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किसानों ने सरकार पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप, धरना स्थल पर प्रशासन रहा अलर्ट
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जुलाना। पिछले 83 दिन से भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किलाजफरगढ़ में धरने पर बैठे किसानों ने सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आखिरी सांस तक लड़ने का फैसला लिया है। सोमवार को डीसी द्वारा नए मार्केट रेट की घोषणा की गई। जहां किसानों को उम्मीद थी कि 50 लाख प्रति एकड़ मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजे की घोषणा की जाएगी, वहीं सरकार की तरफ से मार्केट रेट में मात्र एक से 1.5 लाख प्रति एकड़ ही बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले से किसानों में रोष में हैं। उन्होंने सरकार के फैसले को अस्वीकार करते हुए आंदोलन को और अधिक ऊर्जा के साथ लड़ने का एलान किया है।
किसान नेता रमेश दलाल ने कहा कि मार्केट मूल्य निर्धारण के लिए गठित कमेटी में किसान प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए, कहा कि डीसी शुरू से ही इस मामले में गड़बड़ी कर रहे है। वह कानून का पालन करने की बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय के इशारों पर काम कर रहे है। जुलाना किसान आंदोलन में हमारी जीत तो हुई है, लेकिन न्याय नहीं मिला। जीत इसलिए हुई, क्योंकि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सरकार ने जमीन अधिग्रहण मामले में अवार्ड घोषित करने के बाद अवार्ड में संशोधन कर किसानों का मुआवजा बढ़ाया है, लेकिन न्याय नहीं हुआ, क्योंकि अभी भी सरकार ने उचित मुआवजा नहीं दिया। किसान नेता रमेश दलाल ने कहा कि धरने पर बैठे किसानों की माने तो डीसी द्वारा इतना कम मुआवजा बढ़ाना जले पर नमक छिड़कने जैसा है। ऐसेे में अब वह पीछे हटने के बजाय आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं तथा हमें भरोसा था की सरकार हमारे साथ न्याय करेगी, इसलिए हमने रेलों को नहीं रोका, लेकिन जिस प्रकार सरकार ने हमें धोखा दिया गया है अब आरपार की लड़ाई होगी।
पुलिस बल धरनास्थल पर रहा मुस्तैद
जींद रोहतक मार्ग पर किलाजफरगढ़ गांव में धरना स्थल पर बैठे किसानों के रेल रोको आंदोलन की चेतावनी के बाद से ही प्रशासन अलर्ट पर है। धरना स्थल पर तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट, तीन डीएसपी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए धरनास्थल पर दो फायर बिग्रेड की गाड़ियों और वाटर कैनन की गाड़ी मौके पर मौजूद रही।
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किसान नेता रमेश दलाल ने कहा कि मार्केट मूल्य निर्धारण के लिए गठित कमेटी में किसान प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए, कहा कि डीसी शुरू से ही इस मामले में गड़बड़ी कर रहे है। वह कानून का पालन करने की बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय के इशारों पर काम कर रहे है। जुलाना किसान आंदोलन में हमारी जीत तो हुई है, लेकिन न्याय नहीं मिला। जीत इसलिए हुई, क्योंकि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सरकार ने जमीन अधिग्रहण मामले में अवार्ड घोषित करने के बाद अवार्ड में संशोधन कर किसानों का मुआवजा बढ़ाया है, लेकिन न्याय नहीं हुआ, क्योंकि अभी भी सरकार ने उचित मुआवजा नहीं दिया। किसान नेता रमेश दलाल ने कहा कि धरने पर बैठे किसानों की माने तो डीसी द्वारा इतना कम मुआवजा बढ़ाना जले पर नमक छिड़कने जैसा है। ऐसेे में अब वह पीछे हटने के बजाय आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं तथा हमें भरोसा था की सरकार हमारे साथ न्याय करेगी, इसलिए हमने रेलों को नहीं रोका, लेकिन जिस प्रकार सरकार ने हमें धोखा दिया गया है अब आरपार की लड़ाई होगी।
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पुलिस बल धरनास्थल पर रहा मुस्तैद
जींद रोहतक मार्ग पर किलाजफरगढ़ गांव में धरना स्थल पर बैठे किसानों के रेल रोको आंदोलन की चेतावनी के बाद से ही प्रशासन अलर्ट पर है। धरना स्थल पर तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट, तीन डीएसपी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए धरनास्थल पर दो फायर बिग्रेड की गाड़ियों और वाटर कैनन की गाड़ी मौके पर मौजूद रही।
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