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उर्दू अकादमी द्वारा किया गया एक शाम अटल के नाम मुशायरा, देश भर के प्रसिद्ध शायरों ने गजलों से सजाई महफील
Updated Sun, 07 Oct 2018 12:31 AM IST
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सितम जो मेरे दिल पे ढहा गए, वो फिर से आज महफिल में आ गए
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकूला द्वारा राजकीय महिला कालेज में एक शाम अटल के नाम जश्न-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध शायरों ने भाग लिया। मुशायरे में शायरों ने गजल व शायरी सुनाईं। कार्यक्रम में मौजूद श्रोता एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनकर मंत्र मुग्ध हो गए। भिवानी से पहुंचे शायर विजेंद्र गाफिल ने अपनी गजल जब मैंने किया जंग का ऐलान अलग से, तब से है मेरी पहचान अलग से को बड़े अंदाज में सुनाया तो श्रोताओं की खूब तालियां गूंजीं। कार्यक्रम में राशिद अली राशिद, अशोक पंकज, समर याब समर, दानिश गजल व फलक सुलतानपुरी ने अपने-अपने अंदाज से शायरी सुनाईं। इस दौरान अशोक पंजक ने सितम जो मेरे दिल पे ढहा गए, वो फिर से आज महफिल में आ गए। विजेंद्र गाफिल ने बादल का मैं छोटा सा टुकड़ा हूं तो क्या हुआ, इन चांद सितारों को निकलने नहीं देता, मैं वक्त की शतरंज का प्यादा, राज को जो शह दूं तो संभलने नहीं देता। जैसी गजल से लोगों का खूब मनोरंजन किया।
मुख्यमंत्री नहीं आए तो कवियों ने भी किया किनारा
जींद। पहले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा सहित कई विशिष्ट अतिथियों को शामिल होना था, लेकिन मुख्यमंत्री की जींद रैली रद्द होने के कारण नहीं आए। ऐसे में उर्दू अकादमी द्वारा जिन शायरों मुन्नवर राणा व पापुलर मेरठी जैसे लोगों का प्रचार किया जा रहा था, वे भी नहीं आए। इससे कार्यक्रम काफी फीका रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकूला द्वारा राजकीय महिला कालेज में एक शाम अटल के नाम जश्न-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध शायरों ने भाग लिया। मुशायरे में शायरों ने गजल व शायरी सुनाईं। कार्यक्रम में मौजूद श्रोता एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनकर मंत्र मुग्ध हो गए। भिवानी से पहुंचे शायर विजेंद्र गाफिल ने अपनी गजल जब मैंने किया जंग का ऐलान अलग से, तब से है मेरी पहचान अलग से को बड़े अंदाज में सुनाया तो श्रोताओं की खूब तालियां गूंजीं। कार्यक्रम में राशिद अली राशिद, अशोक पंकज, समर याब समर, दानिश गजल व फलक सुलतानपुरी ने अपने-अपने अंदाज से शायरी सुनाईं। इस दौरान अशोक पंजक ने सितम जो मेरे दिल पे ढहा गए, वो फिर से आज महफिल में आ गए। विजेंद्र गाफिल ने बादल का मैं छोटा सा टुकड़ा हूं तो क्या हुआ, इन चांद सितारों को निकलने नहीं देता, मैं वक्त की शतरंज का प्यादा, राज को जो शह दूं तो संभलने नहीं देता। जैसी गजल से लोगों का खूब मनोरंजन किया।
मुख्यमंत्री नहीं आए तो कवियों ने भी किया किनारा
जींद। पहले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा सहित कई विशिष्ट अतिथियों को शामिल होना था, लेकिन मुख्यमंत्री की जींद रैली रद्द होने के कारण नहीं आए। ऐसे में उर्दू अकादमी द्वारा जिन शायरों मुन्नवर राणा व पापुलर मेरठी जैसे लोगों का प्रचार किया जा रहा था, वे भी नहीं आए। इससे कार्यक्रम काफी फीका रहा।
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