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Jhajjar-Bahadurgarh News: चिंताजनक... तंबाकू सेवन दे रहा मुंह का कैंसर, रोज 60 नए रोगी मिल रहे
Fri, 31 May 2024 05:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 31 May 2024 05:23 AM IST
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बादली (झज्जर)। बाढ़सा नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनसीआई) में पुरुषों के मुंह के कैंसर संबंधी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यहां प्रतिदिन 60 नए कैंसर रोगियों का पंजीकरण हो रहा है, जबकि ओपीडी की संख्या 500 से पार पहुंच रही है। नए रोगियों में मुंह संबंधी रोगियों की संख्या ज्यादा होती है।
हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोगों को तंबाकू से दूर और परहेज के लिए जागरूक किया जाता है। तंबाकू के सेवन से जुड़ी सभी बीमारियों जैसे हृदय संबंधी रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अन्य में से मुंह (ओरल) कैंसर सबसे आम है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान की एक रिपोर्ट के अनुसार साल में तीन लाख से ज्यादा कैंसर के रोगियों का संबंध तंबाकू से होता है, जोकि चिंका का विषय है।
प्रतिदिन 20 रोगियों के हो रहे ऑपरेशन कुछ समय पहले मुंह के कैंसर संबंधी रोगियों को अत्याधुनिक लीनियर एक्सेलेरेटर में एक सप्ताह में करीब एक हजार विकिरण दिए गए थे। वर्तमान में प्रतिदिन 20 ऐसे रोगियों के ऑपरेशन और एंडोस्कोपी की जा रही है, जो कि मुहं के कैंसर से पीड़ित हैं।
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तंबाकू से कैसे पनपता है कैंसर
भारत में मुंह के कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू है। गुटखा, क्विड, सूंघने या अन्य किसी भी रूप में तंबाकू मुंह में रखने या धूम्रपान की आदत भी उतनी ही खतरनाक है। पहले लोग इस ओर ध्यान ही नहीं देते, लेकिन जब मर्ज बढ़ जाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अधिकतर लोग तंबाकू युक्त गुटखा मुंह में या दांतों और गाल के बीच में दबाकर रखते हैं। उन्हें यहीं पर कैंसर हो जाता है। तंबाकू के प्रयोग की अवधि उसकी मात्रा के अनुपात में जोखिम बढ़ जाता है।
वर्जन-
बाढ़सा स्थापित कैंसर संस्थान देश में रोगियों का इलाज करने में कारगर साबित हो रहा है। इलाज ही नहीं, यहां नए अनुसंधान से नई तकनीक से मरीजों का इलाज किया जाता है। आने वाले समय में संस्थान में नई एवं आधुनिक तकनीकियों पर काम किया जाएगा।
-डॉ. आलोक ठाकर, एनसीआई प्रमुख बाढ़सा।
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हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोगों को तंबाकू से दूर और परहेज के लिए जागरूक किया जाता है। तंबाकू के सेवन से जुड़ी सभी बीमारियों जैसे हृदय संबंधी रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अन्य में से मुंह (ओरल) कैंसर सबसे आम है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान की एक रिपोर्ट के अनुसार साल में तीन लाख से ज्यादा कैंसर के रोगियों का संबंध तंबाकू से होता है, जोकि चिंका का विषय है।
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प्रतिदिन 20 रोगियों के हो रहे ऑपरेशन कुछ समय पहले मुंह के कैंसर संबंधी रोगियों को अत्याधुनिक लीनियर एक्सेलेरेटर में एक सप्ताह में करीब एक हजार विकिरण दिए गए थे। वर्तमान में प्रतिदिन 20 ऐसे रोगियों के ऑपरेशन और एंडोस्कोपी की जा रही है, जो कि मुहं के कैंसर से पीड़ित हैं।
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तंबाकू से कैसे पनपता है कैंसर
भारत में मुंह के कैंसर का मुख्य कारण तंबाकू है। गुटखा, क्विड, सूंघने या अन्य किसी भी रूप में तंबाकू मुंह में रखने या धूम्रपान की आदत भी उतनी ही खतरनाक है। पहले लोग इस ओर ध्यान ही नहीं देते, लेकिन जब मर्ज बढ़ जाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अधिकतर लोग तंबाकू युक्त गुटखा मुंह में या दांतों और गाल के बीच में दबाकर रखते हैं। उन्हें यहीं पर कैंसर हो जाता है। तंबाकू के प्रयोग की अवधि उसकी मात्रा के अनुपात में जोखिम बढ़ जाता है।
वर्जन-
बाढ़सा स्थापित कैंसर संस्थान देश में रोगियों का इलाज करने में कारगर साबित हो रहा है। इलाज ही नहीं, यहां नए अनुसंधान से नई तकनीक से मरीजों का इलाज किया जाता है। आने वाले समय में संस्थान में नई एवं आधुनिक तकनीकियों पर काम किया जाएगा।
-डॉ. आलोक ठाकर, एनसीआई प्रमुख बाढ़सा।