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नए समीकरणों में चुनाव जीतने के लिए हर पार्टी को बनानी होगी नई रणनीति

Tue, 01 Jan 2019 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jan 2019 12:33 AM IST
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नए समीकरणों में चुनाव जीतने के लिए हर पार्टी को बनानी होगी नई रणनीति
जींद विधानसभा उपचुनाव : बदले समीकरण के बीच पार्टियां बनाएंगी रणनीति
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। चार महीने के बाद जींद विधानसभा उपचुनाव करवाने की घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी। जींद चुनावी दंगल का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार बदले हुए समीकरणों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए हर राजनीतिक दल को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। इसके लिए सभी दलों ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। 28 जनवरी को होने वाले उपचुनाव में जींद विस के एक लाख 70 हजार 608 मतदाता अपने मुखिया का चुनाव करेंगे। उपचुनाव के लिए 158 बूथ बनाए जाएंगे। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की मिलीजुली इस सीट को लेकर रोचक उपचुनाव होगा।
हरियाणा के गठन के बाद अब तक जींद विधानसभा में 12 बार चुनाव हो चुके हैं। छह बार कांग्रेस और चार बार लोकदल पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे हैं। इनमें से दो बार इनेलो के उम्मीदवार 2005 व 2009 में विजयी रहे। एक बार 1996 में बृजमोहन सिंगला हविपा और 1977 में मांगेराम गुप्ता आजाद उम्मीदवार के रूप में इस सीट से चुनाव लड़ कर विधानसभा पहुंचे, लेकिन इस बार चुनाव की क्या स्थिति होगी यह तो नजदीक आती हुई चुनाव तिथि के साथ ही पता चलेगा। इस बार नए समीकरणों के बीच चुनावी बिसात बिछी है। पिछले दो चुनाव में इनेलो के गढ़ के रूप में उभरी जींद विधानसभा में अब इनेलो दो फाड़ होने के बाद पहली बार चुनाव लड़ेगी। इनेलो और दुष्यंत चौटाला की जजपा चुनाव को प्रभावित करेगी।
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अब तक यह रहे जींद के विधायक
हरियाणा में पहला चुनाव 1967 में हुआ। इसमें कांग्रेस के दयाकृष्ण ने 26089 मत लेकर आजाद उम्मीदवार इंद्र सिंह को हराया था। इंद्र सिंह को 15548 मत मिले थे। 1968 में हुए चुनाव में कांग्रेस के दयाकृष्ण ने फिर से आजाद उम्मीदवार शंकर दास को हराया था। इस चुनाव में दयाकृष्ण ने 17733 और शंकर दास ने 16136 मत प्राप्त किए। 1972 के चुनाव में कांग्रेस (एस) के उम्मीदवार चौधरी दल सिंह ने 28281 मत प्राप्त कर कांग्रेस के दयाकृष्ण को हरा दिया। दयाकृष्ण को इस चुनाव में 21999 मत मिले। 1977 के चुनाव में चौधरी देवीलाल की लहर के बावजूद आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता 15751 वोट लेकर विधायक बने। उन्होंने जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को हराया था। प्रताप सिंह को इस चुनाव में 9646 वोट मिले थे। 1982 के चुनाव में फिर से समीकरण बदला और लोकदल के टिकट पर बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हराया। इस चुनाव में बृजमोहन सिंगल को 27045 और मांगेराम गुप्ता को 26899 वोट मिले। 1987 में हुए चुनाव में परमानंद ने लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता को हराया था। परमानंद को 39323 और मांगेराम गुप्ता को 31221 वोट मिले थे। 1991 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने 35346 वोट लेकर जनता पार्टी के उम्मीदवार टेकराम को हराया था। टेकराम को 19213 वोट मिले थे। 1996 में हविपा के टिकट पर फिर से बृजमोहन सिंगला विधायक बने और उन्होंने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। बृजमोहन सिंगला को 40803 व मांगेराम गुप्ता को 22245 वोट मिले। 2000 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को हरा दिया। मांगेराम गुप्ता को 41621 व गुलशन लाल को 36978 वोट मिले थे। 2005 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को हराकर विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में गुप्ता को 43883 व बरवाला को 26448 वोट मिले। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने 34057 व कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 26195 मत मिले। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को हरा दिया। डॉ. मिढ़ा को इस चुनाव में 31631 व बरवाला को 29374 वोट मिले।
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ऐसे बदले समीकरण
जींद विधानसभा उपचुनाव में समीकरण बदलने के पीछे दो मुख्य घटनाएं महत्वपूर्ण हैं। इनमें एक है विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा का निधन व दूसरी इनेलो में फूट। डॉ. मिढ़ा के निधन के बाद उनके बेटे डॉ. कृष्ण मिढ़ा भाजपा में चले गए हैं और यहां टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं। पिछले दस साल से यहां इनेलो का गढ़ होने के चलते अब इनेलो की फूट का असर भी चुनाव पड़ेगा। अब दुष्यंत चौटाला की जजपा और इनेलो के उम्मीदवार वोटों के बंटवारे में कितना हिस्सा लेते हैं, इसका असर चुनाव पर पड़ेगा।
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