजाफा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
जींद जिले की जनसंख्या लगभग 13 लाख है। इनमें से आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग के पास जो लिस्ट पहुंची है, उसके अनुसार तीन लाख 92 हजार लोग पात्र हैं। लगभग डेढ़ साल पहले शुरू हुई इस योजना में अब तक महज एक लाख 15 हजार लोगों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। इनकी संख्या बहुत कम मानी जा रही है। यदि गोल्डन कार्ड बनाने की रफ्तार तेज होती तो अब तक पूरे जिले के सभी पात्र लोगों को कार्ड बन जाते। आयुष्मान भारत योजना के जिला अधिकारियों के अनुसार काफी लोगों को यह पता ही नहीं है कि यह गोल्डन कार्ड कैसे बनेंगे। इसके क्या लाभ हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर शिविर लगाकर लोगों को इसकी जानकारी भी दी गई। पहले गोल्डन कार्ड केवल नागरिक अस्पतालों में ही बनते थ, लेकिन अब यह कॉमन सर्विस सेंटरों पर भी बनाए जाने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सक्षम योजना के तहत अब 100 युवाओं की टीम को रोजगार विभाग से लिया है। प्रत्येक युवा को प्रतिदिन दस परिवारों को जागरूक करने का लक्ष्य दिया गया है। यदि लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाने में कोई समस्या है तो सक्षम युवा उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर तक भी लेकर जा सकते हैं। सक्षम युवाओं की टीम वीरवार से काम करना शुरू कर देगी।
गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया पकड़ेगी रफ्तार
जिले में तीन लाख 92 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक एक लाख 15 हजार लोगों के ही कार्ड बने हैं। अब रोजगार विभाग से 100 सक्षम युवाओं को लिया गया है। सक्षम युवाओं को पात्र लोगों की लिस्ट भी दी गई है। वीरवार से यह लोग काम करना शुरू कर देंगे। इससे गोल्डन कार्ड बनने की प्रक्रिया रफ्तार पड़ेगी।
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डॉ. अजय चालिया, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।
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जींद जिले की जनसंख्या लगभग 13 लाख है। इनमें से आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग के पास जो लिस्ट पहुंची है, उसके अनुसार तीन लाख 92 हजार लोग पात्र हैं। लगभग डेढ़ साल पहले शुरू हुई इस योजना में अब तक महज एक लाख 15 हजार लोगों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। इनकी संख्या बहुत कम मानी जा रही है। यदि गोल्डन कार्ड बनाने की रफ्तार तेज होती तो अब तक पूरे जिले के सभी पात्र लोगों को कार्ड बन जाते। आयुष्मान भारत योजना के जिला अधिकारियों के अनुसार काफी लोगों को यह पता ही नहीं है कि यह गोल्डन कार्ड कैसे बनेंगे। इसके क्या लाभ हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर शिविर लगाकर लोगों को इसकी जानकारी भी दी गई। पहले गोल्डन कार्ड केवल नागरिक अस्पतालों में ही बनते थ, लेकिन अब यह कॉमन सर्विस सेंटरों पर भी बनाए जाने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सक्षम योजना के तहत अब 100 युवाओं की टीम को रोजगार विभाग से लिया है। प्रत्येक युवा को प्रतिदिन दस परिवारों को जागरूक करने का लक्ष्य दिया गया है। यदि लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाने में कोई समस्या है तो सक्षम युवा उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर तक भी लेकर जा सकते हैं। सक्षम युवाओं की टीम वीरवार से काम करना शुरू कर देगी।
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गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया पकड़ेगी रफ्तार
जिले में तीन लाख 92 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक एक लाख 15 हजार लोगों के ही कार्ड बने हैं। अब रोजगार विभाग से 100 सक्षम युवाओं को लिया गया है। सक्षम युवाओं को पात्र लोगों की लिस्ट भी दी गई है। वीरवार से यह लोग काम करना शुरू कर देंगे। इससे गोल्डन कार्ड बनने की प्रक्रिया रफ्तार पड़ेगी।
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डॉ. अजय चालिया, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।