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माय सिटी प्रथम पेज के टॉप बॉक्स के लिए प्रस्तावित
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:55 AM IST
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म्हारी कीट मास्टरनियां वैज्ञानिकों के साथ जहर मुक्त खेती पर करेंगी बहस
26 जुलाई को दिल्ली में होने वाले गोलमेज सम्मेलन के लिए भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद ने भेजा निमंत्रण
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
कीटनाशक रही खेती के लिए देश-विदेश में अपनी खास पहचान बनाने वाली निडाना गांव की कीट मास्टनरनियों की मेहनत का लोहा अब हर कोई मानने लगा है। दस साल पहले निडाना गांव में शुरू की गई जहर मुक्त थाली का अभियान अब देश में फैल रहा है। इसको लेकर अब भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद ने कीट मास्टरनियों को 26 जुलाई को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में होने वाले हरित ग्राम विकास में महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में निमंत्रण भेजा है। अब निडाना गांव की यह कीट मास्टरनियां दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश भर के किसानों के साथ कीट ज्ञान सांझा करेंगी।
यह है जहर मुक्त थाली का परिदृश्य
निडाना गांव में करीब दस साल पहले कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र दलाल ने ग्रामीणों के साथ मिल कर कीटनाशक रहित खेती का अभियान चलाया। जिला के कई गांवों निडाना, ललितखेड़ा, निडानी, ईगराह, रूपगढ़ के अलावा, बुआना, बीबीपुर के अलावा बरलवा के गांवों और पंजाब में यह अभियान फिलहाल जोर पकड़ रहा है। इसके तहत फिलहाल सिर्फ कपास की फसल पर भी प्रयोग चल रहे हैं, जिसे राष्ट्रीय कृषि आयोग भी स्वीकार कर चुका है। अभियान में किसान फसल पर किसी भी कीटनाशक दवा का छिड़काव नहीं करते। यह किसान अपने खेत में नियमित रूप से कीटों की संख्या की जांच करते हैं। इसमें इन किसानों को पता है कि कौन सा कीट फसल को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। इसके हिसाब से फसल का रखरखाव किया जाता है।
मिलीबग की मार से बची हैं फसल
इस अभियान से जुड़े किसानों ने बिना कीटनाशकों के ही मिलीबग जैसी भयंकर महामारी में भी कपास की फसल में बेहतर उत्पादन लिया है। मिलीबग से हुए नुकसान के आंकलन के दौरान ललितखेड़ा गांव में जांच अधिकारी इसकी पुष्टी कर चुके हैं।
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अमर उजाला फांउडेशन ने की मदद
निडाना गांव की महिलाओं द्वारा चलाई जा रही मुहिम को अमर उजाला फाउंडेशन ने भी मदद दी। इसके तहत फसल पर कीटों की जांच के लिए उपकरण मुहैया करवाने के लिए अलावा महिला कीटाचार्यों का हौसला भी बढ़ाया गया। बरवाला में किसानों ने कीट साक्षरता पाठशाला चलाने का आह्वान किया। इस पर अमर उजाला फाउंडेशन ने बरवाला में भी अपने खर्च पर ही कीट साक्षरता पाठशाला चलाई।
डॉ. दलाल की सोच की सफलता
दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम का निमंत्रण मिला है। यह दस साल पहले डॉ. सुरेंद्र दलाल द्वारा शुरू की गई मुहिम और उनकी सोच की सफलता है कि गांव की साधारण महिला किसानों को इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजनों में बुलाया जा रहा है।
सविता, कीटाचार्य, निडाना।
फोटो नंबर
21जेएनडी24: कपास की फसल पर कीटों की जानकारी जुटाती निडाना गांव की महिला कीटाचार्य। फाइल फोटो।
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26 जुलाई को दिल्ली में होने वाले गोलमेज सम्मेलन के लिए भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद ने भेजा निमंत्रण
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
कीटनाशक रही खेती के लिए देश-विदेश में अपनी खास पहचान बनाने वाली निडाना गांव की कीट मास्टनरनियों की मेहनत का लोहा अब हर कोई मानने लगा है। दस साल पहले निडाना गांव में शुरू की गई जहर मुक्त थाली का अभियान अब देश में फैल रहा है। इसको लेकर अब भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद ने कीट मास्टरनियों को 26 जुलाई को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में होने वाले हरित ग्राम विकास में महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में निमंत्रण भेजा है। अब निडाना गांव की यह कीट मास्टरनियां दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश भर के किसानों के साथ कीट ज्ञान सांझा करेंगी।
यह है जहर मुक्त थाली का परिदृश्य
निडाना गांव में करीब दस साल पहले कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र दलाल ने ग्रामीणों के साथ मिल कर कीटनाशक रहित खेती का अभियान चलाया। जिला के कई गांवों निडाना, ललितखेड़ा, निडानी, ईगराह, रूपगढ़ के अलावा, बुआना, बीबीपुर के अलावा बरलवा के गांवों और पंजाब में यह अभियान फिलहाल जोर पकड़ रहा है। इसके तहत फिलहाल सिर्फ कपास की फसल पर भी प्रयोग चल रहे हैं, जिसे राष्ट्रीय कृषि आयोग भी स्वीकार कर चुका है। अभियान में किसान फसल पर किसी भी कीटनाशक दवा का छिड़काव नहीं करते। यह किसान अपने खेत में नियमित रूप से कीटों की संख्या की जांच करते हैं। इसमें इन किसानों को पता है कि कौन सा कीट फसल को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। इसके हिसाब से फसल का रखरखाव किया जाता है।
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मिलीबग की मार से बची हैं फसल
इस अभियान से जुड़े किसानों ने बिना कीटनाशकों के ही मिलीबग जैसी भयंकर महामारी में भी कपास की फसल में बेहतर उत्पादन लिया है। मिलीबग से हुए नुकसान के आंकलन के दौरान ललितखेड़ा गांव में जांच अधिकारी इसकी पुष्टी कर चुके हैं।
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अमर उजाला फांउडेशन ने की मदद
निडाना गांव की महिलाओं द्वारा चलाई जा रही मुहिम को अमर उजाला फाउंडेशन ने भी मदद दी। इसके तहत फसल पर कीटों की जांच के लिए उपकरण मुहैया करवाने के लिए अलावा महिला कीटाचार्यों का हौसला भी बढ़ाया गया। बरवाला में किसानों ने कीट साक्षरता पाठशाला चलाने का आह्वान किया। इस पर अमर उजाला फाउंडेशन ने बरवाला में भी अपने खर्च पर ही कीट साक्षरता पाठशाला चलाई।
डॉ. दलाल की सोच की सफलता
दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम का निमंत्रण मिला है। यह दस साल पहले डॉ. सुरेंद्र दलाल द्वारा शुरू की गई मुहिम और उनकी सोच की सफलता है कि गांव की साधारण महिला किसानों को इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजनों में बुलाया जा रहा है।
सविता, कीटाचार्य, निडाना।
फोटो नंबर
21जेएनडी24: कपास की फसल पर कीटों की जानकारी जुटाती निडाना गांव की महिला कीटाचार्य। फाइल फोटो।