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महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट
अमर उजाला ब्यूरो/ झज्जर / बहादुरगढ़
Updated Thu, 07 Jul 2016 01:46 AM IST
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vagitabele
- फोटो : Bureau
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महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे अधिक असर सब्जियों पर दिखाई दे रहा है। करीब महीनेभर के अंतराल में कई सब्जियों के रेट दुगने हो गए हैं। टमाटर के रेट तो बहुत ऊपर हैं। इससे रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। गृहणियों की परेशानी भी बेहद बढ़ गई है।
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बढ़ती महंगाई रसोई पर लगातार हावी होती जा रही है। खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों ने लोगों को सोचने पर विवश कर दिया है। पहले गर्मी और फिर बरसात के मौसम से सब्जियों पर बेहद असर पड़ा है। सब्जियों के रेट लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कुछ सब्जियों के दाम तो दोगुने हो गए हैं। महीनेभर पहले तक किलो के भाव से बिकने वाली सब्जियां फिलहाल पावभर के हिसाब से बिक रही हैं। टमाटर तो तड़का और सलाद से गायब होने लगा है। बेशक लोग मजबूरीवश सब्जियां खरीद रहे हैं, मगर ये महंगाई का ही नतीजा है कि सब्जी मंडी में रौनक कम हो गई है। कारोबार पर भी असर पड़ा है। पहले जहां मंडी में सुबह 11 बजे तक सब्जी बेचकर विक्रेता दुकान बंद कर देते थे, वे अब दोपहर 1 बजे तक बैठे दिखाई देते हैं।
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रसोई का बजट बिगड़ा
सेक्टर-7 निवासी ज्योति ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। दाल रोटी रोटी तो दूर की बात है अब तो चटनी बनाना भी पहुंच से बाहर होता जा रहा है। टमाटर और धनिया के दाम काफी बढ़ गए हैं। किलो की बजाय पावभर के हिसाब से टमाटर खरीदने पड़ रहे हैं।
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बिना सब्जी, रोटी कैसे खाएं?
सेक्टर-2 निवासी गीता ने कहा कि परचून की दुकान पर दालें महंगी और मंडी में सब्जियां महंगी हैं। बिना सब्जी के खाना कैसे खाएं? मजबूरन महंगी सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं। थोड़ा बहुत बढ़े तो चल जाए, मगर इतना रेट बढ़ जाना चिंता का विषय है। कोई ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सब्जियों के आमजन की पहुंच से बाहर न हो।
दालों के रेटों पर अंकुश लगे
मेन बाजार की निवासी शकुंतला ने कहा कि शहरीकरण हो जाने दूध-दही तो लगभग थाली से गायब है। दाल-रोटी खाने की कहावत अब बीती बात हो गई। संपन्न लोगों का तो दिक्कतें नहीं होती, लेकिन निर्धन तबके को दो वक्त की रोटी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार को दालों के रेटों में कमी लानी चाहिए।
स्टाक पर रोक लगे
नेहरू पार्क की निवासी आरती ने कहा कि बड़े आढ़ती भी इस सीजन का इंतजार करते हैं। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए आढ़तियों द्वारा स्टाक कर लिया जाता है, जिसका खामियाजा आमजन भुगतता है। गोदामों में सब्जियां सड़ कर खराब हो जाती जाती हैं, मगर दाम कम नहीं किए जाते। इसलिए सब्जियों के स्टाक पर रोक लगानी चाहिए।
-सब्जी विक्रेता
सब्जी विक्रेता विनोद ने कहा कि बरसात में लोकल सब्जियां खत्म हो जाती हैं। इसलिए सब्जियां बाहर से आ रहीं हैं। अभी और बरसात होगी, जिससे सब्जियों के रेट और अधिक बढ़ेंगे। जब लोकल सब्जियां आनी शुरू होंगी, तो रेट कम होते चले जाएंगे, लेकिन लोकल सब्जियों को आने में अभी वक्त लगेगा।
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सब्जी मंडी भाव क्वालिटी अनुसार
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सब्जी भाव वर्तमान 30 दिन पहले
टमाटर 45 से 50 25 से 30
तुरई 30 से 40 15 से 20
बैंगन 40 15 से 20
टिंडा 50 25 से 30
भिंडी 35 25
प्याज 15 से 20 10
आलू 15 से 18 12
करेला 25 से 30 15
मंडी में अच्छी किस्म की दालों के भाव
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दाल रिटेल थोक
अरहर 130 120
उड़द 140 130
चना दाल 95 90
राजमा 65 60
मलका 70 65
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खाद्य पदार्थों के दाम
रिटेल थोक
सरसों तेल 82 78
रिफाइंड 72 70
वनस्पति घी 65 63
चीनी 39 38
बेसन 100 96