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Jhajjar-Bahadurgarh News: सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, एचएसवीपी ने लिए 12 सैंपल
Mon, 20 Oct 2025 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 20 Oct 2025 01:34 AM IST
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बहादुरगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने सेक्टर 10 और 11 में बन रही सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सैंपल जांच की कार्रवाई की है। एसडीओ कृष्ण मलिक के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने श्रीराम लैब की विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए कोर कटिंग की।
सेक्टर 10-11 में बनी सड़कों से 12 जगह कोर कटिंग सैंपल लिए गए हैं। इन सड़कों का निर्माण लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया है। प्रारंभिक जांच में सड़कों की थिकनेस यानी मोटाई मानक के अनुसार पाई गई है, लेकिन निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता का अंतिम परिणाम लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी प्रकार की निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग विकास कार्यों में न किया जाए। सभी लिए गए सैंपल अब श्रीराम लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं, जहां बिटुमिन, एग्रीगेट, मिक्सिंग अनुपात और कम्पैक्शन जैसे मापदंडों पर परीक्षण किया जाएगा।
एसडीओ कृष्ण मलिक ने बताया कि एसएसवीपी की प्राथमिकता नागरिकों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़कें उपलब्ध कराना है। विभाग समय-समय पर जांच करता रहेगा ताकि किसी भी ठेकेदार या निर्माण एजेंसी द्वारा लापरवाही या नियमों की अनदेखी न हो सके। यदि लैब रिपोर्ट में कोई सैंपल फेल पाया जाता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इसमें जुर्माना, ठेका निरस्तीकरण या भविष्य में कार्य आवंटन पर रोक जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। पहले कई बार सड़कों के जल्दी टूटने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब गुणवत्ता जांच से जवाबदेही तय होगी और बेहतर सड़कों का निर्माण संभव होगा।
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सेक्टर 10-11 में बनी सड़कों से 12 जगह कोर कटिंग सैंपल लिए गए हैं। इन सड़कों का निर्माण लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया है। प्रारंभिक जांच में सड़कों की थिकनेस यानी मोटाई मानक के अनुसार पाई गई है, लेकिन निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता का अंतिम परिणाम लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी प्रकार की निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग विकास कार्यों में न किया जाए। सभी लिए गए सैंपल अब श्रीराम लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं, जहां बिटुमिन, एग्रीगेट, मिक्सिंग अनुपात और कम्पैक्शन जैसे मापदंडों पर परीक्षण किया जाएगा।
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एसडीओ कृष्ण मलिक ने बताया कि एसएसवीपी की प्राथमिकता नागरिकों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़कें उपलब्ध कराना है। विभाग समय-समय पर जांच करता रहेगा ताकि किसी भी ठेकेदार या निर्माण एजेंसी द्वारा लापरवाही या नियमों की अनदेखी न हो सके। यदि लैब रिपोर्ट में कोई सैंपल फेल पाया जाता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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इसमें जुर्माना, ठेका निरस्तीकरण या भविष्य में कार्य आवंटन पर रोक जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। पहले कई बार सड़कों के जल्दी टूटने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब गुणवत्ता जांच से जवाबदेही तय होगी और बेहतर सड़कों का निर्माण संभव होगा।