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खान-पान में बढ़ते कीटनाशकों के प्रभाव से शरीर का नर्वस सिस्टम हो रहा है प्रभावित
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फसलों में कीटनाशक के प्रयोग का प्रभाव पड़ रहा नर्वस सिस्टम पर
अमर उजाल ब्यूरो
जींद। ललितखेड़ा गांव में जहर मुक्त खेती विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। हरियाणा किसान आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. आरएस दलाल ने कहा कि फसलों में अंधाधुंध प्रयोग हो रहे कीटनाशकों के कारण हमारा खाद्य पदार्थ भी जहरीला हो रहा है। यही कारण है कि मनुष्य प्रतिदिन गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहा है। अगर बीमारियों से बचना है तो फसलों को आर्गेनिक तरीके से उगाना होगा। इस तरह की खेती करके किसान कम खर्च में अधिक फसल पैदा कर सकते हैं।
डॉ. आरएस दलाल ने कहा कि फसलों में अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण जमीन का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो रही है। कीटनाशकों के प्रयोग को बंद करने के लिए किसानों को कीट ज्ञान हासिल कर खुद जागरूक होना होगा। रोहतक मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक डॉ. रणबीर दहिया ने कहा कि कीटनाशक के भूजल में मिलने से बीमारियां बढ़ रही हैं। कीटनाशक पानी के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचकर जमा हो रहा है। उन्होंने कहा कि हाई ब्रिड बीज भी खतरनाक हैं। इसलिए किसानों को बीज भी अपने स्वयं के तैयार करने होंगे। इस दौरान किसान सभा के प्रदेश महासचिव फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का रोजगार खेती से जुड़ा हुआ है।
क्या है कीट साक्षरता
दरअसल कृषि विभाग के एडीओ स्व. डॉ. सुरेंद्र दलाल ने किसानों को बिना कीटनाशक का प्रयोग किए कीट प्रबंधन के आधार पर ही खेती करने की तकनीक दी। इससे हरियाणा के साथ-साथ अब पंजाब के सभी जिलों में किसान लाभांवित हुए हैं। इसके तहत सिर्फ कीटों का निरीक्षण करना होता है। अब इस क्षेत्र में हुए शोधों से पता चला है कि फसल में कीटों की संख्या उस स्तर तक नहीं होती, जिससे वे फसल को बर्बाद कर सकें।
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अमर उजाल ब्यूरो
जींद। ललितखेड़ा गांव में जहर मुक्त खेती विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। हरियाणा किसान आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. आरएस दलाल ने कहा कि फसलों में अंधाधुंध प्रयोग हो रहे कीटनाशकों के कारण हमारा खाद्य पदार्थ भी जहरीला हो रहा है। यही कारण है कि मनुष्य प्रतिदिन गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहा है। अगर बीमारियों से बचना है तो फसलों को आर्गेनिक तरीके से उगाना होगा। इस तरह की खेती करके किसान कम खर्च में अधिक फसल पैदा कर सकते हैं।
डॉ. आरएस दलाल ने कहा कि फसलों में अत्यधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण जमीन का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो रही है। कीटनाशकों के प्रयोग को बंद करने के लिए किसानों को कीट ज्ञान हासिल कर खुद जागरूक होना होगा। रोहतक मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक डॉ. रणबीर दहिया ने कहा कि कीटनाशक के भूजल में मिलने से बीमारियां बढ़ रही हैं। कीटनाशक पानी के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचकर जमा हो रहा है। उन्होंने कहा कि हाई ब्रिड बीज भी खतरनाक हैं। इसलिए किसानों को बीज भी अपने स्वयं के तैयार करने होंगे। इस दौरान किसान सभा के प्रदेश महासचिव फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का रोजगार खेती से जुड़ा हुआ है।
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क्या है कीट साक्षरता
दरअसल कृषि विभाग के एडीओ स्व. डॉ. सुरेंद्र दलाल ने किसानों को बिना कीटनाशक का प्रयोग किए कीट प्रबंधन के आधार पर ही खेती करने की तकनीक दी। इससे हरियाणा के साथ-साथ अब पंजाब के सभी जिलों में किसान लाभांवित हुए हैं। इसके तहत सिर्फ कीटों का निरीक्षण करना होता है। अब इस क्षेत्र में हुए शोधों से पता चला है कि फसल में कीटों की संख्या उस स्तर तक नहीं होती, जिससे वे फसल को बर्बाद कर सकें।
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