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परिजन बोले, दीपक की उम्र बेहद कम, आने वाले समय में और भी मिलेंगे मौके
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अपने घर में टीवी पर अपने बेटे दीपक की कुश्ती देखते सुभाष पूनिया। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
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गांव छारा के दीपक पूनिया टोक्यो ओलंपिक के 86 किलोग्राम भार वर्ग के फ्रीस्टाइल रेसलिंग मुकाबले में आखिरी चंद सेकंडों में कांस्य पदक से चूक गए। दीपक की इस हार से परिवार को मायूसी तो हुई है। लेकिन उनके हौसले अब भी बुलंद हैं।
ये दीपक की हार नहीं
दीपक का मुकाबला देखने के लिए घर में बड़ी टीवी स्क्रीन पर परिजनों और ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई थीं। शुरुआत में दीपक ने अंक हासिल किए तो सबके चेहरे खिल उठे थे। बाद में मैच के अंतिम चंद सेकंड में दीपक हार गए। लेकिन उनकी हार के बावजूद छारा गांव के लोगों के हौसले नहीं टूटे हैं। पिता सुभाष ने कहा कि दीपक की उम्र अभी बेहद कम है। आगे आने वाले समय में उसे ओलंपिक खेलने के और भी मौके मिलेंगे। ये कोई बड़ी हार नहीं है। उन्होंने कहा कि दीपक कम से कम ओलंपिक के अनुभव लेकर तो लौटेगा। बेटे की इस हार का भी हम स्वागत करेंगे।
अटैकिंग खेलते तो रहता बेहतर
दीपक के घर मैच देख आए ग्रामीण बबलू प्रधान ने कहा कि अंतिम समय में दीपक ने प्वाइंट खोए हैं। उन्हें डिफेंसिव होने के बजाय अटैकिंग मोड में ही रहना चाहिए था। मगर फिर भी दीपक ने गांव का नाम विश्व स्तर पर चमकाया है। ऐसे में दीपक की हार नहीं हुई है। आगे आने वाले समय में और भी बहुत सारी प्रतियोगिताएं होनी है। जहां दीपक अपने देश का नाम रोशन करेगा और एक दिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाएगा।
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अभी कई मौके और
दीपक के कोच आर्य वीरेंद्र ने कहा कि दीपक बहुत अच्छा खिलाड़ी है। ये उसका पहला ओलंपिक था। इसके बावजूद उसने अपने भार वर्ग में दुनिया के कई चुनिंदा खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल तक प्रवेश किया। ओलंपिक में 32 साल की उम्र तक लड़ने का मौका मिलता है और अभी दीपक की आयु केवल 22 साल है। इस तरह उसको ओलंपिक में खेलने के अभी कई और मौके मिलेंगे।
बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवान दीपक पूनिया 86 किलोग्राम वेट कैटेगरी का ब्रॉन्ज मेडल का मुकाबला हार गए। सैन मैरिनों के माइल्स अमीन ने उन्हें 4-2 से हरा दिया। पांच मिनट 40 सेकंड तक दीपक 2-1 से आगे थे। लेकिन दूसरे बाउट में आखिरी 20 सेकेंड में माइल्स दीपक पर हावी हो गए और मैच को 4-2 से जीत लिया। सेमीफाइनल में दीपक पूनिया को अमेरिका के डेविड मौरिस टेलर से हार का सामना करना पड़ा था।
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ये दीपक की हार नहीं
दीपक का मुकाबला देखने के लिए घर में बड़ी टीवी स्क्रीन पर परिजनों और ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई थीं। शुरुआत में दीपक ने अंक हासिल किए तो सबके चेहरे खिल उठे थे। बाद में मैच के अंतिम चंद सेकंड में दीपक हार गए। लेकिन उनकी हार के बावजूद छारा गांव के लोगों के हौसले नहीं टूटे हैं। पिता सुभाष ने कहा कि दीपक की उम्र अभी बेहद कम है। आगे आने वाले समय में उसे ओलंपिक खेलने के और भी मौके मिलेंगे। ये कोई बड़ी हार नहीं है। उन्होंने कहा कि दीपक कम से कम ओलंपिक के अनुभव लेकर तो लौटेगा। बेटे की इस हार का भी हम स्वागत करेंगे।
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अटैकिंग खेलते तो रहता बेहतर
दीपक के घर मैच देख आए ग्रामीण बबलू प्रधान ने कहा कि अंतिम समय में दीपक ने प्वाइंट खोए हैं। उन्हें डिफेंसिव होने के बजाय अटैकिंग मोड में ही रहना चाहिए था। मगर फिर भी दीपक ने गांव का नाम विश्व स्तर पर चमकाया है। ऐसे में दीपक की हार नहीं हुई है। आगे आने वाले समय में और भी बहुत सारी प्रतियोगिताएं होनी है। जहां दीपक अपने देश का नाम रोशन करेगा और एक दिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाएगा।
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अभी कई मौके और
दीपक के कोच आर्य वीरेंद्र ने कहा कि दीपक बहुत अच्छा खिलाड़ी है। ये उसका पहला ओलंपिक था। इसके बावजूद उसने अपने भार वर्ग में दुनिया के कई चुनिंदा खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल तक प्रवेश किया। ओलंपिक में 32 साल की उम्र तक लड़ने का मौका मिलता है और अभी दीपक की आयु केवल 22 साल है। इस तरह उसको ओलंपिक में खेलने के अभी कई और मौके मिलेंगे।
बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवान दीपक पूनिया 86 किलोग्राम वेट कैटेगरी का ब्रॉन्ज मेडल का मुकाबला हार गए। सैन मैरिनों के माइल्स अमीन ने उन्हें 4-2 से हरा दिया। पांच मिनट 40 सेकंड तक दीपक 2-1 से आगे थे। लेकिन दूसरे बाउट में आखिरी 20 सेकेंड में माइल्स दीपक पर हावी हो गए और मैच को 4-2 से जीत लिया। सेमीफाइनल में दीपक पूनिया को अमेरिका के डेविड मौरिस टेलर से हार का सामना करना पड़ा था।