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ट्रांस्पोर्तटर्स की हड़ताल शुरू, जींद में पांच हजार ट्रकों के पहिये रूके
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:33 PM IST
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ट्रकों के थमे पहिए, पहले दिन दो करोड़ का घाटा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शुक्रवार से शुरू हुई ट्रांस्पोर्टरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण जींद में करीब पांच हजार ट्रकों के पहिये थम गए हैं। हालांकि अभी जींद आने वाले माल में कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां से जाने वाले सामान पर असर दिखने लगा है। जींद से जाने वाली मुर्राह नस्ल की भैंसों के व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ा है।
जींद में बाहर से प्रतिदिन फलों-सब्जियों के अलावा किराना का सामान दिल्ली, सहित साउथ लाइन से आता है। वहीं जींद की ट्रांसपोर्ट से तमाम तरह का सामान गुवाहाटी की ओर भेजा जाता है। जींद में कोई बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण यहां से जाने वाले माल पर अधिक असर नहीं पड़ा है, लेकिन जींद से आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र में जाने वाली भैंसों का काम प्रभावित हुआ है। वहीं साउथ लाइन से आते हुए जींद की गाड़ियां फल, बिनौला व लोहा लेकर आते हैं। आने वाले दिनों में इन सब पर भी असर दिख सकता है। इससे करीब दो करोड़ रुपये का काम प्रतिदिन प्रभावित होगा। दी जींद ट्रक यूनियन के प्रधान नरेश कुमार पोकरीखेड़ी ने बताया कि वीरवार से ही अग्रिम बुकिंग लेनी बंद कर दी थी।
एक करोड़ की भैंस होती हैं लोड
जींद मुर्रहा नस्ल की भैंसों का अच्छा केंद्र है। यहां से आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र में प्रतिदिन करीब 100 भैंस जाती हैं। इसके लिए दस से 12 ट्रकों की जरूरत होती है। आंध्र प्रदेश के लिए 80 से 90 हजार रुपये किराया लिया जाता है, जबकि महाराष्ट्र के लिए 60 से 70 हजार रुपये किराया लिया जाता है। भैंस व्यापारी जोगेंद्र सिंह के अनुसार ट्रकों की हड़ताल से काफी नुकसान होगा। फिलहाल भैंसों की आंध्र प्रदेश में काफी मांग है, लेकिन पहुंचा नहीं पाएंगे। वहीं सब्जी व्यापारी प्रेम कुमार के अनुसार सब्जियां छोटी गाड़ियों से आती हैं। इस पर इतना असर नहीं पड़ेगा। हां बाहर से आने वाले फलों जैसे केला, पपीता, आम पर असर पड़ सकता है।
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खड़ी गाड़ी का भरना पड़ेगा टैक्स
ट्रकों की हड़ताल से ट्रक ऑपरेटरों पर काफी बोझ पड़ेगा। हर गाड़ी का प्रतिदिन करीब 1200 से 1300 रुपये टैक्स बनता है, जो देना पड़ता है। इसके अलावा जिला की पांच हजार गाड़ियों पर करीब 15 हजार लोग निर्भर हैं। ऑपरेटरों को हड़ताल के बावजूद स्टाफ को वेतन देना पड़ेगा। इससे काफी नुकसान होगा। प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये का काम प्रभावित होगा।
नरेश कुमार पोकरीखेड़ी, प्रधान दी जींद ट्रक यूनियन।
करियाणा, फलों व सब्जियों पर पड़ेगा असर
जींद में प्रतिदिन 10 ट्रक करियाणा व मसाला, 10 ट्रक लोह उत्पाद, 10 ट्रक मशीनरी, 5 ट्रक साबुन व डिटरजेंट, 25 ट्रक इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्रिक उत्पाद, 20 फल व सब्जियां आती हैं।
फिलहाल नहीं है माल की कमी
