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नागरिक अस्पताल नरवाना का कारनामा
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:53 AM IST
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डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा पेट में ही मर चुका, निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना (जींद)। धर्मसिंह कॉलोनी निवासी एक महिला को डिलीवरी के लिए नरवाना के नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने कहा कि बच्चा पेट में मर चुका है। इस कारण उन्होंने उसे जींद रेफर कर दिया। यही हाल जींद के चिकित्सकों ने किया। उन्होंने उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने महिला को जींद के ही एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया दिया। जहां पर महिला की सकुशल डिलीवरी हुई और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ मिले। डिस्चार्ज के बाद परिजन जच्चा-बच्चा को लेकर घर पहुंचे और पूरे की शिकायत नागरिक अस्पताल के एसएमओ को दी। एमएसओ ने जांच की बात कही है।
संदीप कुमार ने बताया कि वह 21 अगस्त को अपनी पत्नी संज्योति को डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल में लेकर आया था। पूरे दिन यहां रखने के बाद शाम को डॉक्टर ने कहा कि उसके बच्चे को बचाना मुश्किल है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा पेट में मर चुका है। इसके बाद डॉक्टरों ने संज्योति को जींद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। जींद के डॉक्टरों ने महिला को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन उसकी हालत को देखते हुए परिवार वालों ने उसे जींद के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां संज्योति ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है नागरिक अस्पताल के डॉक्टर ने उन्हें गुमराह कर गलत जानकारी दी। इससे संज्योति को शारीरिक हानि हो सकती थी। रोष व्यक्त करते हुए संदीप, सुनीता, केलो, कलावती, बाला, संतोष ने कहा कि यहां डॉक्टरों की पहले से ही कमी है, लेकिन जो डॉक्टर हैं, वो भी गरीब परिवार के मरीजों को देखना पसंद नहीं करते। संदीप ने कहा कि डॉक्टर ने उसकी पत्नी को देखा था, लेकिन अपनी ड्यूटी उन्होंने पीड़िता को रेफर करके पूरी कर दी। परिजनों ने कहा कि इसकी शिकायत एसएमओ को भी दी, लेकिन उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने यह शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पास भेजी है।
जच्चा-बच्चा सुरक्षित
संदीप ने बताया कि उसकी पत्नी को महिला डॉक्टर ने जींद रेफर कर दिया और ओपीडी पर्ची पर लिखा कि बच्चे की धड़कन कम है और न ही सिर बना हुआ है। जिस पर परिवार घबरा गया। संदीप ने कहा कि जींद अस्पताल में भी सिर्फ ओपीडी पर्ची को देखकर रोहतक रेफर कर दिया, लेकिन निजी अस्पताल में जाते ही उसकी पत्नी ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
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डॉक्टर से की जाएगी बात
एसएमओ देवेंद्र बिंदलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत को सुनकर कहा कि इस मामले को लेकर वे ड्यूटी पर तैनात डाक्टर से दो दिन बाद बात करेंगे। उन्होंने रिपोर्ट में क्या लिखा वे खुद ही बता सकती हैं। उन्होंने लोगों को दो दिन बाद दोबारा शिकायत लेकर आने के लिए कहा। जिससे संदीप का परिवार असंतुष्ट रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना (जींद)। धर्मसिंह कॉलोनी निवासी एक महिला को डिलीवरी के लिए नरवाना के नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने कहा कि बच्चा पेट में मर चुका है। इस कारण उन्होंने उसे जींद रेफर कर दिया। यही हाल जींद के चिकित्सकों ने किया। उन्होंने उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने महिला को जींद के ही एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया दिया। जहां पर महिला की सकुशल डिलीवरी हुई और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ मिले। डिस्चार्ज के बाद परिजन जच्चा-बच्चा को लेकर घर पहुंचे और पूरे की शिकायत नागरिक अस्पताल के एसएमओ को दी। एमएसओ ने जांच की बात कही है।
संदीप कुमार ने बताया कि वह 21 अगस्त को अपनी पत्नी संज्योति को डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल में लेकर आया था। पूरे दिन यहां रखने के बाद शाम को डॉक्टर ने कहा कि उसके बच्चे को बचाना मुश्किल है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा पेट में मर चुका है। इसके बाद डॉक्टरों ने संज्योति को जींद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। जींद के डॉक्टरों ने महिला को रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन उसकी हालत को देखते हुए परिवार वालों ने उसे जींद के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां संज्योति ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है नागरिक अस्पताल के डॉक्टर ने उन्हें गुमराह कर गलत जानकारी दी। इससे संज्योति को शारीरिक हानि हो सकती थी। रोष व्यक्त करते हुए संदीप, सुनीता, केलो, कलावती, बाला, संतोष ने कहा कि यहां डॉक्टरों की पहले से ही कमी है, लेकिन जो डॉक्टर हैं, वो भी गरीब परिवार के मरीजों को देखना पसंद नहीं करते। संदीप ने कहा कि डॉक्टर ने उसकी पत्नी को देखा था, लेकिन अपनी ड्यूटी उन्होंने पीड़िता को रेफर करके पूरी कर दी। परिजनों ने कहा कि इसकी शिकायत एसएमओ को भी दी, लेकिन उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने यह शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पास भेजी है।
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जच्चा-बच्चा सुरक्षित
संदीप ने बताया कि उसकी पत्नी को महिला डॉक्टर ने जींद रेफर कर दिया और ओपीडी पर्ची पर लिखा कि बच्चे की धड़कन कम है और न ही सिर बना हुआ है। जिस पर परिवार घबरा गया। संदीप ने कहा कि जींद अस्पताल में भी सिर्फ ओपीडी पर्ची को देखकर रोहतक रेफर कर दिया, लेकिन निजी अस्पताल में जाते ही उसकी पत्नी ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
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डॉक्टर से की जाएगी बात
एसएमओ देवेंद्र बिंदलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत को सुनकर कहा कि इस मामले को लेकर वे ड्यूटी पर तैनात डाक्टर से दो दिन बाद बात करेंगे। उन्होंने रिपोर्ट में क्या लिखा वे खुद ही बता सकती हैं। उन्होंने लोगों को दो दिन बाद दोबारा शिकायत लेकर आने के लिए कहा। जिससे संदीप का परिवार असंतुष्ट रहा।