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Jhajjar-Bahadurgarh News: शहादत दिवस पर कैप्टन कुलदीप सिंह राठी को किया नमन
Mon, 08 Dec 2025 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:48 AM IST
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-फोटो 56 : कैप्टन कुलदीप सिंह राठी के शहादत दिवस पर उन्हें नमन करते ग्रामीण। स्रोत समिति
बहादुरगढ़। भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए गांव सांखोल में शहीद कैप्टन कुलदीप सिंह राठी की शहादत दिवस पर उन्हें नमन किया गया। शहादत दिवस उनके स्मारक स्थल पर मनाया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि देश की रक्षा करते हुए झज्जर जिले के अनेक अंसख्य वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। गांव सांखोल निवासी कैप्टन कुलदीप भी इन वीरों में से एक हैं। उन्होंने पाकिस्तान के साथ 1971 युद्ध में अद्भूत शौर्य दिखाया और वीर गति को प्राप्त हुए। क्षेत्र के लोगों के जहन व आदर्शों में आज भी वह जीवित हैं। रविवार को संघर्षशील जनकल्याण समिति से जुड़े सदस्यों व ग्रामीणों ने उनके शहीदी स्मारक पर पहुंचकर उनकी शहादत को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्मारक परिसर भारत माता व शहीद कैप्टन कुलदीप सिंह अमर रहे के जयकारों से गूंज उठा। शहीद कैप्टन कुलदीप का जन्म 1 अगस्त 1947 को गांव सांखोल में हुआ था। उनके पिता तारीफ सिंह राठी भी सेना में कैप्टन रहे हैं। पिता से प्रेरित होकर उनमें भी देशसेवा का प्रेम जागा। कॉलेज की पढ़ाई दौरान ही उन्होंने एनडीए परीक्षा पास कर ली थी और 21 दिसंबर 1968 में उन्हें सेना में कमीशन मिला था और कमीशन मिलने के 3 साल बाद ही पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया था। कैप्टन कुलदीप सिंह पूंछ सेक्टर में मोर्चा संभाले हुए थे। इसी दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए वह वीरगति को प्राप्त हो गए थे। महज 24 साल की उम्र में ही देश सेवा के लिए अपने सर्वोच्च प्राणों का बलिदान कर दिया था। मरणोपरांत इन्हें वीर चक्र दिया गया। उनके शहादत दिवस पर समिति सदस्यों व ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की।
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ग्रामीणों ने कहा कि देश की रक्षा करते हुए झज्जर जिले के अनेक अंसख्य वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। गांव सांखोल निवासी कैप्टन कुलदीप भी इन वीरों में से एक हैं। उन्होंने पाकिस्तान के साथ 1971 युद्ध में अद्भूत शौर्य दिखाया और वीर गति को प्राप्त हुए। क्षेत्र के लोगों के जहन व आदर्शों में आज भी वह जीवित हैं। रविवार को संघर्षशील जनकल्याण समिति से जुड़े सदस्यों व ग्रामीणों ने उनके शहीदी स्मारक पर पहुंचकर उनकी शहादत को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
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स्मारक परिसर भारत माता व शहीद कैप्टन कुलदीप सिंह अमर रहे के जयकारों से गूंज उठा। शहीद कैप्टन कुलदीप का जन्म 1 अगस्त 1947 को गांव सांखोल में हुआ था। उनके पिता तारीफ सिंह राठी भी सेना में कैप्टन रहे हैं। पिता से प्रेरित होकर उनमें भी देशसेवा का प्रेम जागा। कॉलेज की पढ़ाई दौरान ही उन्होंने एनडीए परीक्षा पास कर ली थी और 21 दिसंबर 1968 में उन्हें सेना में कमीशन मिला था और कमीशन मिलने के 3 साल बाद ही पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया था। कैप्टन कुलदीप सिंह पूंछ सेक्टर में मोर्चा संभाले हुए थे। इसी दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए वह वीरगति को प्राप्त हो गए थे। महज 24 साल की उम्र में ही देश सेवा के लिए अपने सर्वोच्च प्राणों का बलिदान कर दिया था। मरणोपरांत इन्हें वीर चक्र दिया गया। उनके शहादत दिवस पर समिति सदस्यों व ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की।
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