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डेंगू से लोगों को बचाने के लिए अलर्ट हुए स्वास्थ्यकर्मी
Updated Thu, 24 May 2018 12:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
प्रदेश में डेंगू के मामले सामने आने के बाद जींद में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। हालांकि अभी तक जिले में डेंगू का कोई मामला नहीं आया है, लेकिन प्रशासन ने पहले ही अभियान शुरू कर दिया है।
बुधवार को बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इंटल खुर्द गांव में डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता कैंप लगाकर लोगों को इससे बचाव और डेंगू बुखार की पहचान बताई। सुशील शर्मा ने कहा कि डेंगू को रोकना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। यह बुखार मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है जोकि दिन के समय काटता है। यह मच्छर साफ खड़े पानी में अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इस मच्छर को टाइगर मच्छर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस मच्छर के शरीर पर टाइगर की भांति सफेद और काली धारियां होती हैं। उन्होंने बुखार के लक्षण बताते हुए कहा कि इसमें लगातार तेज बुखार, आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, चमड़ी पर दाने, नाक से रक्त बहना, शरीर पर लाल रंग के धब्बे इसकी पहचान हैं। इस अवसर पर कमला, रीना, राज सिंह, विक्रम, प्रदीप, अमित, सुनील, कविता, सीमा, पूनम और शीला मौजूद रहीं।
डेंगू से गई थी तीन जान
पिछले साल डेंगू से जिला में तीन लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इनकी मौत डेंगू से होने की पुष्टी नहीं की थी। इसके बावजूद दो साल पहले हुई मौतों के मुकाबले पिछले साल स्थिति नियंत्रण में रही। ऐसे में इस बार भी प्रशासन समय रहते बचाव अभियान चला रहा है।
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यह हैं बचाव के तरीके
एएनएम सुनीता ने कहा कि कूलर एवं अन्य पानी के कंटेनरों को सप्ताह में एक दिन साफ करके सुखाना चाहिए। गड्ढों को मिट्टी से भरा जाए। अपने आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें। अगर पानी खड़ा है तो उसमें काला तेल डालना चाहिए। छतों पर टूटे बर्तन और कबाड़ को समय-समय पर उठाना चाहिए।
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जींद।
प्रदेश में डेंगू के मामले सामने आने के बाद जींद में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। हालांकि अभी तक जिले में डेंगू का कोई मामला नहीं आया है, लेकिन प्रशासन ने पहले ही अभियान शुरू कर दिया है।
बुधवार को बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इंटल खुर्द गांव में डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता कैंप लगाकर लोगों को इससे बचाव और डेंगू बुखार की पहचान बताई। सुशील शर्मा ने कहा कि डेंगू को रोकना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। यह बुखार मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है जोकि दिन के समय काटता है। यह मच्छर साफ खड़े पानी में अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इस मच्छर को टाइगर मच्छर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस मच्छर के शरीर पर टाइगर की भांति सफेद और काली धारियां होती हैं। उन्होंने बुखार के लक्षण बताते हुए कहा कि इसमें लगातार तेज बुखार, आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, चमड़ी पर दाने, नाक से रक्त बहना, शरीर पर लाल रंग के धब्बे इसकी पहचान हैं। इस अवसर पर कमला, रीना, राज सिंह, विक्रम, प्रदीप, अमित, सुनील, कविता, सीमा, पूनम और शीला मौजूद रहीं।
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डेंगू से गई थी तीन जान
पिछले साल डेंगू से जिला में तीन लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इनकी मौत डेंगू से होने की पुष्टी नहीं की थी। इसके बावजूद दो साल पहले हुई मौतों के मुकाबले पिछले साल स्थिति नियंत्रण में रही। ऐसे में इस बार भी प्रशासन समय रहते बचाव अभियान चला रहा है।
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यह हैं बचाव के तरीके
एएनएम सुनीता ने कहा कि कूलर एवं अन्य पानी के कंटेनरों को सप्ताह में एक दिन साफ करके सुखाना चाहिए। गड्ढों को मिट्टी से भरा जाए। अपने आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें। अगर पानी खड़ा है तो उसमें काला तेल डालना चाहिए। छतों पर टूटे बर्तन और कबाड़ को समय-समय पर उठाना चाहिए।