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सरकार का सरसों खरीद का फार्मूला बना किसानों के गले की फांस

Wed, 03 Apr 2019 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2019 12:16 AM IST
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सरकार का सरसों खरीद का फार्मूला बना किसानों के गले की फांस
सरसों खरीद का फार्मूला किसानों के गले की फांस बना
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। किसानों को प्रदेश सरकार का सरसों खरीदने का फार्मूला रास नहीं आ रहा। इसके कारण 4200 रुपये प्रति क्विंटल की सरसों को आनलाइन होने के बावजूद भी 3500 रुपये में बेचने को मजबूर हैं। सरकार के इस फार्मूले से किसान को सरसों बेचना बेहद महंगा तो पड़ ही रहा है साथ ही महीनों तक इंतजार भी करना पड़ता है। इसमें किसान से प्रति एकड़ 15 मण सरसों व एक बार में ज्यादा से ज्यादा 25 क्विंटल तक की खरीद का नियम है।
इन नियमों के अनुसार किसानों को महीना भर तो फसल बेचने का इंतजार रहता है और दूसरी तरफ जब किसानों का नंबर आता है तो उनकी पूरी फसल नहीं बिक पाती। इससे परेशान होकर किसान अपनी सरसों को पंजीकरण होने के बावजूद भी प्राइवेट दुकानों पर बेचना पसंद कर रहे हैं। इसका दूसरा कारण यह भी है कि 15 अप्रैल तक गेहूं कटाई का कार्य चरम पर होता है। इस दौरान लगभग 10-15 दिन किसानों को गेहूं की फसल से समय नहीं मिलता और इस दौरान मंडी में सरसों लाने के लिए किसान को नंबर वाले दिन किराए पर व्हीकल मिलना भी मुश्किल होता है। यह योजना किसानों के हक की नहीं होकर थोपी गई योजना बनी हुई है। इससे किसानों को कोई लाभ न होकर केवल नुकसान है।
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एक बार में नहीं बिकती पूरी सरसों, बची हुई को कहां लेकर जाएं
एक बार में किसानों की पूरी सरसों नहीं बिकती बची हुई सरसों को किसके पास लेकर जाएं। उन्होंने साढ़े चार एकड़ का रजिस्ट्रेशन करवाया है। 29 अप्रैल को उनकी सरसों की खरीद होगी। महीने भर घर में सरसों को कैसे रखें और जल्द ही गेहूं कटाई का कार्य शुरू होने वाला है। इस व्यस्त सीजन में न तो किसान को पता लगेगा और न समय पर मंडी में लाने के लिए साधन उपलब्ध होगा। यह किसानों को लूटने के लिए सरकार की योजना है। फसल की खरीद आढ़तियों के माध्यम से गेहूं की तर्ज पर होनी चाहिए।
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-किसान हंसराज बीबीपुर
पंजीकरण के बाद एक साथ नहीं खरीदी जा रही पूरी सरसों
पंजीकरण करवाने के बाद भी पूरी सरसों मंडी में नहीं खरीदी जा रही। प्रति एकड़ साढ़े छह क्विंटल निर्धारित किया गया है, जबकि प्रति एकड़ लगभग 10 क्विंटल सरसों निकलती है। उनकी दो एकड़ में लगभग दस से 12 क्विंटल सरसों है। वह पंजीकरण के तहत बेचने के लिए एक महीना इंतजार भी करें और फिर भी पूरी सरसों नहीं खरीदी जाएगी। सरकार को जिले भर में दो मंडी निर्धारित कर किसानों को परेशान करने का काम किया है। सरसों की खरीद जिले की सभी 33 मंडियों में की जानी चाहिए थी।

-किसान जगबीर बीबीपुर
खरीद सरकार के नियमानुसार की जा रही है। हैफेड को आदेश हैं कि प्रति एकड़ साढ़े क्विंटल सरसों की खरीद की जानी है। यदि सरकार अधिक सरसों की खरीद के आदेश देगी तो खरीद ली जाएगी।
रोशन गोयल, मैनेजर हैफेड
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