{"_id":"5c0eb8cbbdec22416f2327bb","slug":"191544468683-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुढा खेड़ा लाठर गांव में 1300 मकानों में से 100 में नहीं है शौचालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुढा खेड़ा लाठर गांव में 1300 मकानों में से 100 में नहीं है शौचालय
Updated Tue, 11 Dec 2018 12:34 AM IST
विज्ञापन
बुढ़ा खेड़ा लाठर गांव में 1300 मकानों में से 100 में नहीं है शौचालय
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। क्षेत्र के गांव बुढ़ा खेड़ा लाठर में 1300 मकानों में शौचालय दिखाकर शौच मुक्त तो कागजों में साबित कर दिया, लेकिन आज भी 100 मकानों में शौचालय नही हैं। ग्रामीणों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लगभग 50 लोगों की शिकायत है कि उन्होंने शौचालय तो बना दिए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। ग्रामीणों ने ब्याज पर रुपये उठा कर शौचालय तो बना लिए, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। चार साल बाद आज तक वो इसका ब्याज भी भुगत रहे हैं।
बुढ़ा खेड़ा गांव की आबादी लगभग सात हजार है और गांव में कुल 1300 मकान बने हुए हैं। प्रशासन ने गांव को ओडीएफ भी घोषित किया हुआ है, लेकिन जमीनी हकीकत में देखा जाए तो गांव में अब भी 100 मकान ऐसे हैं जिनमें शौचालय नही है। ग्रामीण इस हालत में भी नही हैं कि वो शौचालय बना सकें। प्रशासन की सर्वे और कागजों में लोग उलझ कर रह गए हैं। प्रशासन के रवैये के कारण ग्रामीणों में रोष पनप रहा है।
नहीं बना शौचालय
आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण शौचालय नहीं बनाया जा सका। कई बार फार्म भी भर दिए, लेकिन कोई भी सहायता प्रशासन और सरकार की ओर से नहीं मिली है। आज भी इंतजार है कि प्रशासन कोई मदद के लिए आगे आए तो घर में ही शौचालय बनाया जा सके।
विज्ञापन
रेशमा, ग्रामीण महिला।
ब्याज पर लेकर बनाया शौचालय
चार साल पहले ब्याज पर रुपये लेकर शौचालय बनाया था, लेकिन आज भी ब्याज भुगत रहे हैं। प्रशासन बनी हुए शौचालय को पास नहीं कर रहा है। बनाने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जैसे ही आप शौचालय बना लोगे तभी आपके खाते में पैसे डाल दिए जाएंगे, लेकिन अब प्रशासन के अधिकारी पास नही कर रहे हैं।
राजदुलारी।
शौचालय के अभाव में बाहर शौच के लिए जाना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ अगर कोई अनहोनी हो गई तो कौन जिम्मेवार होगा। इस बात का भी डर लगा रहता है। ग्रामीणों की समस्या की ओर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
शांति ग्रामीण।
प्रशासन को भी करवाया जा चुका है अवगत
जैसे ही प्रशासन द्वारा काई भी स्कीम आती है तो मुनादी करवाकर ग्रामीणों तक पहुंचा दी जाती है। प्रशासन ने गांव को तो ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन अभी भी कई घर ऐसे है जिनमें शौचालय नहीं है। कई बार प्रशासन को अवगत भी कराया जा चुका है।
कविता लाठर, सरपंच बुढ़ा खेड़ा लाठर।
विभाग को भेजी सूची
सर्वे करवाया गया था गांव में 20 मकानों में शौचालय नही पाया गया। विभाग को सूची भेज दी गई है। जैसे ही ग्रामीण शौचालय बनाएंगे उनके खातों में राशि डाल दी जाएगी। प्रशासन द्वारा जो गाइड लाइन दी गई हैं। अगर कोई उनके अनुसार शौचालय बनाता है तो उसी के खाते में राशि डाली जाएगी।
अजित सिंह, खंड समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। क्षेत्र के गांव बुढ़ा खेड़ा लाठर में 1300 मकानों में शौचालय दिखाकर शौच मुक्त तो कागजों में साबित कर दिया, लेकिन आज भी 100 मकानों में शौचालय नही हैं। ग्रामीणों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लगभग 50 लोगों की शिकायत है कि उन्होंने शौचालय तो बना दिए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। ग्रामीणों ने ब्याज पर रुपये उठा कर शौचालय तो बना लिए, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। चार साल बाद आज तक वो इसका ब्याज भी भुगत रहे हैं।
बुढ़ा खेड़ा गांव की आबादी लगभग सात हजार है और गांव में कुल 1300 मकान बने हुए हैं। प्रशासन ने गांव को ओडीएफ भी घोषित किया हुआ है, लेकिन जमीनी हकीकत में देखा जाए तो गांव में अब भी 100 मकान ऐसे हैं जिनमें शौचालय नही है। ग्रामीण इस हालत में भी नही हैं कि वो शौचालय बना सकें। प्रशासन की सर्वे और कागजों में लोग उलझ कर रह गए हैं। प्रशासन के रवैये के कारण ग्रामीणों में रोष पनप रहा है।
विज्ञापन
नहीं बना शौचालय
आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण शौचालय नहीं बनाया जा सका। कई बार फार्म भी भर दिए, लेकिन कोई भी सहायता प्रशासन और सरकार की ओर से नहीं मिली है। आज भी इंतजार है कि प्रशासन कोई मदद के लिए आगे आए तो घर में ही शौचालय बनाया जा सके।
विज्ञापन
रेशमा, ग्रामीण महिला।
ब्याज पर लेकर बनाया शौचालय
चार साल पहले ब्याज पर रुपये लेकर शौचालय बनाया था, लेकिन आज भी ब्याज भुगत रहे हैं। प्रशासन बनी हुए शौचालय को पास नहीं कर रहा है। बनाने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जैसे ही आप शौचालय बना लोगे तभी आपके खाते में पैसे डाल दिए जाएंगे, लेकिन अब प्रशासन के अधिकारी पास नही कर रहे हैं।
राजदुलारी।
शौचालय के अभाव में बाहर शौच के लिए जाना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ अगर कोई अनहोनी हो गई तो कौन जिम्मेवार होगा। इस बात का भी डर लगा रहता है। ग्रामीणों की समस्या की ओर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
शांति ग्रामीण।
प्रशासन को भी करवाया जा चुका है अवगत
जैसे ही प्रशासन द्वारा काई भी स्कीम आती है तो मुनादी करवाकर ग्रामीणों तक पहुंचा दी जाती है। प्रशासन ने गांव को तो ओडीएफ घोषित कर दिया, लेकिन अभी भी कई घर ऐसे है जिनमें शौचालय नहीं है। कई बार प्रशासन को अवगत भी कराया जा चुका है।
कविता लाठर, सरपंच बुढ़ा खेड़ा लाठर।
विभाग को भेजी सूची
सर्वे करवाया गया था गांव में 20 मकानों में शौचालय नही पाया गया। विभाग को सूची भेज दी गई है। जैसे ही ग्रामीण शौचालय बनाएंगे उनके खातों में राशि डाल दी जाएगी। प्रशासन द्वारा जो गाइड लाइन दी गई हैं। अगर कोई उनके अनुसार शौचालय बनाता है तो उसी के खाते में राशि डाली जाएगी।
अजित सिंह, खंड समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन।