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ठेकेदारों की मनमानी से बढ़ रहा प्रदूषण
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ठेकेदारों की मनमानी से शहर में बढ़ रहा प्रदूषण
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विकास कार्यों में ठेकेदारों की मनमानी व प्रशासन की अनदेखी के चलते जींद शहर दुनिया के सबसे अधिक 20 प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है। हालांकि अब पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण कम करने के लिए नगर परिषद व एनएचएआई को पत्र लिखकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। बहरहाल प्रशासन द्वारा अभी तक कोई कदम नहीं उठाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल जींद शहर में अर्बन इस्टेट की सड़कों के निर्माण, अमृत योजना के तहत बरसाती पानी निकासी के दो बड़े काम चल रहे हैं। इसके चलते अर्बन इस्टेट की सभी सड़कों को उखाड़ा जा चुका है और बहुत ही कम सड़कों का निर्माण दोबारा हो पाया है। ऐसे में उखाड़ी गई सड़कों से दिन भर धूल उड़ती रहती है। वहीं अमृत योजना के तहत पूरे शहर में पाइप लाइन डाली जा रही है। इसके चलते भी धूल काफी बढ़ गई है। इसके अलावा शहर के चारों ओर बाईपास का निर्माण, गोहाना रोड का चौड़ीकरण, रोहतक रोड बाईपास का चौड़ीकरण भी चल रहा है। यहां ठेकेदार सभी नियमों को ताक पर रख कर काम कर रहे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। हैरानी की बात है कि प्रशासन ने भी ठेकेदारों को खुली छूट दे रखी है।
नहीं हो रहा नियमों का पालन
सभी निर्माण कार्यों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशानुसार धूल नहीं उड़े इसके पुख्ता प्रबंध करने होते हैं। इसके लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए और तमाम इमारती सामान जैसे रेती, मिट्टी, ईंट, क्रेशर को ढक कर ढोना होता है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर ठेकेदार धूल उड़ा रहे हैं।
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फैक्ट्रियों पर नहीं नकेल
शहर के आसपास धुआं फैलाने वाली काफी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियां टायर भी जलाती हैं। हालांकि इनको लेकर लोग समय- समय पर प्रशासन को शिकायत भी देते रहते हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हो रही।
तीन गुणा ज्यादा है प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में 2.5 पार्टिकुलर 50 से कम होना चाहिए। यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 50 तक अच्छा माना जाता है। वहीं एक्यूआई 100 तक औसत होता है, लेकिन जींद में एक्यूआई करीब 150 तक रहता है। वीरवार को भी प्रदूषण का स्तर एक्यूआई 196 रहा, जो खतरनाक स्तर पर है।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। इसके लिए नगर परिषद को पत्र भेजा गया है कि नगर परिषद क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों में प्रदूषण कम करने के लिए काम करें। साथ ही एनएचएआई को भी पत्र भेजा गया है, कि धूल नहीं उड़ने दें।
- विनय गिल, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
प्रदूषण का स्तर इस प्रकार बढ़ना चिंता का विषय है। इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व सभी ऐसी फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दिए गए हैं, जो धुआं छोड़ती हैं। ठेकेदारों को बुलाकर आदेश दिए जाएंगे कि वे सही प्रकार से पानी का छिड़काव करें और सुनिश्चित करें कि धूल नहीं उठे।
- डॉ. आदित्य दहिया, डीसी, जींद।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। विकास कार्यों में ठेकेदारों की मनमानी व प्रशासन की अनदेखी के चलते जींद शहर दुनिया के सबसे अधिक 20 प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है। हालांकि अब पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण कम करने के लिए नगर परिषद व एनएचएआई को पत्र लिखकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। बहरहाल प्रशासन द्वारा अभी तक कोई कदम नहीं उठाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल जींद शहर में अर्बन इस्टेट की सड़कों के निर्माण, अमृत योजना के तहत बरसाती पानी निकासी के दो बड़े काम चल रहे हैं। इसके चलते अर्बन इस्टेट की सभी सड़कों को उखाड़ा जा चुका है और बहुत ही कम सड़कों का निर्माण दोबारा हो पाया है। ऐसे में उखाड़ी गई सड़कों से दिन भर धूल उड़ती रहती है। वहीं अमृत योजना के तहत पूरे शहर में पाइप लाइन डाली जा रही है। इसके चलते भी धूल काफी बढ़ गई है। इसके अलावा शहर के चारों ओर बाईपास का निर्माण, गोहाना रोड का चौड़ीकरण, रोहतक रोड बाईपास का चौड़ीकरण भी चल रहा है। यहां ठेकेदार सभी नियमों को ताक पर रख कर काम कर रहे हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। हैरानी की बात है कि प्रशासन ने भी ठेकेदारों को खुली छूट दे रखी है।
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नहीं हो रहा नियमों का पालन
सभी निर्माण कार्यों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशानुसार धूल नहीं उड़े इसके पुख्ता प्रबंध करने होते हैं। इसके लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए और तमाम इमारती सामान जैसे रेती, मिट्टी, ईंट, क्रेशर को ढक कर ढोना होता है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर ठेकेदार धूल उड़ा रहे हैं।
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फैक्ट्रियों पर नहीं नकेल
शहर के आसपास धुआं फैलाने वाली काफी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियां टायर भी जलाती हैं। हालांकि इनको लेकर लोग समय- समय पर प्रशासन को शिकायत भी देते रहते हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हो रही।
तीन गुणा ज्यादा है प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में 2.5 पार्टिकुलर 50 से कम होना चाहिए। यानि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 50 तक अच्छा माना जाता है। वहीं एक्यूआई 100 तक औसत होता है, लेकिन जींद में एक्यूआई करीब 150 तक रहता है। वीरवार को भी प्रदूषण का स्तर एक्यूआई 196 रहा, जो खतरनाक स्तर पर है।
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। इसके लिए नगर परिषद को पत्र भेजा गया है कि नगर परिषद क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों में प्रदूषण कम करने के लिए काम करें। साथ ही एनएचएआई को भी पत्र भेजा गया है, कि धूल नहीं उड़ने दें।
- विनय गिल, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
प्रदूषण का स्तर इस प्रकार बढ़ना चिंता का विषय है। इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व सभी ऐसी फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दिए गए हैं, जो धुआं छोड़ती हैं। ठेकेदारों को बुलाकर आदेश दिए जाएंगे कि वे सही प्रकार से पानी का छिड़काव करें और सुनिश्चित करें कि धूल नहीं उठे।
- डॉ. आदित्य दहिया, डीसी, जींद।