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जिले को हराभरा बनाने को लगाए साढ़े 12 लाख पौधे, अब पौत्र का सिखा रहा कला
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:26 AM IST
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अपने पौत्र अमन को पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण देते दलबीर रजाना।
- फोटो : jind
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जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जींद-पानीपत मार्ग पर स्थित रजाना कलां गांव निवासी 51 वर्षीय दलबीर रजाना ने जिले को हराभरा बनाने के लिए अनूठी मुहिम की शुरुआत की है। वर्ष 2002 में शुरू की गई अपनी इस मुहिम के तहत दलबीर रजाना साढ़े 12 लाख से भी ज्यादा पौधो व 157 त्रिवेणियां निशुल्क लगा चुके हैं। आसपास के क्षेत्र के लोग अब दलबीर रजाना को पर्यावरण मित्र के नाम से जानते हैं। जिले को हराभरा बनाने का जुनून दलबीर के सिर पर इतना है कि अब वह अपने साथ-साथ अपने नौ वर्षीय पौत्र अमन को भी कलम से अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने व पौधा रोपण का प्रशिक्षण दे रहे हैं। छायादार, फलदार, फूलदार पौधों के साथ-साथ औषधीय पौधों के लिए भी दलबीर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि लोग घर पर ही रोगों का इलाज कर सकें।
2002 में शुरू किया पौधा रोपण अभियान
महज सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1982 में 17 वर्ष की उम्र में दलबीर ने जन स्वास्थ्य विभाग में चौकीदार की नौकरी ज्वाइन की। नौकरी के साथ-साथ दलबीर की रुचि सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा रहती थी। इसलिए दलबीर रजाना ने पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वर्ष 2002 में पौधारोपण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। देखते ही देखते दलबीर ने अपने पौधारोपण के कार्यक्रम को एक अभियान का रूप दे दिया। अब तक दलबीर साढ़े 12 लाख से ज्यादा पौधे निशुल्क लगा चुके हैं। वर्ष 2015 में विभाग से प्रमोशन मिलने के बाद दलबीर अब गांव की ही डिग्गी में पंप ऑपरेटर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
पिता से सीखा कलम से पौधे तैयार करने का हुनर
दलबीर का बचपन से ही पेड़-पौधों के प्रति प्रेम था। इसलिए दलबीर ने पढ़ाई के साथ-साथ ही अपनी पिता दीवान सिंह से कलम से अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण लिया था।
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अब नई पीढ़ी को दे रहा प्रशिक्षण
पर्यावरण मित्र दलबीर रजाना का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए इस अभियान को ओर तेज गति देने की जरूरत है। इसलिए अब वह अपने साथ-साथ अपने नौ वर्षीय पौत्र अमन को भी कलम से अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि उसका पौत्र अमन भी आगे चलकर इस अभियान को आगे बढ़ा सके।
डिग्गी में ही तैयार की खुद की नर्सरी
एक कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। यह कहावत दलबीर रजाना पर सटीक बैठती है। दलबीर ने गांव की डिग्गी में ही अपनी नर्सरी तैयार की है। इस काम में दलबीर की पत्नी शीला देवी भी उसकी मदद करती हैं।
बेटी के जन्म पर भी करते हैं निशुल्क पौधारोपण
बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता को बदलने के लिए दलबीर रजाना भी अपना सहयोग कर रहे हैं। गांव और आसपास के क्षेत्र में बेटी के पैदा होने पर दलबीर रजाना पौधारोपण करते हैं। उस पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी उनके परिवार के सदस्यों को सौंपी जाती है। रजाना का मानना है कि लड़कियां और पौधे दोनों ही समाज को आगे बढ़ाने काम करते हैं।
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2002 में शुरू किया पौधा रोपण अभियान
महज सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1982 में 17 वर्ष की उम्र में दलबीर ने जन स्वास्थ्य विभाग में चौकीदार की नौकरी ज्वाइन की। नौकरी के साथ-साथ दलबीर की रुचि सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा रहती थी। इसलिए दलबीर रजाना ने पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वर्ष 2002 में पौधारोपण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। देखते ही देखते दलबीर ने अपने पौधारोपण के कार्यक्रम को एक अभियान का रूप दे दिया। अब तक दलबीर साढ़े 12 लाख से ज्यादा पौधे निशुल्क लगा चुके हैं। वर्ष 2015 में विभाग से प्रमोशन मिलने के बाद दलबीर अब गांव की ही डिग्गी में पंप ऑपरेटर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
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पिता से सीखा कलम से पौधे तैयार करने का हुनर
दलबीर का बचपन से ही पेड़-पौधों के प्रति प्रेम था। इसलिए दलबीर ने पढ़ाई के साथ-साथ ही अपनी पिता दीवान सिंह से कलम से अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण लिया था।
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अब नई पीढ़ी को दे रहा प्रशिक्षण
पर्यावरण मित्र दलबीर रजाना का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए इस अभियान को ओर तेज गति देने की जरूरत है। इसलिए अब वह अपने साथ-साथ अपने नौ वर्षीय पौत्र अमन को भी कलम से अच्छी किस्म के पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि उसका पौत्र अमन भी आगे चलकर इस अभियान को आगे बढ़ा सके।
डिग्गी में ही तैयार की खुद की नर्सरी
एक कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। यह कहावत दलबीर रजाना पर सटीक बैठती है। दलबीर ने गांव की डिग्गी में ही अपनी नर्सरी तैयार की है। इस काम में दलबीर की पत्नी शीला देवी भी उसकी मदद करती हैं।
बेटी के जन्म पर भी करते हैं निशुल्क पौधारोपण
बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता को बदलने के लिए दलबीर रजाना भी अपना सहयोग कर रहे हैं। गांव और आसपास के क्षेत्र में बेटी के पैदा होने पर दलबीर रजाना पौधारोपण करते हैं। उस पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी उनके परिवार के सदस्यों को सौंपी जाती है। रजाना का मानना है कि लड़कियां और पौधे दोनों ही समाज को आगे बढ़ाने काम करते हैं।