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किसानों ने थानों का घेराव टाला, मुस्तैद रहे सुरक्षाकर्मी

Tue, 08 Jun 2021 12:28 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 12:28 AM IST
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The farmers avoided the gherao of the police stations, the security personnel were ready
बहादुरगढ़। टोहाना में विधायक देवेंद्र बबली के साथ हुए विवाद में किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को निरस्त न करने पर सोमवार को थानों के घेराव का कार्यक्रम किसानों ने रद्द कर दिया। लेकिन सभी थानों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाबल दिनभर अलर्ट रहे। उधर, टीकरी बार्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की सभा हुई और नयागांव चौक पर भाकियू एकता ने सभा की।
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शहर थाना बहादुरगढ़ को रैपिड एक्शन फोर्स ने सुबह 10 बजे की अपने घेरे में ले लिया। पांच लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई। सुरक्षा कर्मियों की एक लाइन थाने के सामने रोड डिवाइडर पर रही। ये सुरक्षा कर्मी आंसू गैस के इंतजाम के साथ थे। सुरक्षा कर्मियों की दूसरी लाइन मेन गेट पर, तीसरी सीढ़ियों के पास और चौथी बालकनी में रही। जबकि थाने के अंदर खुद थाना पुलिस अलर्ट रही। हालांकि अपने संगठन स्तर पर तय हुए कार्यक्रम के अनुसार आंदोनकारी किसान थाने के घेराव के लिए नहीं आए।
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नयागांव चौक के पास सभा में भारतीय किसान यूनियन एकता सचिव सिंगारा सिंह मान ने तीनों नए केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस तरह ये कानून किसानों की जमीन उद्योगिक घरानों के हवाले करने के लिए बनाए हैं, उसी तरह कंपनियों को कामगारों की लूट को छूट देने के लिए श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं। यूनियन के जिला संगरूर के प्रधान अमरीक सिंह गढूआं ने कहा कि जमीन को बचाना है तो संघर्ष करना ही होगा। बठिंडा के नेता बसंत सिंह ने 2014 में भाजपा सरकार बनने पर लाए गए भूमि अधिग्रहण एक्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया। अब 5 जून 2020 को लाए गए खेती कानून से लोगों की जिंदगी-मौत का सवाल बना हुआ है। जसवंत सिंह तोलावाल, कुलदीप सिंह अमृतसर, कृष्ण प्याला, पलविंदर सिंह रायपुर, गुरदेव सिंह गज्जूमाजरा और बलविंदर कौर पंधेर ने भी संबोधन किया।
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संयुक्त किसान मोर्चे के सदस्य जगजीत सिंह डालेवाल भी सोमवार को टीकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने किसानों के पड़ाव में कई जगह किसानों से मुलाकात की। कहा कि किसानों की जीत जरूर होगी, किसानों की जीत होने की नींव बंगाल से रखी गई। बंगाल में भाजपा को हराने में किसानों की बड़ी भूमिका रही। यूपी में भी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितना किसानों के मुद्दे को लटका रहे हैं, वो अपनी पार्टी का उतना ही नुकसान कर रहे हैं। लेकिन जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन चलता रहेगा।
किसानों ने रद्द किया बादली पुलिस थाने पर प्रदर्शन
बादली। ढांसा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार से तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग दोहराई। किसानों को संबोधित करते हुए गुलिया खाप के प्रधान विनोद बादली ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 7 जून को पुलिस थानों पर धरने की रणनीति में बदलाव कर दिया गया है। अब थाने का घेराव नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बार-बार किसानों को भड़काने की कोशिश कर रही है, कभी किसानों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है तो कभी झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। महिला किसानों पर लाठीचार्ज करना और भी बर्बरता है। लेकिन इसके बाद किसान अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। किसान छह माह से दिल्ली की दहलीज पर बैठे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर रही। सरकार कानूनों को रद्द करने और एमएसपी दोनों ही मांगों पर बातचीत करने को भी तैयार नहीं है।

किसान यूनियन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र डागर ने कहा कि यह केवल हरियाणा और पंजाब से जुड़ा आंदोलन नहीं है बल्कि इसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड सहित सभी प्रदेशों के किसान भागीदारी कर रहे हैं। आने वाले समय में दूरस्थ राज्यों के किसान भी दिल्ली की सीमा पर पहुंचेंगे और केंद्र सरकार को जगाएंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना की आड़ लेकर पिछले वर्ष कानून बनाए गए और इस वर्ष कोरोना की आड़ में ही किसान आंदोलन को फेल करने की रणनीति बनाई जा रही है। किसान किसी भी सूरत में आंदोलन से वापस नहीं जाएंगे और अपनी दोनों प्रमुख मांगे पूरी होने के बाद घर वापसी करेंगे। इस अवसर पर जय प्रकाश बेनीवाल, हिम्मल पहलवान, बेदन ठेकेदार, सतपाल फौजी सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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