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तापमान में अधिक अंतर बढ़ा रहा चिल ब्लेन और फ्रॉस्ट का खतरा
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तापमान कम होने से चिल ब्लेन और फ्रॉस्ट बाइट का खतरा बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिले में रात और दिन के तापमान में 14 डिग्री का अंतर चिल ब्लेन और फ्रास्ट बाइट का खतरा बढ़ा रहा है। हालांकि यह बीमारी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक होती है, लेकिन यदि तापमान में अधिक अंतर हो तो मैदानी क्षेत्रों में भी यह बीमारी फैल सकती है। इस बीमारी के कारण चर्म रोग होते हैं। जींद के लोगों के लिए यह ज्यादा दिक्कत भरी बीमारी होगी, क्योंकि नागरिक अस्पताल में चर्म रोग से संबंधित कोई चिकित्सक मौजूद नहीं है। रात में बिना छत सोना इस बीमारी को आमंत्रण दे सकता है, इसलिए ठंड से बचकर रहने में ही भलाई है।
चिल ब्लेन और फ्रॉस्ट बाइट बीमारी 0 डिग्री से चार डिग्री तापमान के बीच होती है। इस समय जींद का न्यूनतम तापमान पांच डिग्री है और अधिकतम 19 डिग्री। तापमान में अधिक अंतर के कारण भी यह बीमारी होती है। इसमें हाथ, पैर की अंगुली, नाक, कान व एड़ी लाल हो जाती हैं। इनमें सूजन के साथ दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही जब तापमान शून्य और शून्य से नीचे आता है तो फ्रॉस्ट बाइट हो जाता है। इसमें त्वचा रूखी होकर फटने लगती और खून निकलने लगता है। इस बीमारी से बचने के लिए त्वचा को रूखा होने से बचाए रखना जरूरी है। । इन बीमारियों का सबसे बड़ा कारण तापमान में 10 डिग्री से अधिक का अंतर होना है। इसमें दिन में तापमान अधिक व रात के समय कम हो जाता है। इस कारण लोग पूरी सावधानी नहीं बरतते और उन्हें इस प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। यदि शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक का परामर्श लेना चाहिए।
नागरिक अस्पताल में नहीं चर्म रोग विशेषज्ञ
यह बीमारी त्वचा संबंधी होती है। जींद के लोगों को यदि यह बीमारी हो जाए तो नागरिक अस्पताल में चर्म रोग विशेष नहीं होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि वह इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। फिर भी लोगों को अपने स्तर पर एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है।
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हर प्रकार का इलाज नागरिक अस्पताल में उपलब्ध
हालांकि नागरिक अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है लेकिन फिर भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सक्षम है। हालांकि यह बीमारी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक होती है, फिर भी लोगों को ठंड से बचाव रखना चाहिए। तापमान में अधिक अंतर होना भी स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। बुजुर्गों व बच्चों को ठंड से बचाने के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिले में रात और दिन के तापमान में 14 डिग्री का अंतर चिल ब्लेन और फ्रास्ट बाइट का खतरा बढ़ा रहा है। हालांकि यह बीमारी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक होती है, लेकिन यदि तापमान में अधिक अंतर हो तो मैदानी क्षेत्रों में भी यह बीमारी फैल सकती है। इस बीमारी के कारण चर्म रोग होते हैं। जींद के लोगों के लिए यह ज्यादा दिक्कत भरी बीमारी होगी, क्योंकि नागरिक अस्पताल में चर्म रोग से संबंधित कोई चिकित्सक मौजूद नहीं है। रात में बिना छत सोना इस बीमारी को आमंत्रण दे सकता है, इसलिए ठंड से बचकर रहने में ही भलाई है।
चिल ब्लेन और फ्रॉस्ट बाइट बीमारी 0 डिग्री से चार डिग्री तापमान के बीच होती है। इस समय जींद का न्यूनतम तापमान पांच डिग्री है और अधिकतम 19 डिग्री। तापमान में अधिक अंतर के कारण भी यह बीमारी होती है। इसमें हाथ, पैर की अंगुली, नाक, कान व एड़ी लाल हो जाती हैं। इनमें सूजन के साथ दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही जब तापमान शून्य और शून्य से नीचे आता है तो फ्रॉस्ट बाइट हो जाता है। इसमें त्वचा रूखी होकर फटने लगती और खून निकलने लगता है। इस बीमारी से बचने के लिए त्वचा को रूखा होने से बचाए रखना जरूरी है। । इन बीमारियों का सबसे बड़ा कारण तापमान में 10 डिग्री से अधिक का अंतर होना है। इसमें दिन में तापमान अधिक व रात के समय कम हो जाता है। इस कारण लोग पूरी सावधानी नहीं बरतते और उन्हें इस प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। यदि शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक का परामर्श लेना चाहिए।
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नागरिक अस्पताल में नहीं चर्म रोग विशेषज्ञ
यह बीमारी त्वचा संबंधी होती है। जींद के लोगों को यदि यह बीमारी हो जाए तो नागरिक अस्पताल में चर्म रोग विशेष नहीं होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि वह इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। फिर भी लोगों को अपने स्तर पर एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है।
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हर प्रकार का इलाज नागरिक अस्पताल में उपलब्ध
हालांकि नागरिक अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है लेकिन फिर भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सक्षम है। हालांकि यह बीमारी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक होती है, फिर भी लोगों को ठंड से बचाव रखना चाहिए। तापमान में अधिक अंतर होना भी स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। बुजुर्गों व बच्चों को ठंड से बचाने के लिए विशेष प्रबंध होने चाहिए।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।