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Jhajjar-Bahadurgarh News: ये कैसा रेलवे स्टेशन...शौचालयों पर लटके ताले, टोंटियों में पानी तक नहीं
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09jjrp08- रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग शौचालय पर लटका ताला। संवाद
झज्जर। 14 साल बाद भी झज्जर रेलवे स्टेशन मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। स्टेशन पर ना तो बैठने की व्यवस्था है ना ही पीने के पानी की सुविधा। नाममात्र की ट्रेनें चलती हैं।
रेलवे स्टेशन पर एक पुरुष, एक दिव्यांग और एक महिलाओं के लिए शौचालयों का निर्माण तो किया गया लेकिन तीनों पर ताले लटके हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशानी होती है। यदि किसी को शौच जाना होता है तो आसपास के खेतों में ही जाना पड़ता है।
रेलवे स्टेशन पर पेयजल के लिए कई टोंटी तो लगी हैं लेकिन उनमें पानी ही नहीं आता है। स्टेशन पर पानी पीने के लिए सिर्फ एक आरओ सिस्टम लगा है। इस कारण यहां भीड़ लग जाती है और यात्रियों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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रेलवे स्टेशन परिसर में दीवारें टूटी पड़ी हैं। स्टेशन प्लेटफार्म पर लगे शेड और टिकट काउंटर तक आने वाली सीढ़ियां भी खराब हालत में हैं। टिकट काउंटर के सामने बने बैंच की हालत भी ठीक नहीं है।
रिजर्वेशन काउंटर बंद
रेलवे ने कम आमदनी के चलते यहां के रिजर्वेशन काउंटर बंद हैं। ऐसे में यात्रियों को रोहतक, बहादुरगढ़ जाना पड़ता है या फिर ऑनलाइन ही रिजर्वेशन करवाना पड़ता है। यात्री रिजर्वेशन काउंटर दोबारा चालू करने की मांग कर चुके हैं।
शाम हो जाते छा जाता है अंधेरा
रेलवे स्टेशन परिसर में लगी लाइटें भी खराब पड़ी हैं। शाम होते ही स्टेशन परिसर से बाहर मुख्य रोड पर अंधेरा छा जाता है। रेलवे स्टेशन की तरफ आने-जाने वाले दोनों मार्गों पर एक भी लाइट भी नहीं लगी है। यदि किसी का ऑटो निकल जाता है तो उसे एक से दो किलोमीटर तक अंधेरे में पैदल जाना पड़ता है। ऐसे में यात्रियों को अनहोनी होने का भी खतरा बना रहता है।
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रेलवे स्टेशन पर एक पुरुष, एक दिव्यांग और एक महिलाओं के लिए शौचालयों का निर्माण तो किया गया लेकिन तीनों पर ताले लटके हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशानी होती है। यदि किसी को शौच जाना होता है तो आसपास के खेतों में ही जाना पड़ता है।
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रेलवे स्टेशन पर पेयजल के लिए कई टोंटी तो लगी हैं लेकिन उनमें पानी ही नहीं आता है। स्टेशन पर पानी पीने के लिए सिर्फ एक आरओ सिस्टम लगा है। इस कारण यहां भीड़ लग जाती है और यात्रियों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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रेलवे स्टेशन परिसर में दीवारें टूटी पड़ी हैं। स्टेशन प्लेटफार्म पर लगे शेड और टिकट काउंटर तक आने वाली सीढ़ियां भी खराब हालत में हैं। टिकट काउंटर के सामने बने बैंच की हालत भी ठीक नहीं है।
रिजर्वेशन काउंटर बंद
रेलवे ने कम आमदनी के चलते यहां के रिजर्वेशन काउंटर बंद हैं। ऐसे में यात्रियों को रोहतक, बहादुरगढ़ जाना पड़ता है या फिर ऑनलाइन ही रिजर्वेशन करवाना पड़ता है। यात्री रिजर्वेशन काउंटर दोबारा चालू करने की मांग कर चुके हैं।
शाम हो जाते छा जाता है अंधेरा
रेलवे स्टेशन परिसर में लगी लाइटें भी खराब पड़ी हैं। शाम होते ही स्टेशन परिसर से बाहर मुख्य रोड पर अंधेरा छा जाता है। रेलवे स्टेशन की तरफ आने-जाने वाले दोनों मार्गों पर एक भी लाइट भी नहीं लगी है। यदि किसी का ऑटो निकल जाता है तो उसे एक से दो किलोमीटर तक अंधेरे में पैदल जाना पड़ता है। ऐसे में यात्रियों को अनहोनी होने का भी खतरा बना रहता है।

09jjrp08- रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग शौचालय पर लटका ताला। संवाद