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स्वास्थ्य विभाग
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:22 PM IST
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उल्टी गंगा पहाड़ चढ़ा रहा है स्वास्थ्य विभाग
पवन डाहौला
अलेवा। सरकारी व्यवस्थाएं हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर योजना बनाने वाले अधिकारी किस प्रकार सिस्टम को चलते हैं। इसका ताजा मामला, स्वास्थ्य विभाग का सामने आया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग उल्टी गंगा पहाड़ चढ़ा रहा है। इसका खामियाजा अब यहां कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री की घोषणा पर स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा का कर दिया। इससे जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी असमंजस में फंसे हुए हैं। अब इसके लिए बार-बार मुख्यालय को पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।
दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 12 मई 2015 को अलेवा पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी बनाने और नगूरां उपस्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड कर पीएचसी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की घोषणा संख्या 1005 पर कार्रवाई करते हुए मुख्यालय ने जिला स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए एस्टीमेट मांगा। इससे पहले अलेवा पीएचसी और इसके अधीन आने वाले सब सेंटर कंडेला सीएचसी का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग सीएचसी कंडेला और कालवा के कुछ गांवों को काट कर अलेवा पीएचसी का क्षेत्र तय कर दिया। इसके तहत नगूरां पीएचसी को भी अलेवा सीएचसी में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया। इसको मंजूर करते हुए करीब पांच महीने पहले स्वास्थ्य विभाग नगूरां पीएचसी के लिए 12 कर्मचारियों के स्टाफ के पद स्वीकृत कर दिए। इसके तहत ही सीएचसी पिहोवा से एक हेल्थ इंस्पेक्टर (एचआई) को सीएचसी अलेवा के तहत पीएचसी नगूरां में नियुक्त कर दिया गया। अब एचआई की रिपोर्टिंग अलेवा सीएचसी में है, लेकिन यहां सक्षम अधिकारी ही नहीं है। नियमानुसार सीएचसी का मुख्यिा एसएमओ होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने यहां एसएमओ का पद ही स्वीकृत नहीं किया है। ऐसे में एचआई ज्वानिंग के दो महीने बाद भी वेतन नहीं ले पाया है।
चार कर्मचारियों की रिपोर्टिंग कंडेला सीएचसी को
नगूरां उप स्वास्थ्य केंद्र में पहले से तैनात चार कर्मचारियों की रिपोर्टिंग अब भी कंडेला सीएचसी में है। ऐसे में इन कर्मचारियों का वेतन कंडेला सीएचसी से निकल रहा है, लेकिन यहां तबादला होकर आए एचआई की रिपोर्टिंग अलेवा सीएचसी में है, जिसका फिलहाल कोई वजूद ही नहीं है।
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80 हजार से ऊपर की आबादी पर सीएचसी
सीएचसी का गठन 80 हजार से डेढ़ लाख तक की आबादी पर होता है। इसके तहत ही अलेवा सीएचसी के लिए कंडेला और कालवा सीएचसी के गांवों को जोड़ कर अलेवा में सीएचसी की परियोजना तैयार की गई, लेकिन दो साल बाद भी यह शुरू नहीं हो पाई है।
नगूरां पीएचसी में स्वीकृत पद
नगूरां पीएचसी में एक डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक एच आई पुरुष व एक महिला सुपरवाइजर व अन्य हैं लेकिन इन पदों में से केवल पांच पदों पर कर्मचारी नियुक्त हैं। इनमें से भी चार कर्मचार उपकेंद्र के हैं। ऐसे में सीएम की घोषणा के बाद भी यह पीएचसी लोगों के लिए सुविधा नहीं बनी है। जिस प्रकार से पीएचसी में नियुक्त एचआई कि सैलरी पिछले दो माह से रूकी हुई उसको देखकर कोई भी कर्मचारी यहां अपना तबादला करवाने से पीछे हट रहें है ।
नगूरां पीएचसी के अधीन नगूरां, शाहपुर, दिल्लूवाला, हसनपुर, तथा चूहडपुर गांव तथा अलेवा सीएचसी के अधीन नगूरां पीएचसी व ढाठरथ पीएचसी आ सकती है।
सरकार का नया कारनामा कहे या फिर और कुछ सरकार व विभाग ने अलेवा पीएचसी का दर्जा बड़ाकर उसको सीएचसी करने काम तो किया लेकिन विभाग ने अभी तक सीएचसी स्तर के पद स्वीकृत नही किए ऐसे में सीएचसी का कार्य कैसे चल पाएगा ।
कर्मचारियों की अनदेखी
इस बारे में हरियाणा राज्य कर्मचारी महा संघ कि राज्य उपाध्यक्ष एवं नगूरां सब सेंटर पर तैनात एएनएम राजबाला शर्मा से बात कि गई तो उन्होंने बताया कि यहां पर कर्मचारियों कि अनदेखी हो रही है। अभी तक एचआई को पिछले दो माह से सैलरी नहीं मिली है। वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेगा। अभी तक पीएचसी के अधीन कौन कौन से गांव आएंगे यह साफ नहीं हुआ और न ही यह साफ हुआ कि यह पीएचसी किस सीएचसी के अधीन है।
सीएचसी अलेवा के पदों कि स्वीकृति के लिए विभाग को लिखा हुआ तथा पीएचसी नगूरां को अलेवा सीएचसी में जोड़ने के लिए भी विभाग को भेजा हु आ है। इस पर प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह पूरी होगी काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
अगर पीएचसी में किसी कर्मचारी को सैलरी नहीं मिल रही है तो उसको सैलरी दिलाने काम किया जाएगा। बाकी की सभी व्यवस्थाएं जिला स्तर पर होनी हैं। इसके बारे में बात की जाएगी।
डॉ. एसबी कंबोज, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा।
