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फसल खरीद पर गंभीर नहीं सरकार, फसल को मंडी में डालकर किसानों को करना पड़ा दस दिन इंतजार

Wed, 10 Oct 2018 11:18 PM IST
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:18 PM IST
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फसल खरीद पर गंभीर नहीं सरकार, फसल को मंडी में डालकर किसानों को करना पड़ा दस दिन इंतजार
फसल खरीद के लिए सरकार गंभीर नहीं, बेचने के लिए दस दिन करना पड़ा इंतजार
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अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। किसान और सरकार के मध्य आए दिन वायदाखिलाफी रही है। सरकार के दावे कुछ और हकीकत कुछ और है। किसानों के लिए सबसे बुरा दौर यह होता है कि मंडी में सरकार द्वारा निर्धारित समय पर फसल लेकर आने वाले किसानों को कोई खरीदार नहीं मिलता। यह किसानों के साथ हर फसल बेचने के समय होता है। सरकार समय निर्धारित कर किसानों को फसल खरीदने का आश्वासन देती है, लेकिन जब किसान फसल लेकर मंडी में आते हैं तो वहां पर सरकार की नहीं चलती है। प्रशासन द्वारा फसल को खरीदने के लिए निर्धारित की गई एजेंसियां ही सरकार बन जाती हैं। जिसकी वजह से किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित समय से कई दिनों बाद तक अपनी फसल बेचने का इंतजार करना पड़ता है।
यह हाल उचाना मंडी में पीआर धान की खरीद प्रक्रिया को लेकर हुआ। इस धान की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी थी, लेकिन यह दस दिन बाद शुरू हुई। इस दौरान दर्जनों किसानों ने अपना काम छोड़कर मंडियों में धान की रखवाली के लिए बैठना पड़ा। खरीद के पहले दिन 1640 क्विंटल ही धान खरीदा गया। पीआर की खरीद शुरू होने से किसानों ने कुछ राहत की सांस ली। यहां पर तीन खरीद एजेंसी पीआर के लिए अलॉट होने के बाद भी किसानों को धान बेचने में दिक्कत आ रही है। मंगलवार दोपहर बाद फूड एंड सप्लाई ने 1640 क्विंटल धान की खरीद की। यहां पर एफसीआई, हैफेड, फूड एंड सप्लाई को अलग-अलग दिन निर्धारित खरीद के लिए दिन तय किए गए हैं। किसानों ने कहा कि नियमित तौर पर पीआर धान की खरीद होनी चाहिए ताकि किसानों की फसल मंडी में आते ही बिके। बीते साल की तरह खरीद होनी चाहिए। बीते साल पीआर धान मंडी में आते ही बिकने लगा था। इस बार नौवें दिन खरीद शुरू हुई।
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नियमित हो खरीद : श्योकंद
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान सुरेंद्र श्योकंद, राजकुमार, बलवान व सुखबीर ने कहा कि पीआर धान की नियमित तौर पर सरकारी खरीद होनी चाहिए। नियमित तौर पर सरकारी खरीद नहीं हुई तो किसान जिस खरीद एजेंसी का दिन खरीद का होगा उसके कार्यालय के बाहर चारपाई डालकर बैठ कर रोष प्रकट करेंगे। किसान रात को मंडी में अपनी फसल के पास रुक कर उसकी रखवाली कर रहे हैं। मच्छरों, बंदरों के आतंक से पूरी रात सो नहीं पाते हैं। खेत में पीआर धान के अलावा कपास की चुगाई सहित अन्य घरेलू काम होते हैं, लेकिन फसल नहीं बिकने से मंडी में रुकना पड़ता है। खरीद एजेंसी को चाहिए कि वह नियमित तौर पर खरीद करें, ताकि पीआर मंडी में आते ही बिके।
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