शुक्रवार से ट्रकों की हड़ताल हुई है। कुछ व्यापारियों ने तो पहले से ही तैयारी कर रही थी। ऐसे में अभी माल की कमी नहीं है। सोमवार-मंगलवार को इसका असर दिख सकता है।
श्रीनिवास, किराना व्यापारी
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शुक्रवार से शुरू हुई ट्रांस्पोर्टरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण जींद में करीब पांच हजार ट्रकों के पहिये थम गए हैं। हालांकि अभी जींद आने वाले माल में कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां से जाने वाले सामान पर असर दिखने लगा है। जींद से जाने वाली मुर्राह नस्ल की भैंसों के व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ा है।
जींद में बाहर से प्रतिदिन फलों-सब्जियों के अलावा किराना का सामान दिल्ली, सहित साउथ लाइन से आता है। वहीं जींद की ट्रांसपोर्ट से तमाम तरह का सामान गुवाहाटी की ओर भेजा जाता है। जींद में कोई बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण यहां से जाने वाले माल पर अधिक असर नहीं पड़ा है, लेकिन जींद से आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र में जाने वाली भैंसों का काम प्रभावित हुआ है। वहीं साउथ लाइन से आते हुए जींद की गाड़ियां फल, बिनौला व लोहा लेकर आते हैं। आने वाले दिनों में इन सब पर भी असर दिख सकता है। इससे करीब दो करोड़ रुपये का काम प्रतिदिन प्रभावित होगा। दी जींद ट्रक यूनियन के प्रधान नरेश कुमार पोकरीखेड़ी ने बताया कि वीरवार से ही अग्रिम बुकिंग लेनी बंद कर दी थी।
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एक करोड़ की भैंस होती हैं लोड
जींद मुर्रहा नस्ल की भैंसों का अच्छा केंद्र है। यहां से आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र में प्रतिदिन करीब 100 भैंस जाती हैं। इसके लिए दस से 12 ट्रकों की जरूरत होती है। आंध्र प्रदेश के लिए 80 से 90 हजार रुपये किराया लिया जाता है, जबकि महाराष्ट्र के लिए 60 से 70 हजार रुपये किराया लिया जाता है। भैंस व्यापारी जोगेंद्र सिंह के अनुसार ट्रकों की हड़ताल से काफी नुकसान होगा। फिलहाल भैंसों की आंध्र प्रदेश में काफी मांग है, लेकिन पहुंचा नहीं पाएंगे। वहीं सब्जी व्यापारी प्रेम कुमार के अनुसार सब्जियां छोटी गाड़ियों से आती हैं। इस पर इतना असर नहीं पड़ेगा। हां बाहर से आने वाले फलों जैसे केला, पपीता, आम पर असर पड़ सकता है।
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खड़ी गाड़ी का भरना पड़ेगा टैक्स
ट्रकों की हड़ताल से ट्रक ऑपरेटरों पर काफी बोझ पड़ेगा। हर गाड़ी का प्रतिदिन करीब 1200 से 1300 रुपये टैक्स बनता है, जो देना पड़ता है। इसके अलावा जिला की पांच हजार गाड़ियों पर करीब 15 हजार लोग निर्भर हैं। ऑपरेटरों को हड़ताल के बावजूद स्टाफ को वेतन देना पड़ेगा। इससे काफी नुकसान होगा। प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये का काम प्रभावित होगा।
नरेश कुमार पोकरीखेड़ी, प्रधान दी जींद ट्रक यूनियन।
करियाणा, फलों व सब्जियों पर पड़ेगा असर
जींद में प्रतिदिन 10 ट्रक करियाणा व मसाला, 10 ट्रक लोह उत्पाद, 10 ट्रक मशीनरी, 5 ट्रक साबुन व डिटरजेंट, 25 ट्रक इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्रिक उत्पाद, 20 फल व सब्जियां आती हैं।
फिलहाल नहीं है माल की कमी
शुक्रवार से ट्रकों की हड़ताल हुई है। कुछ व्यापारियों ने तो पहले से ही तैयारी कर रही थी। ऐसे में अभी माल की कमी नहीं है। सोमवार-मंगलवार को इसका असर दिख सकता है।
श्रीनिवास, किराना व्यापारी