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आधुनिक युग में बदल गया खानपान का तरीका : डॉ. दलबीर
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झज्जर। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में महिला प्रकोष्ठ के तत्वाधान में पोषण और इसके प्रभावों पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुदीक्षा और जिला किशोर स्वास्थ्य परामर्शदाता संदीप कुमार जांगड़ा मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम का आयोजन और मंच संचालन डॉ. ज्योति ने किया।
प्राचार्य डॉ. दलबीर सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित आहार के महत्त्व के बारे में बताया और कहा कि आधुनिक युग में खानपान की प्रवृत्ति बदल गई है। आजकल बाकली यानि उबले हुए चनों की जगह बिस्कुट बांटे जाते हैं जबकि काला चना आयरन का स्रोत होता है और एनीमिया को दूर करता है। बिस्कुट मैदा के बने होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं। डॉ. सुदीक्षा ने पोषण के महत्त्व के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला और शारीरिक, मानसिक तथा प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य पर चर्चा की। वक्ता संदीप जांगड़ा ने पोषक तत्वों और मौसम के अनुरूप भोजन का महत्त्व बताया। उन्होंने कहा कि हमें जंक फूड और फास्ट फूड से दूर रहकर संतुलित भोजन लेना चाहिए। इस दौरान विद्यार्थियों को पोषण संबंधी शपथ भी दिलवाई गई। कार्यक्रम के आयोजन में महिला प्रकोष्ठ की सदस्य सविता, पूनम और डॉ. अंजू ने सहयोग दिया।
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प्राचार्य डॉ. दलबीर सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित आहार के महत्त्व के बारे में बताया और कहा कि आधुनिक युग में खानपान की प्रवृत्ति बदल गई है। आजकल बाकली यानि उबले हुए चनों की जगह बिस्कुट बांटे जाते हैं जबकि काला चना आयरन का स्रोत होता है और एनीमिया को दूर करता है। बिस्कुट मैदा के बने होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं। डॉ. सुदीक्षा ने पोषण के महत्त्व के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला और शारीरिक, मानसिक तथा प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य पर चर्चा की। वक्ता संदीप जांगड़ा ने पोषक तत्वों और मौसम के अनुरूप भोजन का महत्त्व बताया। उन्होंने कहा कि हमें जंक फूड और फास्ट फूड से दूर रहकर संतुलित भोजन लेना चाहिए। इस दौरान विद्यार्थियों को पोषण संबंधी शपथ भी दिलवाई गई। कार्यक्रम के आयोजन में महिला प्रकोष्ठ की सदस्य सविता, पूनम और डॉ. अंजू ने सहयोग दिया।
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