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अब खेतों में नहीं ड्रेन में जाएगा शहर का गंदा पानी
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:21 AM IST
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ड्रेन तक डाली जाएगी नई 24 इंची लाइन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर की वर्षों पुरानी सबसे बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी नहीं होने और सीवर बैक मारने की समस्या का समाधान होने की उम्मीद जगी है। जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर वासियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्लान तैयार किया है। इसके लिए प्लान को मंजूरी मिल चुकी है, अब बस टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम शुरू होने का इंतजार है। प्लान के तहत अब शहर के गंदे पानी को खेतों में डालने की बजाए सीधे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से कालवा किनाना ड्रेन में पहुंचाया जाएगा। इसके लिए करीब 12 किलोमीटर दूरी में 24 इंची लाइन डाली जाएगी। साथ हांसी रोड पर बने 15 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही 7 एमएलडी क्षमता का एक और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा।
शहर में गंदे पानी की समुचित व्यवस्था न होने से हर रोज कहीं ना कही सीवर जाम रहते हैं, और नाला ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर बहता है। लेकिन विभाग कर्मचारियों के पास समस्या का कोई समाधान नहीं है। अब इस समस्या का स्थायी समाधान होने की आस जगी है। विभाग ने एक करोड़ दस लाख से हांसी रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से कालवा-किनाना ड्रेन तक बड़ी लाइन डालने की तैयारी कर ली है, ताकि सारा गंदा पानी ड्रेन में पहुंचाया जा सके। वर्क अलॉट हो चुका है, अगले 10 महीने में लाइन बिछाने का काम पूरा हो जाएगा। शहर का अधिकतर क्षेत्र हांसी रोड वाले एसटीपी से ही जुड़ा है, जिसकी क्षमता 15 एमएलडी की है। जबकि शहर से इससे कहीं ज्यादा गंदा पानी निकलता है। ऐसे में इस एसटीपी के साथ ही एक अन्य एसटीपी बनाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रोजेक्ट के टेंडर हो चुके है और अलॉटमेंट का ही इंतजार है। इसके निर्माण पर करीब आठ करोड़ चार लाख रुपये खर्च होंगे और इसके सालभर में पूरा होने की उम्मीद है।
खेतों में छोड़ा जाता है पानी
शहर में फिलहाल गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसे विभाग एसटीपी के आसपास के खेतों में छोड़ता है। लेकिन किसान जरूरत होने पर पानी लेते हैं। और जरूरत न होने पर खेतों में पानी छोड़ने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में खेतों में पानी बंद होने पर एसटीएम में ही पानी ओवरफ्लो होकर परिसर में भर जाता है। कर्मचारी एसटीएम के पास ही खाली जगह में भी पानी छोड़ते हैं।
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बैक मारते हैं सीवरेज
सीवर बैक मारने की समस्या का एक मुख्य कारण एसटीपी पर सप्लाई का बंद किया जाना है। खेतों में किसानों, जमीदारों द्वारा पानी डालने से इंकार करने के बाद विभाग कर्मचारियों के पास कोई ऑप्शन नहीं बचता, ऐसे में अधिकारी सप्लाई आने का वॉल्व बंद कर देते है, और शहर की सीवर लाइन बंद हो जाती है । नाले ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर भरने लगता है। घरों में सीवर बैक मारने लगते है। हालात ये है कि शहर की अनेक कॉलोनियों में अभी गंदा पानी भरा हुआ है और वहां के लोग परेशान होकर अधिकारियों से गुहार लगा रहे है।
शहर में गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होना बड़ी समस्या है। फिलहाल गंदा पानी खेतों में छोड़ा जाता है, मगर किसान जरूरत न होने पर पानी लेने से इंकार कर देते है। अब गंदे पानी की निकासी के लिए एसटीपी से कालवा किनाना ड्रेन तक लाइन बिछाई जाएगी और गंदा पानी ड्रेन में छोड़ा जाएगा।
हरभजन सिंह, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
शहर की वर्षों पुरानी सबसे बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी नहीं होने और सीवर बैक मारने की समस्या का समाधान होने की उम्मीद जगी है। जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर वासियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्लान तैयार किया है। इसके लिए प्लान को मंजूरी मिल चुकी है, अब बस टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम शुरू होने का इंतजार है। प्लान के तहत अब शहर के गंदे पानी को खेतों में डालने की बजाए सीधे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से कालवा किनाना ड्रेन में पहुंचाया जाएगा। इसके लिए करीब 12 किलोमीटर दूरी में 24 इंची लाइन डाली जाएगी। साथ हांसी रोड पर बने 15 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही 7 एमएलडी क्षमता का एक और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा।
शहर में गंदे पानी की समुचित व्यवस्था न होने से हर रोज कहीं ना कही सीवर जाम रहते हैं, और नाला ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर बहता है। लेकिन विभाग कर्मचारियों के पास समस्या का कोई समाधान नहीं है। अब इस समस्या का स्थायी समाधान होने की आस जगी है। विभाग ने एक करोड़ दस लाख से हांसी रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से कालवा-किनाना ड्रेन तक बड़ी लाइन डालने की तैयारी कर ली है, ताकि सारा गंदा पानी ड्रेन में पहुंचाया जा सके। वर्क अलॉट हो चुका है, अगले 10 महीने में लाइन बिछाने का काम पूरा हो जाएगा। शहर का अधिकतर क्षेत्र हांसी रोड वाले एसटीपी से ही जुड़ा है, जिसकी क्षमता 15 एमएलडी की है। जबकि शहर से इससे कहीं ज्यादा गंदा पानी निकलता है। ऐसे में इस एसटीपी के साथ ही एक अन्य एसटीपी बनाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रोजेक्ट के टेंडर हो चुके है और अलॉटमेंट का ही इंतजार है। इसके निर्माण पर करीब आठ करोड़ चार लाख रुपये खर्च होंगे और इसके सालभर में पूरा होने की उम्मीद है।
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खेतों में छोड़ा जाता है पानी
शहर में फिलहाल गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसे विभाग एसटीपी के आसपास के खेतों में छोड़ता है। लेकिन किसान जरूरत होने पर पानी लेते हैं। और जरूरत न होने पर खेतों में पानी छोड़ने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में खेतों में पानी बंद होने पर एसटीएम में ही पानी ओवरफ्लो होकर परिसर में भर जाता है। कर्मचारी एसटीएम के पास ही खाली जगह में भी पानी छोड़ते हैं।
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बैक मारते हैं सीवरेज
सीवर बैक मारने की समस्या का एक मुख्य कारण एसटीपी पर सप्लाई का बंद किया जाना है। खेतों में किसानों, जमीदारों द्वारा पानी डालने से इंकार करने के बाद विभाग कर्मचारियों के पास कोई ऑप्शन नहीं बचता, ऐसे में अधिकारी सप्लाई आने का वॉल्व बंद कर देते है, और शहर की सीवर लाइन बंद हो जाती है । नाले ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर भरने लगता है। घरों में सीवर बैक मारने लगते है। हालात ये है कि शहर की अनेक कॉलोनियों में अभी गंदा पानी भरा हुआ है और वहां के लोग परेशान होकर अधिकारियों से गुहार लगा रहे है।
शहर में गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होना बड़ी समस्या है। फिलहाल गंदा पानी खेतों में छोड़ा जाता है, मगर किसान जरूरत न होने पर पानी लेने से इंकार कर देते है। अब गंदे पानी की निकासी के लिए एसटीपी से कालवा किनाना ड्रेन तक लाइन बिछाई जाएगी और गंदा पानी ड्रेन में छोड़ा जाएगा।
हरभजन सिंह, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग