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उत्सव का समापन
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:31 PM IST
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नाटक पतलून का मंचन ने दर्शकों का मोहा मन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एक्टिव थियेटर एवं वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित 11 दिवसीय नाटक उत्सव के अंतिम दिन शनिवार रात को मनीष जोशी द्वारा निर्देशित नाटक पतलून का मंचन किया गया।
नाटक का आरंभ पतलून भगवान नामक एक किरदार से होता है और पूरी कहानी उसी के इर्द गिर्द घूमती है। वह बंधुआ भट्टा मजदूर के रूप में एक ईंट भट्ठे पर काम करता रहा। बहुत सालों बाद जब आजाद हुआ तो उसे एक शहर में छोड़ दिया गया जहां उसने बूट पॉलिश का काम शुरू किया। गलती से बूट पालिश करते-करते वह ग्राहक की पेंट पर पालिश लगा देता है। इस पर उसे गालियों का सामना करना पड़ता है। उसे लगता है कि पतलून में ऐसा क्या खास है कि उसके पीछे लोग इसे दुत्कारते हैं। वह भी पतलून खरीदने का निश्चय करता है और एक शोरूम में पतलून देख लेता है जो बहुत महंगी होती है। उसके लिए पैसे इकट्ठे करता है। बहुत संघर्षों के बाद जब वह खरीदता है तो उसके लिए पतलून फिट नहीं होती है । नाटक दिखाता है कि कई बार इच्छाएं तब पूरी होती हैं, जब उसकी आवश्यकता नहीं होती।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एक्टिव थियेटर एवं वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित 11 दिवसीय नाटक उत्सव के अंतिम दिन शनिवार रात को मनीष जोशी द्वारा निर्देशित नाटक पतलून का मंचन किया गया।
नाटक का आरंभ पतलून भगवान नामक एक किरदार से होता है और पूरी कहानी उसी के इर्द गिर्द घूमती है। वह बंधुआ भट्टा मजदूर के रूप में एक ईंट भट्ठे पर काम करता रहा। बहुत सालों बाद जब आजाद हुआ तो उसे एक शहर में छोड़ दिया गया जहां उसने बूट पॉलिश का काम शुरू किया। गलती से बूट पालिश करते-करते वह ग्राहक की पेंट पर पालिश लगा देता है। इस पर उसे गालियों का सामना करना पड़ता है। उसे लगता है कि पतलून में ऐसा क्या खास है कि उसके पीछे लोग इसे दुत्कारते हैं। वह भी पतलून खरीदने का निश्चय करता है और एक शोरूम में पतलून देख लेता है जो बहुत महंगी होती है। उसके लिए पैसे इकट्ठे करता है। बहुत संघर्षों के बाद जब वह खरीदता है तो उसके लिए पतलून फिट नहीं होती है । नाटक दिखाता है कि कई बार इच्छाएं तब पूरी होती हैं, जब उसकी आवश्यकता नहीं होती।
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