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महिलाओं को खुद मांगना होगा हक, तभी मिलेगी आजादी : भारती
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20jjrp05- अमर उजाला की तरफ से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करती सखी सेंटर की कानूनी सल
झज्जर। वन स्टॉप सेंटर की कानूनी सलाहकार भारती ने कहा कि महिलाओं को खुद आगे बढ़कर अपना हक मांगना पड़ेगा, तभी उन्हें सामाजिक रूप से आजादी मिलेगी। समाज में आज भी महिलाओं को पुरुषों से कमतर आंका जाता है जबकि वह हर फील्ड में पुरुषों के बराबर हैं। कहीं-कहीं तो उनसे आगे भी निकल रही हैं।
वह शुक्रवार को पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र में अमर उजाला की तरफ से आयोजित अपराजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद को पुरुषों के बराबर समझें। शुरुआत से ही घर का माहौल ऐसा बनाएं जिसमें लड़का और लड़का एक समान काम करें।
उन्हें सिखाएं कि जो काम लड़का कर सकता है, वह लड़की भी कर सकती है। बिना किसी भेदभाव के दोनों बच्चों से घर के काम करवाने चाहिए ताकि भविष्य में सामाजिक रूप से उनको दिक्कत नहीं आए। वह आगे समाज में जाकर लड़का-लड़की के रूप में भेदभाव नहीं करेंगे।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी लड़कियों को ज्यादा पढ़ने नहीं दिया जाता। नौकरी करने बाहर नहीं जाने दिया जाता। यह बंदिशें केवल महिलाएं ही तोड़ सकती हैं। महिलाओं को अपने हक की लड़ाई जरूर लड़नी चाहिए। इस अवसर पर निदेशक उमेश भुकर गोरिया, आशीष रोहिल्ला, सतपाल, शशि मौजूद रहे।
धैर्य के साथ लड़ें अपनी लड़ाई
भारती ने कहा कि महिलाओं से हिंसा के केस आते हैं। उनको लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, इसलिए धैर्य रखना चाहिए। कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी महिलाओं को सुविधाएं प्रदान की जाती है। सखी केंद्र में उनको आश्रय भी प्रदान किया जाता है। ट्रेनर रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं को भी कई प्रकार के हक दिए गए हैं जिनका प्रयोग सच्ची लड़ाई लड़ने के लिए करना चाहिए। जब महिलाओं को कानूनी रूप से लड़ाई में न्याय मिल जाता है तो सामाजिक रूप से उनको स्वीकार नहीं किया जाता। इस सोच को बदलने की जरूरत है। एआई के जमाने पर महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की भी जरूरत है।
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वह शुक्रवार को पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र में अमर उजाला की तरफ से आयोजित अपराजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद को पुरुषों के बराबर समझें। शुरुआत से ही घर का माहौल ऐसा बनाएं जिसमें लड़का और लड़का एक समान काम करें।
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उन्हें सिखाएं कि जो काम लड़का कर सकता है, वह लड़की भी कर सकती है। बिना किसी भेदभाव के दोनों बच्चों से घर के काम करवाने चाहिए ताकि भविष्य में सामाजिक रूप से उनको दिक्कत नहीं आए। वह आगे समाज में जाकर लड़का-लड़की के रूप में भेदभाव नहीं करेंगे।
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उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी लड़कियों को ज्यादा पढ़ने नहीं दिया जाता। नौकरी करने बाहर नहीं जाने दिया जाता। यह बंदिशें केवल महिलाएं ही तोड़ सकती हैं। महिलाओं को अपने हक की लड़ाई जरूर लड़नी चाहिए। इस अवसर पर निदेशक उमेश भुकर गोरिया, आशीष रोहिल्ला, सतपाल, शशि मौजूद रहे।
धैर्य के साथ लड़ें अपनी लड़ाई
भारती ने कहा कि महिलाओं से हिंसा के केस आते हैं। उनको लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, इसलिए धैर्य रखना चाहिए। कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी महिलाओं को सुविधाएं प्रदान की जाती है। सखी केंद्र में उनको आश्रय भी प्रदान किया जाता है। ट्रेनर रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं को भी कई प्रकार के हक दिए गए हैं जिनका प्रयोग सच्ची लड़ाई लड़ने के लिए करना चाहिए। जब महिलाओं को कानूनी रूप से लड़ाई में न्याय मिल जाता है तो सामाजिक रूप से उनको स्वीकार नहीं किया जाता। इस सोच को बदलने की जरूरत है। एआई के जमाने पर महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की भी जरूरत है।

20jjrp05- अमर उजाला की तरफ से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करती सखी सेंटर की कानूनी सल