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उल्टी गंगा पहाड़ चढ़ा रहा है स्वास्थ्य विभाग
पवन डाहौला
अलेवा। सरकारी व्यवस्थाएं हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर योजना बनाने वाले अधिकारी किस प्रकार सिस्टम को चलते हैं। इसका ताजा मामला, स्वास्थ्य विभाग का सामने आया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग उल्टी गंगा पहाड़ चढ़ा रहा है। इसका खामियाजा अब यहां कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री की घोषणा पर स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा का कर दिया। इससे जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी असमंजस में फंसे हुए हैं। अब इसके लिए बार-बार मुख्यालय को पत्र लिखे जा रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।
दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 12 मई 2015 को अलेवा पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी बनाने और नगूरां उपस्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड कर पीएचसी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की घोषणा संख्या 1005 पर कार्रवाई करते हुए मुख्यालय ने जिला स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए एस्टीमेट मांगा। इससे पहले अलेवा पीएचसी और इसके अधीन आने वाले सब सेंटर कंडेला सीएचसी का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग सीएचसी कंडेला और कालवा के कुछ गांवों को काट कर अलेवा पीएचसी का क्षेत्र तय कर दिया। इसके तहत नगूरां पीएचसी को भी अलेवा सीएचसी में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया। इसको मंजूर करते हुए करीब पांच महीने पहले स्वास्थ्य विभाग नगूरां पीएचसी के लिए 12 कर्मचारियों के स्टाफ के पद स्वीकृत कर दिए। इसके तहत ही सीएचसी पिहोवा से एक हेल्थ इंस्पेक्टर (एचआई) को सीएचसी अलेवा के तहत पीएचसी नगूरां में नियुक्त कर दिया गया। अब एचआई की रिपोर्टिंग अलेवा सीएचसी में है, लेकिन यहां सक्षम अधिकारी ही नहीं है। नियमानुसार सीएचसी का मुख्यिा एसएमओ होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने यहां एसएमओ का पद ही स्वीकृत नहीं किया है। ऐसे में एचआई ज्वानिंग के दो महीने बाद भी वेतन नहीं ले पाया है।
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चार कर्मचारियों की रिपोर्टिंग कंडेला सीएचसी को
नगूरां उप स्वास्थ्य केंद्र में पहले से तैनात चार कर्मचारियों की रिपोर्टिंग अब भी कंडेला सीएचसी में है। ऐसे में इन कर्मचारियों का वेतन कंडेला सीएचसी से निकल रहा है, लेकिन यहां तबादला होकर आए एचआई की रिपोर्टिंग अलेवा सीएचसी में है, जिसका फिलहाल कोई वजूद ही नहीं है।
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80 हजार से ऊपर की आबादी पर सीएचसी
सीएचसी का गठन 80 हजार से डेढ़ लाख तक की आबादी पर होता है। इसके तहत ही अलेवा सीएचसी के लिए कंडेला और कालवा सीएचसी के गांवों को जोड़ कर अलेवा में सीएचसी की परियोजना तैयार की गई, लेकिन दो साल बाद भी यह शुरू नहीं हो पाई है।
नगूरां पीएचसी में स्वीकृत पद
नगूरां पीएचसी में एक डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक एच आई पुरुष व एक महिला सुपरवाइजर व अन्य हैं लेकिन इन पदों में से केवल पांच पदों पर कर्मचारी नियुक्त हैं। इनमें से भी चार कर्मचार उपकेंद्र के हैं। ऐसे में सीएम की घोषणा के बाद भी यह पीएचसी लोगों के लिए सुविधा नहीं बनी है। जिस प्रकार से पीएचसी में नियुक्त एचआई कि सैलरी पिछले दो माह से रूकी हुई उसको देखकर कोई भी कर्मचारी यहां अपना तबादला करवाने से पीछे हट रहें है ।
नगूरां पीएचसी के अधीन नगूरां, शाहपुर, दिल्लूवाला, हसनपुर, तथा चूहडपुर गांव तथा अलेवा सीएचसी के अधीन नगूरां पीएचसी व ढाठरथ पीएचसी आ सकती है।
सरकार का नया कारनामा कहे या फिर और कुछ सरकार व विभाग ने अलेवा पीएचसी का दर्जा बड़ाकर उसको सीएचसी करने काम तो किया लेकिन विभाग ने अभी तक सीएचसी स्तर के पद स्वीकृत नही किए ऐसे में सीएचसी का कार्य कैसे चल पाएगा ।
कर्मचारियों की अनदेखी
इस बारे में हरियाणा राज्य कर्मचारी महा संघ कि राज्य उपाध्यक्ष एवं नगूरां सब सेंटर पर तैनात एएनएम राजबाला शर्मा से बात कि गई तो उन्होंने बताया कि यहां पर कर्मचारियों कि अनदेखी हो रही है। अभी तक एचआई को पिछले दो माह से सैलरी नहीं मिली है। वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेगा। अभी तक पीएचसी के अधीन कौन कौन से गांव आएंगे यह साफ नहीं हुआ और न ही यह साफ हुआ कि यह पीएचसी किस सीएचसी के अधीन है।
सीएचसी अलेवा के पदों कि स्वीकृति के लिए विभाग को लिखा हुआ तथा पीएचसी नगूरां को अलेवा सीएचसी में जोड़ने के लिए भी विभाग को भेजा हु आ है। इस पर प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह पूरी होगी काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
अगर पीएचसी में किसी कर्मचारी को सैलरी नहीं मिल रही है तो उसको सैलरी दिलाने काम किया जाएगा। बाकी की सभी व्यवस्थाएं जिला स्तर पर होनी हैं। इसके बारे में बात की जाएगी।
डॉ. एसबी कंबोज, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा।