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प्रदूषण पर गंभीर नहीं प्रशासन, निर्माण कार्यों पर धूल में उड़ रहे नियम
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बढ़ते प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पर्यावरण प्रदूषण के मामले में विश्व के टॉप 20 शहरों में शामिल होे के बाद भी जींद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शुक्रवार को भी शहर के निर्माण कार्यों पर नियम धूल में उड़ते रहे। चिमनियों से जहरीला धुआं निकलता रहा। हालांकि अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दो दिन वाटर फॉगिंग करवाने की बात कह रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा सिर्फ कागजों में ही पर्यावरण प्रदूषण रोकने की योजनाएं बनाई गई हैं।
जानकारी के लिए शुक्रवार को भी जींद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 119 रहा। प्रदूषण का यह स्तर बेहद खतरनाक माना जाता है। चिकित्सकों के अनुसार एक्यूआई 50 से अधिक होने पर यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है। इससे सांस की बीमारी, आंखों में जलन, त्वचा रोक व अन्य गंभीर बीमारी हो सकती है। विशेषकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गों के लिए प्रदूषण का यह स्तर बेहद खतरनाक है। इसके बावजूद प्रशासन ने प्रदूषण कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगर परिषद व एनएचआई को पत्र भेज कर विकास कार्यों पर प्रदूषण रोकने को कहा है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह पत्र सरकारी व्यवस्था की भेंट चढ़ गया। इस पर हालांकि नगर परिषद ने ठेकेदारों को नोटिस भेजकर पानी का छिड़काव व प्रदूषण फैलाने वाली तमाम सामग्री को ढक कर ढोने को कहा है, लेकिन यह महज एक औपचारिकता रही और शुक्रवार को भी तमाम व्यवस्थाएं पहले की तरह ही चलती रही।
अर्बन इस्टेट में नहीं हुआ पानी का छिड़काव
शहर के अर्बन इस्टेट की सड़कें पिछले करीब तीन महीने से उखाड़ी गई हैं। हालांकि इनको बनाने का काम चल रहा है, लेकिन जो गलियां उखाड़ी गई हैं, अब वहां से उड़ने वाली धूल हवा में घुल कर जहर का काम कर रही है। इन सड़कों पर ठेकेदार को नियमित रूप से पानी का छिड़काव करवाना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसी प्रकार एनएचआई द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों पर भी प्रदूषण रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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करवाई जाएगी वाटर फॉगिंग
जींद में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है। इसका मुख्य कारण यहां चल रहे विकास कार्य हैं। इसके लिए नगर परिषद व एनएचएआई को पत्र लिख कर प्रदूषण रोकने को कहा गया है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शनिवार व रविवार को जींद में वाटर फॉगिंग करवाएगा। इससे प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण कार्यों में नियमों की पालना हो।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पर्यावरण प्रदूषण के मामले में विश्व के टॉप 20 शहरों में शामिल होे के बाद भी जींद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शुक्रवार को भी शहर के निर्माण कार्यों पर नियम धूल में उड़ते रहे। चिमनियों से जहरीला धुआं निकलता रहा। हालांकि अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दो दिन वाटर फॉगिंग करवाने की बात कह रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा सिर्फ कागजों में ही पर्यावरण प्रदूषण रोकने की योजनाएं बनाई गई हैं।
जानकारी के लिए शुक्रवार को भी जींद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 119 रहा। प्रदूषण का यह स्तर बेहद खतरनाक माना जाता है। चिकित्सकों के अनुसार एक्यूआई 50 से अधिक होने पर यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है। इससे सांस की बीमारी, आंखों में जलन, त्वचा रोक व अन्य गंभीर बीमारी हो सकती है। विशेषकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गों के लिए प्रदूषण का यह स्तर बेहद खतरनाक है। इसके बावजूद प्रशासन ने प्रदूषण कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगर परिषद व एनएचआई को पत्र भेज कर विकास कार्यों पर प्रदूषण रोकने को कहा है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह पत्र सरकारी व्यवस्था की भेंट चढ़ गया। इस पर हालांकि नगर परिषद ने ठेकेदारों को नोटिस भेजकर पानी का छिड़काव व प्रदूषण फैलाने वाली तमाम सामग्री को ढक कर ढोने को कहा है, लेकिन यह महज एक औपचारिकता रही और शुक्रवार को भी तमाम व्यवस्थाएं पहले की तरह ही चलती रही।
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अर्बन इस्टेट में नहीं हुआ पानी का छिड़काव
शहर के अर्बन इस्टेट की सड़कें पिछले करीब तीन महीने से उखाड़ी गई हैं। हालांकि इनको बनाने का काम चल रहा है, लेकिन जो गलियां उखाड़ी गई हैं, अब वहां से उड़ने वाली धूल हवा में घुल कर जहर का काम कर रही है। इन सड़कों पर ठेकेदार को नियमित रूप से पानी का छिड़काव करवाना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसी प्रकार एनएचआई द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों पर भी प्रदूषण रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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करवाई जाएगी वाटर फॉगिंग
जींद में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा है। इसका मुख्य कारण यहां चल रहे विकास कार्य हैं। इसके लिए नगर परिषद व एनएचएआई को पत्र लिख कर प्रदूषण रोकने को कहा गया है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शनिवार व रविवार को जींद में वाटर फॉगिंग करवाएगा। इससे प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण कार्यों में नियमों की पालना हो।
विनय गिल, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।