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Jhajjar-Bahadurgarh News: देवउठनी एकादशी के बाद शुरू होंगे शादी समारोह
Sat, 01 Nov 2025 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 01 Nov 2025 01:57 AM IST
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-फोटो 64 : प्रवीण शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
- फोटो : samvad
बहादुरगढ़। कार्तिक शुक्ल एकादशी देवउठनी एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस साल 2 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इस दिन से ही चार्तुमास का समापन होगा और शादी समेत मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। देवउठनी एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में तुलसी विवाह का आयोजन कराया जाता है।
उदयातिथि के आधार पर देवउठनी एकादशी का व्रत 2 नवंबर के दिन रखा जाएगा। देवउठनी एकादशी के दिन व्रती भगवान विष्णु की पूजा सुबह 6:42 बजे से 7:52 बजे तक कर सकते हैं। त्रिस्पर्श और रवि योग में पूजा करना और भी फलदायी होगा। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 बजे से 5:49 मिनट तक रहेगा।
घी का दीपक जलाने से आती है समृद्धि
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए और पूजा-पाठ के बाद पूरे घर-आंगन, छत और मुख्य द्वार पर दीया जरूर रखना चाहिए। इससे घर में हमेशा सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है।
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-प्रवीण शास्त्री, ज्यातिषाचार्य
ऐसे करें पूजन
गन्ने से मंडप तैयार करें। मध्य में भगवान हरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर 7 या 11 दीपक उनके समक्ष प्रज्वलित करें। भगवान को सिंघाड़ा, शकरकंद, मिष्ठान, नैवेद्य, केला, नारियल और मौसमी फल का भोग अर्पित करें। एकादशी की रात एक घी का दीपक जलाएं। भगवान के समक्ष रंगोली से अष्ट दल कमल बनाएं और उनके सभी भोग में तुलसी की पत्तियां अवश्य रखें। भगवान के विवाह के उपरांत प्रसाद वितरण करें।
-पंडित सीयाराम, शिव-हनुमान मंदिर पुजारी
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उदयातिथि के आधार पर देवउठनी एकादशी का व्रत 2 नवंबर के दिन रखा जाएगा। देवउठनी एकादशी के दिन व्रती भगवान विष्णु की पूजा सुबह 6:42 बजे से 7:52 बजे तक कर सकते हैं। त्रिस्पर्श और रवि योग में पूजा करना और भी फलदायी होगा। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 बजे से 5:49 मिनट तक रहेगा।
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घी का दीपक जलाने से आती है समृद्धि
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए और पूजा-पाठ के बाद पूरे घर-आंगन, छत और मुख्य द्वार पर दीया जरूर रखना चाहिए। इससे घर में हमेशा सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है।
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-प्रवीण शास्त्री, ज्यातिषाचार्य
ऐसे करें पूजन
गन्ने से मंडप तैयार करें। मध्य में भगवान हरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर 7 या 11 दीपक उनके समक्ष प्रज्वलित करें। भगवान को सिंघाड़ा, शकरकंद, मिष्ठान, नैवेद्य, केला, नारियल और मौसमी फल का भोग अर्पित करें। एकादशी की रात एक घी का दीपक जलाएं। भगवान के समक्ष रंगोली से अष्ट दल कमल बनाएं और उनके सभी भोग में तुलसी की पत्तियां अवश्य रखें। भगवान के विवाह के उपरांत प्रसाद वितरण करें।
-पंडित सीयाराम, शिव-हनुमान मंदिर पुजारी

-फोटो 64 : प्रवीण शास्त्री, ज्योतिषाचार्य- फोटो : samvad