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एशियन गेम्स में विरोधियों को पटखनी देने को तैयार डाहौला निवासी हरदीप
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:20 AM IST
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पवन डाहौला
अलेवा। भारतीय कुश्ती संघ ने एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम में जीरकपुर स्थित गुरदयाल कुश्ती अखाड़ा में कई वर्षों से प्रेक्टिस कर रहे जींद के डाहौला निवासी व भारतीय रेलवे में तैनात पहलवान हरदीप सिंह का भी चयन हुआ है।
एशियन गेम्स 18 अगस्त से दो सितंबर तक जकार्ता और पालेमबांग में आयोजित की जाएंगी। इसको लेकर यह खिलाड़ी देश को मेडल दिलाने के लिए काफी पसीना बहा रहा है। देशवासियों को उम्मीद है कि यह खिलाड़ी कामनवेल्थ गेम्स की तरह एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करेगा।
हरदीप सिंह ने बताया कि हार-जीत अपनी जगह होती है लेकिन हर शख्स को खुद की क्षमता का पता होता है। खिलाड़ी को भी पता होता है कि उसने अखाड़े में कितना पसीना बहाया है। उसकी कैसी फिटनेस है और वह कैसा परिणाम दे सकता है। इसलिए उसे अपनी मेहनत और प्रेक्टिस पर पूरा विश्वास है कि एशियन गेम्स में यकीनन गोल्ड मेडल आएगा। 98 किलोग्राम भार वर्ग के पहलवान हरदीप सिंह के कोच रमेश मलिक ने कहा कि हरदीप की फिटनेस काफी बेहतर है। आज वह भारत को गोल्ड दिलाने के लिए काफी पसीना बहा रहा है। इसी की बदौलत उसका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है। उसके लिए बड़ी खुशी की बात है और उन्हें आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि वह देश के लिए गोल्ड लेकर ही लौटेगा।
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कोच से प्रेरणा लेकर इस मुकाम तक पहुंचा हरदीप
हरदीप का जन्म 20 दिसंबर 1990 को गांव डाहौला में हुआ। उन्होंने पहली से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद हरदीप ने जींद के ही निडानी गांव के स्कूल में दाखिला लिया और बारहवीं तक की पढ़ाई के साथ-साथ खेल जगत में अपनी जगह बनाई और कोच रमेश मलिक से प्रेरणा लेकर आज इस मुकाम तक पहुंचा।
कुश्ती में 2007 से की शुरुआत
हरदीप ने कुश्ती में ग्रीको रोमन स्टाइल के भारवर्ग 98 किलोग्राम में 2007 से शुरुआत की। वह रेलवे में बतौर अधिकारी नौकरी करता है। हरदीप की अन्य उपलब्धियों में वर्ष 2013, 2016 तथा 2017 कामनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, वर्ष 2016 में एशियन गेम्स में सिल्वर और नेशनल गेम्स में साल 2013 से अब तक सात गोल्ड प्राप्त कर चुका है।
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अलेवा। भारतीय कुश्ती संघ ने एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम में जीरकपुर स्थित गुरदयाल कुश्ती अखाड़ा में कई वर्षों से प्रेक्टिस कर रहे जींद के डाहौला निवासी व भारतीय रेलवे में तैनात पहलवान हरदीप सिंह का भी चयन हुआ है।
एशियन गेम्स 18 अगस्त से दो सितंबर तक जकार्ता और पालेमबांग में आयोजित की जाएंगी। इसको लेकर यह खिलाड़ी देश को मेडल दिलाने के लिए काफी पसीना बहा रहा है। देशवासियों को उम्मीद है कि यह खिलाड़ी कामनवेल्थ गेम्स की तरह एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करेगा।
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हरदीप सिंह ने बताया कि हार-जीत अपनी जगह होती है लेकिन हर शख्स को खुद की क्षमता का पता होता है। खिलाड़ी को भी पता होता है कि उसने अखाड़े में कितना पसीना बहाया है। उसकी कैसी फिटनेस है और वह कैसा परिणाम दे सकता है। इसलिए उसे अपनी मेहनत और प्रेक्टिस पर पूरा विश्वास है कि एशियन गेम्स में यकीनन गोल्ड मेडल आएगा। 98 किलोग्राम भार वर्ग के पहलवान हरदीप सिंह के कोच रमेश मलिक ने कहा कि हरदीप की फिटनेस काफी बेहतर है। आज वह भारत को गोल्ड दिलाने के लिए काफी पसीना बहा रहा है। इसी की बदौलत उसका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है। उसके लिए बड़ी खुशी की बात है और उन्हें आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि वह देश के लिए गोल्ड लेकर ही लौटेगा।
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कोच से प्रेरणा लेकर इस मुकाम तक पहुंचा हरदीप
हरदीप का जन्म 20 दिसंबर 1990 को गांव डाहौला में हुआ। उन्होंने पहली से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद हरदीप ने जींद के ही निडानी गांव के स्कूल में दाखिला लिया और बारहवीं तक की पढ़ाई के साथ-साथ खेल जगत में अपनी जगह बनाई और कोच रमेश मलिक से प्रेरणा लेकर आज इस मुकाम तक पहुंचा।
कुश्ती में 2007 से की शुरुआत
हरदीप ने कुश्ती में ग्रीको रोमन स्टाइल के भारवर्ग 98 किलोग्राम में 2007 से शुरुआत की। वह रेलवे में बतौर अधिकारी नौकरी करता है। हरदीप की अन्य उपलब्धियों में वर्ष 2013, 2016 तथा 2017 कामनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, वर्ष 2016 में एशियन गेम्स में सिल्वर और नेशनल गेम्स में साल 2013 से अब तक सात गोल्ड प्राप्त कर चुका है।