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स्कूल पर जड़ा ताला
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:23 PM IST
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स्कूल पर ताला जड़, शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। राजकीय हाई स्कूल गांव बागडू कलां के विद्यार्थियों ने अध्यापकों की कमी के चलते बुधवार को स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं कुछ कक्षाओं के छात्र अध्यापकों की मांग को लेकर सरपंच के मकान के सामने भी धरना दिया। सूचना पाकर कार्यकारी बीइओ डॉ. नरेश वर्मा व तहसीलदार रोशन लाल मौके पर पहुंचे। तहसीलदार व बीइओ ने बच्चों को समझाया गया। इसके करीब चार घंटे के बाद स्कूल का ताला खोला जा सका। स्कूल की छात्राओं ने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, दूसरी तरफ बेटियों को पढ़ाने की व्यवस्था भी पूरी नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि दो दिन के बाद उनकी परीक्षाएं शुरू हो रही है। बिना अध्यापकों के उनकी कोई तैयारियां भी नहीं हो पाई है। सरकार को स्कूलों में अध्यापकों की संख्या को बढ़ाकर शिक्षा का माहौल देने की पहल करनी चाहिए। उनके स्कूल मेें अंग्रेजी, गणित, हिंदी, साईस विषयों के अध्यापकों समेत मुख्याध्यापक भी मौजूद नहीं है। ऐसे में वे कैसे पढ़े और कैसे आगे बढ़। छात्राओं के साथ ग्रामीणों ने सरपंच पर काम न करने, स्कूल की सुध न लेने के आरोप लगाए गए। गांव के लोगों का रवैया देख अधिकारियों ने बच्चों को समझाबूझाकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कही।
बीइओ डॉ. नरेश वर्मा ने बताया कि स्कूल में ड्राइंग, संस्कृत व पीटीआई नियमित अध्यापक है और दो अध्यापक गेस्ट टीचर मौजूद है। जबकि विभाग नुसार हिंदी व संस्कृत विषय को एक ही अध्यापक पढ़ा सकता है। स्कूल में तत्काल दो नियमित अध्यापकों को स्कूल में लगाया गया है। जिन विषयों के अध्यापक नहीं है इस विषय पर वीरवार को जिला शिक्षा अधिकारी जींद ने खंड सफीदों के सभी राजकीय स्कूलों के हैड टीचरों की बैठक भी बुलाई है।
गांव बांगडू खुर्द के सरपंच सुंदर सिंह ने कहा कि उन्हेें स्कूल में अध्यापकों की कमी के बारे में जानकारी नहीं थी। इससे बच्चें आवेश मेें आ गए और कुछ लोगों के बहकावे में आकर नारेबाजी। बच्चों को इसके बारे में पहले बताया जाना चाहिए था, ताकि अध्यापकों की व्यवस्था की जा सके। इस प्रकार से तालाबंदी करने से माहौल खराब होता है।
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तहसीलदार रोशनलाल ने कहा कि उनके द्वारा बीइओ को निर्देश दिए है कि गांव के ऐसे लोगों को चिहिंत किया जाए। जो बच्चों को मोहरा बनाकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे है। ऐसे लोग किसी समाज के लिए अच्छे नहीं हो सकते है। पढ़ने वाले बच्चों को गांव की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बच्चों को जबरदस्ती आक्रोशित कर गांव का माहौल खराब किया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। राजकीय हाई स्कूल गांव बागडू कलां के विद्यार्थियों ने अध्यापकों की कमी के चलते बुधवार को स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं कुछ कक्षाओं के छात्र अध्यापकों की मांग को लेकर सरपंच के मकान के सामने भी धरना दिया। सूचना पाकर कार्यकारी बीइओ डॉ. नरेश वर्मा व तहसीलदार रोशन लाल मौके पर पहुंचे। तहसीलदार व बीइओ ने बच्चों को समझाया गया। इसके करीब चार घंटे के बाद स्कूल का ताला खोला जा सका। स्कूल की छात्राओं ने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, दूसरी तरफ बेटियों को पढ़ाने की व्यवस्था भी पूरी नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि दो दिन के बाद उनकी परीक्षाएं शुरू हो रही है। बिना अध्यापकों के उनकी कोई तैयारियां भी नहीं हो पाई है। सरकार को स्कूलों में अध्यापकों की संख्या को बढ़ाकर शिक्षा का माहौल देने की पहल करनी चाहिए। उनके स्कूल मेें अंग्रेजी, गणित, हिंदी, साईस विषयों के अध्यापकों समेत मुख्याध्यापक भी मौजूद नहीं है। ऐसे में वे कैसे पढ़े और कैसे आगे बढ़। छात्राओं के साथ ग्रामीणों ने सरपंच पर काम न करने, स्कूल की सुध न लेने के आरोप लगाए गए। गांव के लोगों का रवैया देख अधिकारियों ने बच्चों को समझाबूझाकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कही।
बीइओ डॉ. नरेश वर्मा ने बताया कि स्कूल में ड्राइंग, संस्कृत व पीटीआई नियमित अध्यापक है और दो अध्यापक गेस्ट टीचर मौजूद है। जबकि विभाग नुसार हिंदी व संस्कृत विषय को एक ही अध्यापक पढ़ा सकता है। स्कूल में तत्काल दो नियमित अध्यापकों को स्कूल में लगाया गया है। जिन विषयों के अध्यापक नहीं है इस विषय पर वीरवार को जिला शिक्षा अधिकारी जींद ने खंड सफीदों के सभी राजकीय स्कूलों के हैड टीचरों की बैठक भी बुलाई है।
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गांव बांगडू खुर्द के सरपंच सुंदर सिंह ने कहा कि उन्हेें स्कूल में अध्यापकों की कमी के बारे में जानकारी नहीं थी। इससे बच्चें आवेश मेें आ गए और कुछ लोगों के बहकावे में आकर नारेबाजी। बच्चों को इसके बारे में पहले बताया जाना चाहिए था, ताकि अध्यापकों की व्यवस्था की जा सके। इस प्रकार से तालाबंदी करने से माहौल खराब होता है।
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तहसीलदार रोशनलाल ने कहा कि उनके द्वारा बीइओ को निर्देश दिए है कि गांव के ऐसे लोगों को चिहिंत किया जाए। जो बच्चों को मोहरा बनाकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे है। ऐसे लोग किसी समाज के लिए अच्छे नहीं हो सकते है। पढ़ने वाले बच्चों को गांव की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बच्चों को जबरदस्ती आक्रोशित कर गांव का माहौल खराब किया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।