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खेड़ा खेमावती में तालाब की खुदाई कर रही महिला मजदूरों पर गिरा मिट्टी का तोंदा
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तालाब की खुदाई कर रही महिलाओं पर गिरा मिट्टी का तोंदा, दो की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों (जींद)। तालाब की खुदाई कर रही महिलाओं पर मिट्टी का तोंदा गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। घटना गांव खेड़ा खेमावती में रविवार सुबह करीब दस बजे की है। मिट्टी का तोंदा गिरने से मरने वाली दोनों महिलाएं पूरी तरह से मिट्टी में दब गई थीं, जबकि आठ अन्य महिलाओं के हाथ-पांव दबे थे। 30 मिनट के प्रयास में मिट्टी में दबी दोनों महिलाओं को बाहर निकाला गया, मगर तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मरने वाली महिला खेड़ा खेमावती की 28 वर्षीय निशा और 65 वर्षीय चमेली देवी हैं। घायलों में सुनील, रामकली, संतोष, रामरती, राजरानी, राजवंती, संतोष व नन्नी शामिल हैं। इनमें से सुनील, रामकली और संतोष की हालत गंभीर होने के कारण पीजीआई रोहतक रेफर क दिया गया है। इनके पैर में चोट बताया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया, विधायक जसबीर देशवाल, एएसपी अजीत सिंह शेखावत, डीएसपी सुनील कुमार, एसडीएम मनदीप सिंह प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे। उपायुक्त ने मामले की जांच एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिसकी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरने वाली महिलाओं के परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के मेट पवन लाल की लापरवाही से हादसा हुआ है। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उनके परिजनों को सौंप दिया है।
खेड़ा खेमावती गांव के स्कूल में मिट्टी डालने का काम चल रहा है। इसके लिए गांव के तालाब से मिट्टी को निकली जा रही है। गांव के सरपंच सुशील कुमार और मेट पवन लाल यह काम मनरेगा मजदूरों से करवा रहे थे। इसके लिए 30 मजदूरों को मिट्टी की खुदाई के काम में लगाया गया था। रविवार सुबह दस बजे के आसपास खुदाई कर रही महिलाओं पर मिट्टी का तोंदा गिर गया। इसमें दो महिलाएं पूरी तरह से और आठ के हाथ-पांव मिट्टी के नीचे दब गए। बाहर दिखाई दे रही महिलाओं को तुरंत निकाल लिया गया, मगर मिट्टी में पूरी तरह से दबी महिलाओं को निकालने में आधे घंटे का समय लग गया। जब तक महिलाओं को निकाला गया दोनों की मौत हो चुकी थी। दोनों महिलाएं लगभग 15 फुट नीचे मिट्टी में दबी हुई थी। गांव के सरपंच सुशील कुमार ने कहा कि इस कार्य के लिए करीब ढाई लाख रुपये का मस्टरोल बनाया गया था। तालाब की खुदाई स्कूल में मिट्टी डालने के लिए करवाई जा रही थी। मेट पवन का कहना है कि हादसे के दौरान वह स्कूल में मौजूद था, क्योंकि उसे दोनोें साइट देखी पड़ रही थी। हादसे के दौरान 30 महिलाएं काम कर रही थीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों (जींद)। तालाब की खुदाई कर रही महिलाओं पर मिट्टी का तोंदा गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। घटना गांव खेड़ा खेमावती में रविवार सुबह करीब दस बजे की है। मिट्टी का तोंदा गिरने से मरने वाली दोनों महिलाएं पूरी तरह से मिट्टी में दब गई थीं, जबकि आठ अन्य महिलाओं के हाथ-पांव दबे थे। 30 मिनट के प्रयास में मिट्टी में दबी दोनों महिलाओं को बाहर निकाला गया, मगर तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मरने वाली महिला खेड़ा खेमावती की 28 वर्षीय निशा और 65 वर्षीय चमेली देवी हैं। घायलों में सुनील, रामकली, संतोष, रामरती, राजरानी, राजवंती, संतोष व नन्नी शामिल हैं। इनमें से सुनील, रामकली और संतोष की हालत गंभीर होने के कारण पीजीआई रोहतक रेफर क दिया गया है। इनके पैर में चोट बताया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया, विधायक जसबीर देशवाल, एएसपी अजीत सिंह शेखावत, डीएसपी सुनील कुमार, एसडीएम मनदीप सिंह प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे। उपायुक्त ने मामले की जांच एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिसकी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरने वाली महिलाओं के परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के मेट पवन लाल की लापरवाही से हादसा हुआ है। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उनके परिजनों को सौंप दिया है।
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खेड़ा खेमावती गांव के स्कूल में मिट्टी डालने का काम चल रहा है। इसके लिए गांव के तालाब से मिट्टी को निकली जा रही है। गांव के सरपंच सुशील कुमार और मेट पवन लाल यह काम मनरेगा मजदूरों से करवा रहे थे। इसके लिए 30 मजदूरों को मिट्टी की खुदाई के काम में लगाया गया था। रविवार सुबह दस बजे के आसपास खुदाई कर रही महिलाओं पर मिट्टी का तोंदा गिर गया। इसमें दो महिलाएं पूरी तरह से और आठ के हाथ-पांव मिट्टी के नीचे दब गए। बाहर दिखाई दे रही महिलाओं को तुरंत निकाल लिया गया, मगर मिट्टी में पूरी तरह से दबी महिलाओं को निकालने में आधे घंटे का समय लग गया। जब तक महिलाओं को निकाला गया दोनों की मौत हो चुकी थी। दोनों महिलाएं लगभग 15 फुट नीचे मिट्टी में दबी हुई थी। गांव के सरपंच सुशील कुमार ने कहा कि इस कार्य के लिए करीब ढाई लाख रुपये का मस्टरोल बनाया गया था। तालाब की खुदाई स्कूल में मिट्टी डालने के लिए करवाई जा रही थी। मेट पवन का कहना है कि हादसे के दौरान वह स्कूल में मौजूद था, क्योंकि उसे दोनोें साइट देखी पड़ रही थी। हादसे के दौरान 30 महिलाएं काम कर रही थीं।
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