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नहीं मिली यूरिया खाद, बिक्री केंद्रों पर परेशान रहे किसान
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अनाज मंडी में स्थित सरकारी बिक्री केंद्र पर खाद के बारे में पूछताछ करते किसान। संवाद
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। जिले के किसानों को गेहूं व सरसों की सिंचाई के साथ यूरिया खाद की आवश्यकता है। रविवार को यूरिया नहीं मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वे बिक्री केंद्रों पर खाद लेने के लिए परेशान दिखाई दिए। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च तक 38 हजार मीट्रिक टन (एमटी) यूरिया की आवश्यकता होती है। अब तक जिले को 10 हजार एमटी यूरिया ही मिल सका है। वहीं, स्टॉक में सिर्फ दो हजार एमटी खाद ही बची हुई है। उधर, अब किसानों को गेहूं-सरसों की सिंचाई के दौरान खाद की कमी खल रही है।
सरसों व गेहूं की बिजाई के तुरंत बाद यूरिया का छिड़काव किया जाता हैं। इसके बाद जिले में एक बार में करीब 2.5 लाख बैग यूरिया किसानों को मिलनी चाहिए। जिले में अब तक 10 हजार एमटी यूरिया पहुंच चुका है, जिसमें से आठ हजार एमटी यूरिया किसान खरीद चुके हैं। इसके अलावा दो हजार एमटी यूरिया स्टॉक में बचा हुआ है। कृषि विभाग की ओर से चार हजार बैग यूरिया के भिवानी में लगे रैक से भी मंगवा कर सरकारी व निजी बिक्री केंद्रों पर वितरित करवाएं गए हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले के किसानों को यूरिया खाद की कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए 38 हजार एमटी यूरिया की डिमांड विभाग को भेजी हुई है, जो किसानों के लिए पर्याप्त होगी। उन्होंने बताया कि समय-समय पर दूसरे जिलों में लगने वाले रैक से खाद किसानों को मिलती रहेगा। वहीं सरकारी व निजी बिक्री केंद्रों पर किसानों को यूरिया खाद के बैग कृषि अधिकारियों की देखरेख में बांटे जा रहे हैं। अफसरों के दावे के हकीकत कुछ और ही हैं। किसान अल सुबह ही बिक्री केंद्रों पर पहुंच कर लाइन में लगकर खाद लेने के लिए लग जाते हैं। किसानों के लिए खाद पूर्ण मात्रा में उपलब्ध करवाना कृषि विभाग के लिए बलबूते से बाहर होता नजर आ रहा है। इसका परिणाम यह रहा कि सरसों की बिजाई के दौरान भी डीएपी खाद की काफी किल्लत रही और काफी जमीन सरसों की बिजाई से वंचित रही। इसके अलावा किसानों ने अब रबी की गेहूं की फसल की बिजाई शुरू की हुई है।
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एक एकड़ में डाला जाता है दो से ढाई बैग यूरिया
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब ढाई लाख एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई होती है। जिन किसानों ने गेहूं की बिजाई किए हुए 21 दिन हो चुके हैं। उन किसानों ने सिंचाई का कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई के साथ ही किसानों ने यूरिया का छिड़काव भी शुरू कर दिया है।
कोट
किसानों की आवश्यकता के अनुसार यूरिया की डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। अभी जिले में करीब 28 हजार एमटी यूरिया की और आवश्यकता है। जिले में दो हजार एमटी यूरिया बचा हुआ है। विभिन्न स्थानों पर लगने वाले रैकों से जिले को खाद की आपूर्ति मिल रही है।
- डॉ जसवीर सिंह, जिला गुणवत्ता एवं नियंत्रक अधिकारी, झज्जर।
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सरसों व गेहूं की बिजाई के तुरंत बाद यूरिया का छिड़काव किया जाता हैं। इसके बाद जिले में एक बार में करीब 2.5 लाख बैग यूरिया किसानों को मिलनी चाहिए। जिले में अब तक 10 हजार एमटी यूरिया पहुंच चुका है, जिसमें से आठ हजार एमटी यूरिया किसान खरीद चुके हैं। इसके अलावा दो हजार एमटी यूरिया स्टॉक में बचा हुआ है। कृषि विभाग की ओर से चार हजार बैग यूरिया के भिवानी में लगे रैक से भी मंगवा कर सरकारी व निजी बिक्री केंद्रों पर वितरित करवाएं गए हैं।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले के किसानों को यूरिया खाद की कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए 38 हजार एमटी यूरिया की डिमांड विभाग को भेजी हुई है, जो किसानों के लिए पर्याप्त होगी। उन्होंने बताया कि समय-समय पर दूसरे जिलों में लगने वाले रैक से खाद किसानों को मिलती रहेगा। वहीं सरकारी व निजी बिक्री केंद्रों पर किसानों को यूरिया खाद के बैग कृषि अधिकारियों की देखरेख में बांटे जा रहे हैं। अफसरों के दावे के हकीकत कुछ और ही हैं। किसान अल सुबह ही बिक्री केंद्रों पर पहुंच कर लाइन में लगकर खाद लेने के लिए लग जाते हैं। किसानों के लिए खाद पूर्ण मात्रा में उपलब्ध करवाना कृषि विभाग के लिए बलबूते से बाहर होता नजर आ रहा है। इसका परिणाम यह रहा कि सरसों की बिजाई के दौरान भी डीएपी खाद की काफी किल्लत रही और काफी जमीन सरसों की बिजाई से वंचित रही। इसके अलावा किसानों ने अब रबी की गेहूं की फसल की बिजाई शुरू की हुई है।
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एक एकड़ में डाला जाता है दो से ढाई बैग यूरिया
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब ढाई लाख एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई होती है। जिन किसानों ने गेहूं की बिजाई किए हुए 21 दिन हो चुके हैं। उन किसानों ने सिंचाई का कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई के साथ ही किसानों ने यूरिया का छिड़काव भी शुरू कर दिया है।
कोट
किसानों की आवश्यकता के अनुसार यूरिया की डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। अभी जिले में करीब 28 हजार एमटी यूरिया की और आवश्यकता है। जिले में दो हजार एमटी यूरिया बचा हुआ है। विभिन्न स्थानों पर लगने वाले रैकों से जिले को खाद की आपूर्ति मिल रही है।
- डॉ जसवीर सिंह, जिला गुणवत्ता एवं नियंत्रक अधिकारी, झज्जर।