{"_id":"65fc5ec2c28e261a0800b38a","slug":"united-kisan-morcha-will-celebrate-martyrdom-day-as-save-democracy-day-jhjhar-news-c-200-1-bgh1002-106337-2024-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: शहीदी दिवस को लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाएगा संयुक्त किसान मोर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: शहीदी दिवस को लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाएगा संयुक्त किसान मोर्चा
Thu, 21 Mar 2024 09:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 21 Mar 2024 09:52 PM IST
विज्ञापन
बहादुरगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान शहीद ए आजम भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के शहीदी दिवस 23 मार्च को गांव-गांव में लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल व सचिव जयकरण मांडौठी ने बताया कि हमारे देश को ब्रिटिश साम्राज्य से आजाद करवाने में जो अनगिनत कुर्बानियां दी गई, उनमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को घर-घर में जाना जाता है। इन तीनों शहीदों से हमें आज भी इंकलाब की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि 93 वर्ष पूर्व 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी गई थी। उन्हें याद करते हुए हम कभी नहीं भूलते कि उनका लक्ष्य पूंजीपति राज की बजाय कमेरे वर्गों का राज स्थापित करने वाली क्रांति लाना था। एक ऐसा सिस्टम जहां आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, भाषा, जाति, लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के शोषण व भेदभाव की अनुमति नहीं हो। ऐसे महान शहीदों और किसान-मजदूरों के कठिन संघर्षों से हमें जो आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार व मूल्यबोध प्राप्त हुए थे, गत 75 सालों से उन्हें एक पर एक नष्ट किया जा रहा है। पिछले 10 सालों में तो हद हो गई। कॉरपोरेट-पूंजीपतियों के साथ भाजपा शासन, अपराधतंत्र और सांप्रदायिकता के भ्रष्ट गठजोड़ के रूप में देश को बर्बादी के कगार पर ले आया है। किसान, मजदूर कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर रहे हैं। करोड़ों युवा रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
विज्ञापन
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल व सचिव जयकरण मांडौठी ने बताया कि हमारे देश को ब्रिटिश साम्राज्य से आजाद करवाने में जो अनगिनत कुर्बानियां दी गई, उनमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को घर-घर में जाना जाता है। इन तीनों शहीदों से हमें आज भी इंकलाब की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि 93 वर्ष पूर्व 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी गई थी। उन्हें याद करते हुए हम कभी नहीं भूलते कि उनका लक्ष्य पूंजीपति राज की बजाय कमेरे वर्गों का राज स्थापित करने वाली क्रांति लाना था। एक ऐसा सिस्टम जहां आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, भाषा, जाति, लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के शोषण व भेदभाव की अनुमति नहीं हो। ऐसे महान शहीदों और किसान-मजदूरों के कठिन संघर्षों से हमें जो आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार व मूल्यबोध प्राप्त हुए थे, गत 75 सालों से उन्हें एक पर एक नष्ट किया जा रहा है। पिछले 10 सालों में तो हद हो गई। कॉरपोरेट-पूंजीपतियों के साथ भाजपा शासन, अपराधतंत्र और सांप्रदायिकता के भ्रष्ट गठजोड़ के रूप में देश को बर्बादी के कगार पर ले आया है। किसान, मजदूर कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर रहे हैं। करोड़ों युवा रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
विज्ञापन