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लक्ष्य ने निभाया पापा को मेडल लाने का वादा, %सिल्वर लक्ष्य’ पर लगाया निशाना
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:00 AM IST
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लक्ष्य ने निभाया पापा से मेडल लाने का किया वादा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एशियाई खेलों में लक्ष्य श्योराण ने देश को शूटिंग में मेंस ट्रैप इवेंट में 50 में 43 शॉट लगाकर देश को सिल्वर मेडल दिया है। लक्ष्य 12 अगस्त को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गया था और उस समय ही उसने अपने भारत कुमार पिता सोमबीर पहलवान को मेडल लाने का वादा किया था। सोमवार दोपहर को लक्ष्य ने चांदी पर निशाना लगाकर अपना वादा पूरा किया है। महज चार साल के शूटिंग कैरियर में लक्ष्य ने यह सफलता की कई इबारत लिखी हैं। लक्ष्य के पिता शहर के जाने माने व्यवसायी हैं और दोपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं। लक्ष्य की ताई जींद नगर परिषद की चेयरमैन रह चुकी हैं। जींद नगर परिषद के उप प्रधान सुभाष जांगड़ा, पूर्व प्रधान विनोद आसरी ने लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान को बधाई दी।
1991 में भारत कुमार बने लक्ष्य के पिता
लक्ष्य के घर में शुरू से ही खेलों के प्रति अच्छा माहौल है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान 1991 में भारत कुमार रहे हैं। सोमबीर पहलवान के अनुसार वे बेटे के शूटिंग में जाने के पक्ष में नहीं थे। यह बहुत महंगा खेल है। लक्ष्य ने 2014 में एयर पिस्टल में कैरियर शुरू किया था, लेकिन बाद में उसने शॉट राइफल ट्रैंप को अपना लिया। आज उन्हें बेटे के फैसले पर खुशी है। लक्ष्य की छोटी बहन दसवीं कक्षा की छात्रा है।
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विदेश में रहना पड़ता है भूखे पेट
सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य शुद्ध रूप शाकाहारी है। विदेश में खेलते वक्त उसे खाने की काफी दिक्कत आती है और वह भूखे रहकर खेलता है। घर आने पर लक्ष्य दूध और लस्सी ज्यादा पसंद करता है। सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य को घर का दूध व घी खिलाने के लिए आठ गाएं रखी हैं।
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लक्ष्य को किया जाएगा सम्मानित
शूटिंग शुरू करने से पहले लक्ष्य इंडस स्कूल का छात्र रहा है। वह 11वीं कक्षा तक स्कूल में पढ़ा है, ऐसे में वह इंडस परिवार का सदस्य है और लक्ष्य ने देश को पदक दिलाकर जींद का नाम रोशन किया है। इंडस संस्थाओं के निदेशक सुभाष श्योराण के अनुसार जींद लौटने पर लक्ष्य को सम्मानि किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एशियाई खेलों में लक्ष्य श्योराण ने देश को शूटिंग में मेंस ट्रैप इवेंट में 50 में 43 शॉट लगाकर देश को सिल्वर मेडल दिया है। लक्ष्य 12 अगस्त को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गया था और उस समय ही उसने अपने भारत कुमार पिता सोमबीर पहलवान को मेडल लाने का वादा किया था। सोमवार दोपहर को लक्ष्य ने चांदी पर निशाना लगाकर अपना वादा पूरा किया है। महज चार साल के शूटिंग कैरियर में लक्ष्य ने यह सफलता की कई इबारत लिखी हैं। लक्ष्य के पिता शहर के जाने माने व्यवसायी हैं और दोपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं। लक्ष्य की ताई जींद नगर परिषद की चेयरमैन रह चुकी हैं। जींद नगर परिषद के उप प्रधान सुभाष जांगड़ा, पूर्व प्रधान विनोद आसरी ने लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान को बधाई दी।
1991 में भारत कुमार बने लक्ष्य के पिता
लक्ष्य के घर में शुरू से ही खेलों के प्रति अच्छा माहौल है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान 1991 में भारत कुमार रहे हैं। सोमबीर पहलवान के अनुसार वे बेटे के शूटिंग में जाने के पक्ष में नहीं थे। यह बहुत महंगा खेल है। लक्ष्य ने 2014 में एयर पिस्टल में कैरियर शुरू किया था, लेकिन बाद में उसने शॉट राइफल ट्रैंप को अपना लिया। आज उन्हें बेटे के फैसले पर खुशी है। लक्ष्य की छोटी बहन दसवीं कक्षा की छात्रा है।
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विदेश में रहना पड़ता है भूखे पेट
सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य शुद्ध रूप शाकाहारी है। विदेश में खेलते वक्त उसे खाने की काफी दिक्कत आती है और वह भूखे रहकर खेलता है। घर आने पर लक्ष्य दूध और लस्सी ज्यादा पसंद करता है। सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य को घर का दूध व घी खिलाने के लिए आठ गाएं रखी हैं।
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लक्ष्य को किया जाएगा सम्मानित
शूटिंग शुरू करने से पहले लक्ष्य इंडस स्कूल का छात्र रहा है। वह 11वीं कक्षा तक स्कूल में पढ़ा है, ऐसे में वह इंडस परिवार का सदस्य है और लक्ष्य ने देश को पदक दिलाकर जींद का नाम रोशन किया है। इंडस संस्थाओं के निदेशक सुभाष श्योराण के अनुसार जींद लौटने पर लक्ष्य को सम्मानि किया जाएगा।