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Jhajjar-Bahadurgarh News: देवउठनी एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग
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-फोटो 62 : प्रवीण शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
बहादुरगढ़। कार्तिक शुक्ल एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी (देवोत्थान एकादशी) के रूप में मनाई जाती है। इस साल 12 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। इस दिन प्रभु श्रीहरि विष्णु चार माह बाद निद्रा योग से उठते हैं। इस दिन से ही चार्तुमास का समापन होगा और शादी समेत सभी मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे।
देवउठनी एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में तुलसी विवाह का आयोजन कराया जाता है। उदयातिथि के आधार पर देवउठनी एकादशी का व्रत 12 नवंबर मंगलवार के दिन रखा जाएगा। देवउठनी एकादशी के दिन व्रती भगवान विष्णु की पूजा सुबह 6:42 बजे से 7:52 बजे तक कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना और भी फलदायी होगा। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 बजे से 5:49 मिनट तक रहेगा।
घी का दीपक जलाने से आती है समृद्धि
देवोत्थान एकादशी पर भगवान श्री विष्णु के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए और पूजा-पाठ के बाद पूरे घर-आंगन, छत और मुख्य द्वार पर दीया जरूर रखना चाहिए। इससे घर में हमेशा सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है। -प्रवीण शास्त्री, ज्यातिषाचार्य
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ऐसे करें पूजन
गन्ने से मंडप तैयार करें। मध्य में भगवान हरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर 7 या 11 दीपक उनके समक्ष प्रज्वलित करें। भगवान को सिंघाड़ा, शकरकंद, मिष्ठान, नैवेद्य, केला, नारियल और मौसमी फल का भोग अर्पित करें। एकादशी की रात एक घी का दीपक जलाएं। भगवान जी के समक्ष रंगोली से अष्ट दल कमल बनाएं और उनके सभी भोग में तुलसी की पत्तियां अवश्य रखें। भगवान के विवाह के बाद प्रसाद वितरण करें। -पंडित सीयाराम, शिव-हनुमान मंदिर पुजारी
देवउठनी एकादशी की पूजा विधि
- देवउठनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें।
- स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- विष्णु जी का ध्यान करें और संभव हो तो व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी, माता लक्ष्मी और तुलसी के पौधे की पूजा करें।
-विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं, विष्णु जी को तिलक लगाएं।
-उन्हें पीले फूल, फल, पीले रंग की मिठाई और तुलसी का पत्ता चढ़ाएं।
- विष्णु जी के बीज मंत्रों का जाप करें, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
- विष्णु जी और तुलसी की आरती उतारें।
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देवउठनी एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में तुलसी विवाह का आयोजन कराया जाता है। उदयातिथि के आधार पर देवउठनी एकादशी का व्रत 12 नवंबर मंगलवार के दिन रखा जाएगा। देवउठनी एकादशी के दिन व्रती भगवान विष्णु की पूजा सुबह 6:42 बजे से 7:52 बजे तक कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना और भी फलदायी होगा। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 बजे से 5:49 मिनट तक रहेगा।
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घी का दीपक जलाने से आती है समृद्धि
देवोत्थान एकादशी पर भगवान श्री विष्णु के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए और पूजा-पाठ के बाद पूरे घर-आंगन, छत और मुख्य द्वार पर दीया जरूर रखना चाहिए। इससे घर में हमेशा सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है। -प्रवीण शास्त्री, ज्यातिषाचार्य
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ऐसे करें पूजन
गन्ने से मंडप तैयार करें। मध्य में भगवान हरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर 7 या 11 दीपक उनके समक्ष प्रज्वलित करें। भगवान को सिंघाड़ा, शकरकंद, मिष्ठान, नैवेद्य, केला, नारियल और मौसमी फल का भोग अर्पित करें। एकादशी की रात एक घी का दीपक जलाएं। भगवान जी के समक्ष रंगोली से अष्ट दल कमल बनाएं और उनके सभी भोग में तुलसी की पत्तियां अवश्य रखें। भगवान के विवाह के बाद प्रसाद वितरण करें। -पंडित सीयाराम, शिव-हनुमान मंदिर पुजारी
देवउठनी एकादशी की पूजा विधि
- देवउठनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें।
- स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- विष्णु जी का ध्यान करें और संभव हो तो व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी, माता लक्ष्मी और तुलसी के पौधे की पूजा करें।
-विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं, विष्णु जी को तिलक लगाएं।
-उन्हें पीले फूल, फल, पीले रंग की मिठाई और तुलसी का पत्ता चढ़ाएं।
- विष्णु जी के बीज मंत्रों का जाप करें, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
- विष्णु जी और तुलसी की आरती उतारें।

-फोटो 62 : प्रवीण शास्त्री, ज्योतिषाचार्य