{"_id":"595be2474f1c1b3a518b45af","slug":"51499193927-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध कब्जे पर पीएम आवास योजना के लिए भरे आवेदन रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध कब्जे पर पीएम आवास योजना के लिए भरे आवेदन रद्द
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
पुराने किले की जमीन पर अवैध रूप से कब्ज कर रह रहे लोगों को अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी लाभ नहीं मिलेगा। नगर परिषद ने ऐसे 274 लोगों के आवेदन रद्द करते हुए इनको नोटिस भेजकर मकान खाली करवाने की तैयारी भी कर ली है।
किसी जमाने में जींद रियासत की ताकत का प्रतीक रहा पुराना किला एक बार फिर चर्चाओं में है। कारण है किले की जमीन पर अवैध कब्ज कर रह रहे लोगों का यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करना। ऐसे मामले संज्ञान में आने की बाद जींद नगर परिषद ने योजना के तहत आए ऐसे आवेदनों को खारिज कर दिया। वहीं किले की जमीन पर कब्ज करने वाले सभी 274 लोगों को नोटिस देने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल सरकारी रिकार्ड के अनुसार पुराने किले की कुल जमीन 61 कनाल है, जबकि फिलहाल महज 28 कनाल जमीन ही खाली है। शेष जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यहां खाली जमीन पर प्रशासन पार्क विकसित कर रहा है।
प्रशासन से टकरा चुका है शाही परिवार
दूसरी ओर किले की जमीन को लेकर शाही परिवार प्रशासन से टकरा चुका है। शाही परिवार का कहना है कि यह संपत्ति जींद रियासत की है। प्रशासन अब इस की सुरक्षा करने में नाकाम है, ऐसे में यह जमीन शाही परिवार को लौटा देनी चाहिए।
विज्ञापन
यूं सामने आया मामला
किले का यह क्षेत्र वार्ड 13 का हिस्सा है। यहां नगर परिषद अधिकारियों के सामने मामला आया कि किले की जमीन पर अवैध कब्जा कर बैठे लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया है। इसके तहत आवेदन करने पर सरकार को प्लॉट दिखाना होता है। इस पर मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता मिलती है। ऐसे में इन लोगों ने आवेदन तो किए, लेकिन इनकी रजिस्टरी मालिकों के नाम नहीं होने के कारण इन्हें अस्वीकार कर दिया गया।
योजना से वंचित क्यों किया जा रहा
वहीं जिन लोगों को प्रशासन अवैध कब्जाधारी बता रहा है, वे खुद को इस जमीन का मालिक बता रहे हैं। यहां काबिज लोगों का कहना है कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री नहीं है, लेकिन नगर परिषद उनके यहां हर साल प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेज रहा है। बिजली के कनेक्शन हैं। ऐसे में यहां रह रहे लोगों ने नगर परिषद के आवेदन स्वीकृत नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनके पास नगर परिषद प्रॉपर्टी टैक्स भेज रही है, तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित क्यों किया जा रहा है।
दूसरी जगह जमीन दे प्रशासन
यह किले की जमीन सरकार की है। जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने के कारण इन लोगों के आवेदन रद्द हुए हैं। यहां लोग काफी सालों से रह रहे हैं। ऐसे में इन परिवारों को प्रशासन को दूसरी जगह जमीन देनी चाहिए। -विनोद आशरी, पार्षद वार्ड 13
नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होने वाले आवेदन के साथ प्लॉट की रजिस्ट्री लगनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर आवेदन स्वीकार नहीं किए गए। किले की सरकारी जमीन पर ये मकान बने हैं, जिन्हें जिला प्रशासन की तरफ से जमीन खाली करने के निर्देश दिए हैं। -पूनम सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद, जींद।
अवैध कब्जे पर पीएम आवास योजना के लिए भरे आवेदन रद्द
नगरपरिषद ने की कार्रवाई, कब्जा हटवाने के लिए 274 लोगों को दिए जाएंगे नोटिस
जींद।
पुराने किले की जमीन पर अवैध रूप से कब्ज कर रह रहे लोगों को अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी लाभ नहीं मिलेगा। नगर परिषद ने ऐसे 274 लोगों के आवेदन रद्द करते हुए इनको नोटिस भेजकर मकान खाली करवाने की तैयारी भी कर ली है।
किसी जमाने में जींद रियासत की ताकत का प्रतीक रहा पुराना किला एक बार फिर चर्चाओं में है। कारण है किले की जमीन पर अवैध कब्ज कर रह रहे लोगों का यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करना। ऐसे मामले संज्ञान में आने की बाद जींद नगर परिषद ने योजना के तहत आए ऐसे आवेदनों को खारिज कर दिया। वहीं किले की जमीन पर कब्ज करने वाले सभी 274 लोगों को नोटिस देने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल सरकारी रिकार्ड के अनुसार पुराने किले की कुल जमीन 61 कनाल है, जबकि फिलहाल महज 28 कनाल जमीन ही खाली है। शेष जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यहां खाली जमीन पर प्रशासन पार्क विकसित कर रहा है।
विज्ञापन
प्रशासन से टकरा चुका है शाही परिवार
दूसरी ओर किले की जमीन को लेकर शाही परिवार प्रशासन से टकरा चुका है। शाही परिवार का कहना है कि यह संपत्ति जींद रियासत की है। प्रशासन अब इस की सुरक्षा करने में नाकाम है, ऐसे में यह जमीन शाही परिवार को लौटा देनी चाहिए।
विज्ञापन
यूं सामने आया मामला
किले का यह क्षेत्र वार्ड 13 का हिस्सा है। यहां नगर परिषद अधिकारियों के सामने मामला आया कि किले की जमीन पर अवैध कब्जा कर बैठे लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया है। इसके तहत आवेदन करने पर सरकार को प्लॉट दिखाना होता है। इस पर मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता मिलती है। ऐसे में इन लोगों ने आवेदन तो किए, लेकिन इनकी रजिस्टरी मालिकों के नाम नहीं होने के कारण इन्हें अस्वीकार कर दिया गया।
योजना से वंचित क्यों किया जा रहा
वहीं जिन लोगों को प्रशासन अवैध कब्जाधारी बता रहा है, वे खुद को इस जमीन का मालिक बता रहे हैं। यहां काबिज लोगों का कहना है कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री नहीं है, लेकिन नगर परिषद उनके यहां हर साल प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेज रहा है। बिजली के कनेक्शन हैं। ऐसे में यहां रह रहे लोगों ने नगर परिषद के आवेदन स्वीकृत नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनके पास नगर परिषद प्रॉपर्टी टैक्स भेज रही है, तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित क्यों किया जा रहा है।
दूसरी जगह जमीन दे प्रशासन
यह किले की जमीन सरकार की है। जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने के कारण इन लोगों के आवेदन रद्द हुए हैं। यहां लोग काफी सालों से रह रहे हैं। ऐसे में इन परिवारों को प्रशासन को दूसरी जगह जमीन देनी चाहिए। -विनोद आशरी, पार्षद वार्ड 13
नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होने वाले आवेदन के साथ प्लॉट की रजिस्ट्री लगनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर आवेदन स्वीकार नहीं किए गए। किले की सरकारी जमीन पर ये मकान बने हैं, जिन्हें जिला प्रशासन की तरफ से जमीन खाली करने के निर्देश दिए हैं। -पूनम सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद, जींद।
अवैध कब्जे पर पीएम आवास योजना के लिए भरे आवेदन रद्द
नगरपरिषद ने की कार्रवाई, कब्जा हटवाने के लिए 274 लोगों को दिए जाएंगे नोटिस