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Jhajjar-Bahadurgarh News: दफ्तरों में करेंगे हिंदी में काम, और बढ़ेगा अपनी मातृभाषा का मान

Thu, 14 Sep 2023 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Thu, 14 Sep 2023 01:32 AM IST
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Will work in Hindi in offices, and the value of our mother tongue will increase
झज्जर। हिंदी हमारी मातृभाषा है। हर साल देश में हिंदी को बढ़ावा देने की वकालत होती है। सरकारी दफ्तरों में हिंदी में काम करने की बातें होती हैं लेकिन अभी भी हिंदी को अपेक्षा के अनुसार बढ़ावा नहीं मिल रहा। शिक्षा विद और प्रबुद्धजनों का कहना है कि भाषा हमें सुदृढ़ और स्वाभिमानी बनाती है। इसे जितना बढावा देंगें मातृभाषा का मान और अधिक बढ़ेगा। सरकारों को चाहिए की हिंदी भाषा को 12वीं कक्षा तक अनिवार्य विषय के रूप में ही लिया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को हिंदी के प्रति लगाव हो और उसका ज्ञानवर्धन हो।
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हिंदी भाषा को लेकर प्रतिक्रियाए:
हिंदी अब अंतरराष्ट्रीय भाषा बन चुकी है। तकनीक की दृष्टि से भी यह अनुकूल भाषा है। हिंदी में ज्ञान का अपार भंडार उपलब्ध है। हिंदी में लिखना और बोलना बहुत सहज है क्योंकि यह हमारी भावनाओं से जुड़ी है। अपनी मातृभाषा का सम्मान करना हम सबका कर्त्तव्य है। हिंदी को वास्तविक सम्मान तभी मिल सकता है, जब हम सब हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लें। भारत को राष्ट्रीयता के सूत्र में पिरोने के लिए हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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डॉ. दलबीर सिंह,प्राचार्य
भाषा हमें सुदृढ़ और स्वाभिमानी बनाती है। भाषा के माध्यम से ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। हिंदी ही हमारे देश को सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से जोड़ती है। यह देश को एक सूत्र में जोड़ने वाली भाषा है। विदेशों में भी इसका अध्ययन अध्यापन हो रहा है। सशक्त राष्ट्रीयता के निर्माण के लिए मातृभाषा का मजबूत होना जरूरी है।
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-डॉ. सुरजीत सिंह, हिंदी प्राध्यापक
हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा, राजभाषा, मातृभाषा का दर्जा मिल चुका है।आजादी के इतने वर्षों बाद भी हम विदेशी भाषा से चिपके हैं।अपने ही देश में स्व-भाषा इतनी उपेक्षित क्यों लग रही है। क्यों इस दिवस मनाया जा रहा है। क्योंकि हिंदी दिवस के माध्यम से अपनी भाषा को अपने देशवासियों को अपनाने के लिए समझाया जा सकता है।
डॉ. पूनम रानी,सहायक प्राध्यापिका, हिंदी
अदालत में हिंदी में काम करने के लिए पत्र भी था। काफी अधिवक्ता हिंदी में अदालती काम कर रहें है। हमें अपनी मातृ भाषा का मान- सम्मान करना चाहिए ओर हिंदी में काम करने के लिए आमजन, कर्मचारियों व अधिकारियों को प्रोत्साहित करना होगा।

अजीत सिंह सौंलकी, प्रधान जिला बार एसोसिएशन
संस्कृति एवं संस्कारों के अनुरूप नई शिक्षा नीति महसूस की जा रही थी, जिसमें भारतीय भाषाओं और विशेषत: हिंदी भाषा को महत्व मिल सके। देश की एकता एवं अखंडता के लिए राष्ट्रभाषा का विकास होना जरूरी है। जिस भाषा को कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक संपूर्ण भारत में समझा जाता है। उसकी उपेक्षा हो रही है, हिंदी हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
डॉ प्रवीण खुराना, प्राध्यापक हिंदी, झज्जर।
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